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Wednesday, December 8, 2021

परिवार 👪

परिवार को मालिक नहीं 
माली बनकर संभालो,

जो ध्यान तो सबका रखता हो पर
अधिकार किसी पर न जताता हो !!

Monday, November 8, 2021

बाप बेटी का प्यार

अगर कांटा भी चुभा तो
बाप को बर्दास्त नहीं होता,,, 

इस कदर प्यारी होती है 
बेटी बाप को।।। 


कन्यादान

निकाल कर जिस्म से 
अपनी जान दे देता है,

बड़ा ही मजबूत है वो पिता 
जो कन्यादान देता है !!




Thursday, October 21, 2021

माँ

इस दुनिया में 
सबसे अमीर वही लगता है 

जो अपनी 
मां के पास रहता है...Dj 

Wednesday, June 23, 2021

यादें

इस साईकिल कि फ्रेम में लगी 
बच्चे की गद्दी बता रही है कि, 

परिंदे उङ गये और बस यादे शेष बची है... 

Saturday, June 19, 2021

अनाथ

एक सूखा पेड़ पड़ा है 
अकेला आंगन में, 

कौन कहता है सिर्फ 
बच्चे अनाथ होते हैं... 

Thursday, March 11, 2021

तोहफा

माँ बाप को तोहफे में 
कामयाबी दो,

बाकी सब तो वो खुद भी 
कमा लेते है !!

Tuesday, April 14, 2020

मजबूरी मे मजबूती (मां)

अख़बार बेचने वाला 10 वर्षीय बालक एक मकान का गेट बजा रहा है।


मालकिन - बाहर आकर पूछी क्या है ?

बालक - आंटी जी क्या मैं आपका गार्डेन साफ कर दूं ?

मालकिन - नहीं, हमें नहीं करवाना है, और आज अखबार नही लाया ।

बालक - हाथ जोड़ते हुए दयनीय स्वर में.. "प्लीज आंटी जी करा लीजिये न,

अच्छे से साफ करूंगा,आज अखबार नही छपा,कल छुट्टी थी दशहरे की ।"

मालकिन - द्रवित होते हुए "अच्छा ठीक है, कितने पैसा लेगा ?"

बालक - पैसा नहीं आंटी जी, खाना दे देना।"

बालक - एक घंटे बाद "आंटी जी देख लीजिए, सफाई अच्छे से हुई कि नहीं।

मालकिन -अरे वाह! तूने तो बहुत बढ़िया सफाई
की है, यहां बैठ, मैं खाना लाती हूँ।

जैसे ही मालकिन ने उसे खाना दिया, 
बालक जेब से पन्नी निकाल कर उसमें खाना रखने लगा।

मालकिन - भूखे काम किया है, अब खाना तो यहीं बैठकर खा ले। जरूरत होगी तो और दे दूंगी।

बालक - नहीं आंटी, 
मेरी बीमार माँ घर पर है,
सरकारी अस्पताल से दवा तो मिल गयी है,

पर 
डाॅ साहब ने कहा है 
दवा खाली पेट नहीं खाना है।


मालकिन की पलके गीली हो गई.
🙏🙏😥😥😥

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Monday, February 10, 2020

वृद्धाश्रम मे एक मां कि मनोस्थिति

महिला वृद्धाश्रम की गली से 
द्रवित हुआ है हृदय दोबारा, 



इस छोटी सी दुनिया में कैसे कैसे लोग पड़े हैं, 
इस छोटी सी दुनिया में


गर्भ में जो महफूज हमेशा संतानों को रखती है
आज वही बेबस सी जननी, राह किसी की तकती है

अपनापन थोड़ा ही कोई, काश इन्हे भी दे जाए
बूढ़ी आंखे बात बात पर, यू ही ना ही बहती हैं

कैसे भारी जीवन काटे, लोग कंटीली दुनिया में 
द्रवित हुआ है हृदय दोबारा, इस छोटी सी दुनिया में

कोई पीड़ित संतानों से, कोई भाग्य की मारी है 
किसी को जग ने ठुकराया तो,कोई वक़्त से हारी है 

फिर भी हमने देखी करुणा, जो मां के दिल में होती है

पूत कपूत भले बनते है, फिर भी वो महतारी है
कितनी  निर्मम संताने है,  इस छोटी सी दुनिया में

द्रवित हुआ है हृदय दोबारा, 
इस छोटी सी दुनिया में

हे ईश्वर इस जग में कोई, बेबस होकर ना भटके
प्यार, दुलार मिले बच्चो का,कोई ऐसे ना तरसे

सबके दिल में भर दे करुणा, सद्बुद्धि का दान मिले
रहे ना कोई बेघर बूढ़ा, सबको घर में स्थान मिले

दया दृष्टि करदे हे दाता, इस छोटी सी दुनिया में 
द्रवित हुआ है हृदय हमारा, इस छोटी सी दुनिया में,,

Saturday, July 20, 2019

माँ

1)
रेंगता लुढकता तेरी उंगली के सहारे न जाने कब मैं खड़ा हो गया,

यह वक्त इतना क्यों तेज चलता है मां जो मैं इतना जल्दी बड़ा हो गया।।

2)
समझ जाते हैं भगवान भी तेरी इशारे को
थोड़ा इस जिंदगी को भी समझा देना मां,

थक गया हूं मैं जिंदगी की इस भागदौड़ से
थोड़ा आराम चाहता गोद में सुला ले ना मां।।

3)
नहीं मिटा पाया मैं भूख खाकर खाना महंगे होटलों से,

कैसे मिटा देती थी आप मां अपने आटे भरे हाथों के 1-2 निवाले से।।

4)
महंगे खानों ने तो सिर्फ जुबान हवस मिटाई है,

भूख तो मां तेरे चुल्हे की रोटी ने मिठाई है ।।

5)
कैसे हो सकता कद तेरा ऊँचा किसी भी माँ से ए खुदा,

तू सिर्फ आदमी बनाता है, इन्सान तो वही बनाती है ना ।।

Wednesday, July 17, 2019

मां कि सिख

दोस्तों आज मैं एक ऐसी कहानी लेकर आया हूं जिसमें लड़की के मायके वालों का क्या योगदान होता है जो लड़की की जिंदगी ओर उसके ससुराल को खुशहाल बनाने में मदद कर सकता है।।।

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एक लड़की थी जो खुले विचारों की और आजाद रहने की आदी थी,







उसकी शादी एक ऐसे परिवार में हो गई थी जहां संस्कार मान मर्यादा को ज्यादा महत्व दिया जाता था !

इसलिए उस लड़की की अपने सास के साथ और बाकी परिवार वालों के साथ ज्यादा नहीं बनती थी !
उसका पति मां का साथ देता था उसके लिए कई बार अपने पति से भी नाराज रहती थी !


दूसरी ओर उस लड़की के भाई की पत्नी कि बातें सुनकर वह परेशानी होती थी कि उसके मायके वालों ने तो उनकी बहु को इतनी इजाजत क्यूं दे  रखी है तो मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है!


1 दिन बाद बात कुछ ज्यादा बढ़ने से वह ससुराल छोड़कर अपने मायके आ गई!


घर आने पर मां ने कारण पूछा तो उसने बताया कि वह वह मेरे को उनकी मर्जी के हिसाब से रखना चाहते हैं


तुम तो भाभी को उनकी मर्जी से जिंदगी जीने देती हो पर मेरे को ऐसा कुछ करने से रोका जा रहा है,


मां ने पूरी बात सुनी और अपनी बच्ची को समझाते हुए कहा कि
तुम्हारी भाभी मैं और तुम्हारे में बहुत अंतर है!

तो बेटी तुनक कर बोली मां आप भी भाभी की ही साइड ले रहे हो मेरा तो कोई नहीं है इस दुनिया में!
मैं भी वही सारे काम करती हूं जो भाभी करती है तो फिर अंतर किस बात का!


मां बोली मानती हूं
जो काम तेरी भाभी करती है तू भी वही सारे काम करती है,

पर फर्क सिर्फ इस बात का है कि तू दुखी होकर काम करती है और वह खुश होकर!
तो अपने काम को बोझ समझकर करती है और वह है उसको जिम्मेदारी समझकर करती है!

तो बेटी बोली,
ऐसा कुछ नहीं है मां मैं भी खुश होकर ही काम करती हूं
वैसे है कहां भाभी !

अभी मिलकर सारी बात पता कर लेते हैं

तो मां प्यार से बोली अभी तो वह है बाहर गई हुई है अपनी सहेलियों से मिलने,

बेटी बोली मां आपने अपनी बहू को सर पर चढ़ा के रखा है
क्या रोज रोज इधर-उधर मिलने जाना घर पर नहीं रह सकती क्या जैसी मे रहती हूं

मां मुस्कुराते हुए बोली
तू एक काम कर आज यहीं रुक और सिर्फ देख वह कैसे काम करती है उससे कुछ भी मत बोलना.


थोड़ी देर बाद में उसकी भाभी आई और हंसते हुए उसका स्वागत करते हुए हालचाल पूछे थोड़ी बहुत बात की वह बोली मैं आपके लिए चाय नाश्ता बना कर लाती हूं


भाभी के जाने के बाद

मां ने बेटी से पूछा

कभी तुमने अपने ननद से इतने प्यार से बात की क्या?

तो बेटी बोली -
मैं तो बहुत अच्छी हूं इसके लिए भाभी ने प्यार से बात की,

पर मेरी ननद तो बहुत बुरी है मैं उसे कभी प्यार से बात नहीं करूंगी!

मां बोली 
हां बेटा तू बहुत प्यारी है तभी कुछ देर पहले मेरे पास अपनी भाभी की तारीफ कर रही थी!

इस बात पर बेटी को गुस्सा आया बोली -
मां आप फिर से भाभी की साइड ले रहे हो!


थोड़ी देर में भाभी उनके लिए चाय नाश्ता लेकर आ गई और सभी ने प्यार से बातें करते करते चाय नाश्ता किया,
थोड़े समय बाद भाभी ने अपने सास से बोली

मां जी आज आपकी पसंद का कुछ नहीं बनेगा आज  दीदी जो कहेगी वही बनायेंगे

तो बेटी बीच में बोली हमेशा क्या तू मम्मा से पूछकर बनाती है क्या?

तभी मां बोली हां बेटी यह हमेशा कुछ भी करने से पहले यह मुझसे एक बार सलाह जरूर लेती है,

तब बेटी खुशी खुशी भाभी को ऑर्डर लिखवाने लगी
यह भी बनाओ यह भी बनाओ और यह भी।

भाभी रसोई में चली जाती है 

तो
 मां बेटी को पूछती है 
कभी तुम्हें अपनी सास को चाय तक के लिए पूछा है क्या


बेटी की खुशी अचानक गायब हो जाती हैं वह नजर झुका कर बोलती है
नहीं मां

तो मां बोली बेटी जब तुम को उनकी खुशी से लेना देना नहीं है तो उनको तेरी खुशी से क्या लेना देना।


तभी घर की डोरवेल बजती है
भाभी दरवाजा खोलने जाती है
और सामने अपने पति को देखें बोलती हे आज आपके लिए एक सरप्राइज है आंखें बंद करो
पति भी मुस्कुराते हुए बोला - कैसा सा सरप्राइज ?
भाभी बोलती हे आप आंखें तो बंद करो और अंदर आओ,






भाभी अपने पति को उनकी बहन के सामने खड़ा करके बोलती अभी आंखें खोलो,

पति आंखें खुलते ही अपनी बहन को सामने देखता है और खुशी से झूम उठता है

भाई बहन खुशी से गले मिलते है

तभी भाभी बोलती हे आप जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जाईये ।

मैं खाना लगा देती हूं

सभी साथ में बैठ के खाना खाएंगे,

भाई कमरे में जाता है भाभी रसोई में जाती है

तभी मां अपनी बेटी से उसी है क्या तूने कभी अपने पति का इस तरह खुश होकर स्वागत किया ?

बेटी मायूस होकर बोलती हे
सॉरी मां मैंने कभी ऐसा नहीं किया।
सभी साथ मिलकर खाना खाते है
और साथ में बैठकर हंसी खुशी बातें करते है ।

बेटा बोलता है चलो बहुत देर हो गई
अभी मैं सोने जाता हूं

आप लोग भी सो जाओ
सुबह मिलते हैं

भाभी बोली माजी मैं आपकी दवाई ला कर देती हूं आप दवाई लेकर की सोना।

दोनो के जाने के बाद

मा बेटी से बोली बता बेटी कभी तुमने अपने ससुराल वालों के साथ इतने प्यार से समय बिताया है
और कभी तूने अपनी सास का ख्याल रखा है

तब बेटी की आंखों से आंसू आ जाते है
नहीं मां मे ही गलत थी

तब भाभी अपनी सास को दवाई देती है दवाई लेने के बाद शुभ रात्रि बोल कर सोने चली जाती है
तब मां बेटी आपस बातें करती हैं

मां बोली
देख बेटी अगर तुमको अपनी बात मनवानी है तो पहले की बात माननी पड़ेगी

बेटी बोली

सही कह रहे हो मां आप


मां बोलती है
अब तू ही बता मैं तेरी भाभी को किसी भी चीज के लिए कैसे मना कर सकती हूं जब वह मेरे और मेरे परिवार के लिए इतना कुछ करती है।

अब पता चला ना तेरे को तेरे मैं और तेरी भाभी में कितना अंतर है

बेटी अपनी मां के गले मिलते हुए बोली


मां आज आपने मेरी आंखें खोल दी अगर आप मेरा साथ दो मेरी जिंदगी कभी नहीं बदलती।


तब मा बोली
आज मुझसे इक वादा कर कभी भी अपने ससुराल की शिकायत अपने मायके लेकर नहीं आएगी।।।

बेटी बोलीमैं आपसे वादा करती हूं आज के बाद मैं अपने ससुराल की कोई भी शिकायत लेकर कहां नहीं आऊंगी।

और अपने ससुराल को ससुराल नहीं अपना परिवार मानुंगी।







इस कहानी से इतना ही कहना चाहता हूं दोस्तों की अपनी बेटी को कभी उसके ससुराल वालों के खिलाफ भड़काओ मत। ।

हो सके तो उसको प्यार से समझाओ जो उसकी जिंदगी के लिए जो अच्छे वही उसको बताओ।।।



वो कहते हैं ना कि एक मां चाहे तो अपने बेटी के ससुराल को स्वर्ग बना सकती है और चाहे तो नरक भी बना सकती है।।।

Tuesday, July 9, 2019

एक पिता कि सिख

दोस्तों आज एक ऐसी कहानी लेकर आया हूं जिसमें एक पिता अपने बच्ची को किस प्रकार सीख देता है और अपने बच्चे का मन में दूसरों को प्रति आदर भाव पैदा करता है ।।।

एक छोटे से कस्बे में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर रहते थे जिनकी एक लड़की थी,
जिसका नाम था अन्जली,

थोड़े ही दिनों बाद अन्जली का विवाह हुआ और वह अपने पति और सास ससुर के साथ अपने ससुराल में रहने लगी।

कुछ ही दिनों बाद अन्जली को आभास होने लगा कि उसकी सास के साथ बात नहीं बैठ रही है ।
सास पुराने ख़यालों की थी "हर बात में टोकना उसकी आदत थी"
और
बहू नए विचारों वाली "जिसको दूसरों की टोका टोकी बिल्कुल पसंद नहीं थी"
अन्जली और उसकी सास का आये दिन झगडा होने लगा।
दिन बीते, महीने बीते, साल भी बीत गया,
न तो सास टीका-टिप्पणी करना छोड़ती
और
न अन्जली जवाब देना।
हालात बद से बदतर होने लगे। 


अन्जली को अब अपनी सास से पूरी तरह नफरत हो चुकी थी.
अन्जली के लिए उस समय स्थिति और बुरी हो जाती जब उसे भारतीय परम्पराओं के अनुसार दूसरों के सामने अपनी सास को सम्मान देना पड़ता।
अब वह किसी भी तरह सास से छुटकारा पाने की सोचने लगी ।
एक दिन जब अन्जली का अपनी सास से झगडा हुआ और पति भी अपनी माँ का पक्ष लेने लगा तो वह नाराज़ होकर मायके चली आई।

अन्जली ने अपने पिता (जो आयुर्वेद के डॉक्टर थे) को रो-रो कर अपनी व्यथा पिता को सुनाई और
बोली –
“आप मुझे कोई जहरीली दवा दे दीजिये जो मैं जाकर उस बुढ़िया को पिला दूँ नहीं तो मैं अब ससुराल नहीं जाऊँगी…”
पिता ने शांत भाव से सारी बात सुनी और सारे मामले को समझते हुए अन्जली के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा –
“बेटी, अगर तुम अपनी सास को ज़हर खिला कर मार दोगी तो तुम्हें पुलिस पकड़ ले जाएगी और साथ ही मुझे भी क्योंकि वो ज़हर मैं तुम्हें दूंगा.
इसलिए ऐसा करना ठीक नहीं होगा.”
लेकिन अन्जली जिद पर अड़ गई – “आपको मुझे ज़हर देना ही होगा ….
अब मैं किसी भी कीमत पर उसका मुँह देखना नहीं चाहती !”
कुछ सोचकर पिता बोले – “ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी।
लेकिन मैं तुम्हें जेल जाते हुए भी नहीं देख सकता इसलिए जैसे मैं कहूँ वैसे तुम्हें करना होगा !
मंजूर हो तो बोलो ?”
अन्जली बोली - मंजूर है पर “क्या करना होगा ?”
पिता ने एक पुडिया में पाउडर बाँधकर अन्जली के हाथ में देते हुए कहा –
“तुम्हें इस पुडिया में जहर है  इसमे से सिर्फ एक चुटकी ज़हर रोज़ अपनी सास के भोजन में मिलाना है।
कम मात्रा होने से वह एकदम से नहीं मरेगी बल्कि धीरे-धीरे आंतरिक रूप से कमजोर होकर 5 से 6 महीनों में मर जाएगी.
लोग समझेंगे कि वह स्वाभाविक मौत से मर गई.”
पिता ने आगे कहा -“लेकिन तुम्हें बेहद सावधान रहना होगा ताकि तुम्हारे पति को बिलकुल भी शक न होने पाए वरना हम दोनों को जेल जाना पड़ेगा !
इसके लिए तुम आज के बाद अपनी सास से बिलकुल भी झगडा नहीं करोगी बल्कि उसकी सेवा करोगी।
यदि वह तुम पर कोई टीका टिप्पणी करती है तो तुम चुपचाप सुन लोगी, बिलकुल भी प्रत्युत्तर नहीं दोगी !
बोलो कर पाओगी ये सब ?”
अन्जली ने सोचा,
छ: महीनों की ही तो बात है, फिर तो छुटकारा मिल ही जाएगा.
उसने पिता की बात मान ली और ज़हर की पुडिया लेकर ससुराल चली आई.


ससुराल आते ही अगले ही दिन से अन्जली ने सास के भोजन में एक चुटकी ज़हर रोजाना मिलाना शुरू कर दिया।
साथ ही उसके प्रति अपना बर्ताव भी बदल लिया.
अब वह सास के किसी भी ताने का जवाब नहीं देती बल्कि क्रोध को पीकर मुस्कुराते हुए सुन लेती।
रोज़ उसके पैर दबाती और उसकी हर बात का ख़याल रखती।
सास से पूछ-पूछ कर उसकी पसंद का खाना बनाती, उसकी हर आज्ञा का पालन करती।
कुछ हफ्ते बीतते बीतते सास के स्वभाव में भी परिवर्तन आना शुरू हो गया.
बहू की ओर से अपने तानों का प्रत्युत्तर न पाकर उसके ताने अब कम हो चले थे बल्कि वह कभी कभी बहू की सेवा के बदले आशीष भी देने लगी थी।
धीरे-धीरे चार महीने बीत गए.
अन्जली नियमित रूप से सास को रोज़ एक चुटकी ज़हर देती आ रही थी।
किन्तु उस घर का माहौल अब एकदम से बदल चुका था।
सास बहू का झगडा पुरानी बात हो चुकी थी।
पहले जो सास अन्जली को गालियाँ देते नहीं थकती थी,
अब वही आस-पड़ोस वालों के आगे अन्जली की तारीफों के पुल बाँधने लगी थी।
बहू को साथ बिठाकर खाना खिलाती और सोने से पहले भी जब तक बहू से चार प्यार भरी बातें न कर ले, उसे नींद नही आती थी।
छठा महीना आते आते अन्जली को लगने लगा कि उसकी सास उसे बिलकुल अपनी बेटी की तरह मानने लगी हैं।
उसे भी अपनी सास में माँ की छवि नज़र आने लगी थी।
जब वह सोचती कि उसके दिए ज़हर से उसकी सास कुछ ही दिनों में मर जाएगी तो वह परेशान हो जाती थी।
झटपट एक दिन वह अपने पिता के घर दोबारा जा पहुंची और बोली – “पिताजी, मुझे उस ज़हर के असर को ख़त्म करने की दवा दीजिये क्योंकि अब मैं अपनी सास को मारना नहीं चाहती … !
वो बहुत अच्छी हैं और अब मैं उन्हें अपनी माँ की तरह चाहने लगी हूँ!”
पिता नाटक करते हुए आश्चर्यचकित होकर बोले – “ज़हर ? कैसा ज़हर ?
अन्जली बोली वही जो 5-6 महीने पहले मैं आपसे लेकर गई थी और अपनी सास को रोज एक चुटकी देती थी।।।
तो पिता बोले नहीं बेटी मैं उस जहर का असर खत्म करना नहीं चाहता हूं।।।
अंजली रोते हुए बोली नहीं पिताजी मेरे को मेरी गलती का एहसास हो गया मेरी सांस बहुत अच्छी है मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं आप मेरी सास को बचा लो।।।
तो पिता ठहाके मारकर हँस पड़े और बोले
मैंने तो तुम्हें को ज़हर के नाम पर हाजमे का चूर्ण दिया था … हा हा हा !!!”






इस पर अंजली रोते-रोते मुस्कुरा पड़ी और अपने पिता से लिपट कर बोली धन्यवाद पिताजी आपने अपने पिता होने का पूरा फर्ज अदा किया और अपनी बेटी को सही रास्ता दिखाया नहीं तो मैं अपनी मां जैसी सास को देती।।
तो सज्जनों आप भी अपने बच्चियों को सही रास्ता दिखाएं 

आपकी लड़की चाहे तो अपने ससुराल को स्वर्ग बना सकती है
और चाहे तो नर्क भी।।

"बेटी को सही रास्ता दिखाये,
माँ बाप का पूर्ण फर्ज अदा करे"

Saturday, June 29, 2019

माता पिता

1)
ए मेरे दोस्त ऐसे ही नहीं

तेरे चेहरे परयह रवानी आई है,

इसके लिए तेरे मां-बाप ने

अपनी जवानी गवाई है ।

2)
ए मेरे दोस्तो किसी भी भगवान को मनाओ या रखो व्रत बिना लिए आहार,

जिस दिन भुखे सोए मां-बाप तुम्हारे सारे जतन हो जाएंगे सब बेकार।।।

3)
दुनिया का सबसे सुंदर गीत मां की लोरी होगी,

मा बाप के बिना दुनिया की हर चीज कोरी होगी।।।

4)
जीवन में मां-बाप तेरे रोने पर केवल तभी हंसते जब तेरी उम्र नही होती बचपन मे,

बाकी तो कभी नही हंसगे तेरे रोने पर चाहे तेरी उमर हो पचपन मे।

5)
मां बाप अपनी जिंदगी में दिल दुखा कर तभी रोते हैं,

जब या तो बेटी अपना घर छोड़े

या फिर बेटा अपने मां-बाप से मुंह मोड़े।।।


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Friday, June 28, 2019

माँ

1)
जब हम बोलना नहीं जानते थे,

तो हमारे बोले बिना माँ हमारी बातों को समझ जाती थी,

और आज हम हर बात पर कहते है

छोडो भी माँ आप नहीं समझोगी !!

2)
मुझे कोई और जन्नत का पता नहीं,

क्यूंकि हम माँ के कदमो को ही जन्नत कहते है !!

3)
उस घर के किसी काम में कभी बरकत नहीं होती,

जिस घर में माँ बाप की इज्जत नहीं होती !!

4)

पता नहीं कैसे पत्थर की

मूर्ति के लिए जगह बना लेते है,

घर में वो लोग जिनके घर

माता पिता के लिए स्थान नहीं होता !!

5)
माँ की आँखों की नमी,

अपने दामन में सोख लेना,

माँ के एक कतरा आंसू में,

दरिया का वजूद होता है !!


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