काश
इन्सान भी नोटो की तरह होते ,
रोशनी की तरफ़ के देख लेते
असली है या नक़ली !!
हे मेरे भोले इंसान,
क्यों भागता है अंधा होकर
पीछे इस धन के,,
कुछ भी नहीं ले जा पाएगा तू
बाद में तेरे लिए निधन के..