नहीं होते हैं अच्छे लोग,
क्योंकि फूलों पर
इत्र नहीं लगाया जाता।
उनकी खुशबू
खुद-ब-खुद हवाओं में घुल जाती है,
बिना शोर किए
अपनी मौजूदगी दर्ज करा जाती है।
जो सच्चे होते हैं,
उन्हें चमकने के लिए
किसी बाहरी रोशनी की ज़रूरत नहीं होती,
वे तो अंधेरों में भी
रास्ता दिखा देते हैं।
असल खूबसूरती
दिखावे से नहीं,
किरदार से पहचानी जाती है।
और अच्छे लोग…
बस मिलते हैं,
और दिल में उतर जाते हैं।