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Monday, January 19, 2026

रात • सन्नाटा • अंदर का सच

रात के सन्नाटे में वही
सच सबसे तेज चिल्लाता है,

जिसको मन तो जानता है
पर शब्द नहीं जानते हैं,,


दिनभर की भीड़ में जो दबा रहता है,
वही खामोशी में सवाल बनकर उभरता है।

कभी-कभी जवाब बाहर नहीं,
बस भीतर स्वीकार होने का इंतज़ार करते हैं,,



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