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Monday, February 13, 2023

घर की याद

वही आंगन, वही खिड़की, 
वही दर याद आता है, 

अकेला जब भी होता हूं 
मुझे घर याद आता है,,

Tuesday, January 5, 2021

राहत इंदौरी

उसकी कत्थई आँखों मे हैं, जंतर वंतर सब 
चाकू वाकू,  छुरियां वुरियां, खंज़र वंजर सब

जिस दिन से तुम रुठीं,  मुझ से, रूठे रूठे हैं 
चादर वदार,  तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब

मुझसे बिछड़ कर,  वह भी कहाँ अब पहले जैसी है
फीके पड़ गए,  कपडे वपड़े, ज़ेवर वेवर सब

जाने मै किस दिन डूबूँगा, फिक्रें करते हैं
दरिया वरिया,  कश्ती वस्ती, लंगर वंगर सब

इश्क़ विश्क के सारे नुस्खे, मुझसे सीखते हैं
सागर वागर, मंजर वंजर, जौहर वोहर सब

तुलसी ने जो लिखा अब कुछ बदला बदला है 
रावण वावन,  लंका वंका, बन्दर वंदर सब.. 

---------  राहत इंदौरी

Saturday, September 26, 2020

बेटियाँ कवियो के बोल

हे बेटी, 

निर्बल नहीं तुम निराली हो, 
हर घर की तुम दिवाली हो! 

दिल झूम उठता है तुझे देखकर, 
तुम बसंती हवा मतवाली हो!! 


तुम आन बान की निशानी हो, 
एक अनसुलझी सी कहानी हो! 

तंज ताने सहज सुन लेती हो, 
तुम इस रण में झांसी की रानी हो!! 

✍️ ✍️ ✍️ ✍️ 
कवियो के बोल


Saturday, January 25, 2020

कवियो के बोल

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई

पाँव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई

पात-पात झर गए कि शाख़-शाख़ जल गई

चाह तो निकल सकी न पर उमर निकल गई


~ गोपालदास जी "नीरज"

Tuesday, December 24, 2019

कवियों के बोल

"दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है 
केवल उतना ही याद रखती है, 

जितने से उसका स्वार्थ सधता है।"

~आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी


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ये धरती ये जीवन-सागर ये संसार हमारा है 
अमृत बादल बन के उठे हैं पर्बत से टकराएँगे 

खेतों की हरियाली बन कर छब अपनी दिखलाएँगे 
दुनिया का दुख-सुख अपना कर दुनिया पर छा जाएँगे 

~मसूद अख़्तर जमाल

Tuesday, November 12, 2019

कवियों के बोल

एक नए साँचे में ढल जाता हूँ मैं 
क़तरा क़तरा रोज़ पिघल जाता हूँ मैं 

जब से वो इक सूरज मुझ में डूबा है 
ख़ुद को भी छू लूँ तो जल जाता हूँ मैं 

~भारत भूषण पन्त

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ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, 
और क्या जुर्म है पता ही नहीं।
 
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं, 
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं| 

धन के हाथों बिके हैं सब क़ानून 
अब किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं।

~कृष्ण बिहारी 'नूर'

Sunday, August 25, 2019

कवियों के बोल

मत डर जो अंधेरी रात है
होने वाली अब प्रभात है
ये अंत नहीं है जीवन का
हर सुबह नयी शुरूआत है ।

है अंधकार अब लुप्त हुआ
हर ओर प्रकाश अब होना है
उठ कर बढ़ना है आगे हमें
देर तलक ना सोना है ।।

तेज चमकना है हमको
नयी सुबह है नया है मौका
आगे बढ़ने के अब जज्बात है ।।

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Thursday, July 18, 2019

कवियों के बोल

हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|

न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो|

~ डॉ.राहत इन्दौरी साहब

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जब जब लगा हमें कि खुशी अब सँवर गयी,
हमसे  छुड़ा  के  हाथ  न  जाने  किधर गयी।

तुम  मिल  गए  हो  तब  से हमें लग रहा है यूँ,
बिखरी थी जितनी ज़िन्दगी उतनी निखर गयी।

~ डॉ विष्णु सक्सेना साहब

Wednesday, July 17, 2019

एक पिता


फिर पुराने नीम के नीचे खडा हूँ
फिर पिता की याद आई है मुझे

नीम सी यादें ह्रदय में चुप समेटे
चारपाई डाल आँगन बीच लेटे

सोचते हैं हित सदा उनके घरों का
दूर है जो एक बेटी चार बेटे

फिर कोई हाथ रख कांधे पर

कहीं यह पूछता है-

"क्यों अकेला हूं भरी इस भीड़ में"

मैं रो पड़ा हूं,

फिर पिता की याद आई है मुझे
फिर पुराने नीम के नीचे खडा हूँ

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तारीख दर तारीख वो खर्च होता रहा।
इंच दर इंच वो घर को संजोता रहा।।

गवांकर अपने जीने का हर मकसद।
हर पल वो हम में भविष्य बोता रहा।।

मैं देख रहा हुं पिता को बूढ़ा होते हुए।
सिफर ताऊम्र खुद में उन्हें ढ़ोता रहा।।