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Monday, February 13, 2023
Tuesday, January 5, 2021
राहत इंदौरी
Saturday, September 26, 2020
बेटियाँ कवियो के बोल
Saturday, January 25, 2020
कवियो के बोल
Tuesday, December 24, 2019
कवियों के बोल
Tuesday, November 12, 2019
कवियों के बोल
Sunday, August 25, 2019
कवियों के बोल
मत डर जो अंधेरी रात है
होने वाली अब प्रभात है
ये अंत नहीं है जीवन का
हर सुबह नयी शुरूआत है ।
है अंधकार अब लुप्त हुआ
हर ओर प्रकाश अब होना है
उठ कर बढ़ना है आगे हमें
देर तलक ना सोना है ।।
तेज चमकना है हमको
नयी सुबह है नया है मौका
आगे बढ़ने के अब जज्बात है ।।
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Thursday, July 18, 2019
कवियों के बोल
हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|
न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो|
~ डॉ.राहत इन्दौरी साहब
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जब जब लगा हमें कि खुशी अब सँवर गयी,
हमसे छुड़ा के हाथ न जाने किधर गयी।
तुम मिल गए हो तब से हमें लग रहा है यूँ,
बिखरी थी जितनी ज़िन्दगी उतनी निखर गयी।
~ डॉ विष्णु सक्सेना साहब
Wednesday, July 17, 2019
एक पिता
फिर पुराने नीम के नीचे खडा हूँ
फिर पिता की याद आई है मुझे
नीम सी यादें ह्रदय में चुप समेटे
चारपाई डाल आँगन बीच लेटे
सोचते हैं हित सदा उनके घरों का
दूर है जो एक बेटी चार बेटे
फिर कोई हाथ रख कांधे पर
कहीं यह पूछता है-
"क्यों अकेला हूं भरी इस भीड़ में"
मैं रो पड़ा हूं,
फिर पिता की याद आई है मुझे
फिर पुराने नीम के नीचे खडा हूँ
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तारीख दर तारीख वो खर्च होता रहा।
इंच दर इंच वो घर को संजोता रहा।।
गवांकर अपने जीने का हर मकसद।
हर पल वो हम में भविष्य बोता रहा।।
मैं देख रहा हुं पिता को बूढ़ा होते हुए।
सिफर ताऊम्र खुद में उन्हें ढ़ोता रहा।।