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Thursday, July 18, 2019

कवियों के बोल

हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|

न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो|

~ डॉ.राहत इन्दौरी साहब

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जब जब लगा हमें कि खुशी अब सँवर गयी,
हमसे  छुड़ा  के  हाथ  न  जाने  किधर गयी।

तुम  मिल  गए  हो  तब  से हमें लग रहा है यूँ,
बिखरी थी जितनी ज़िन्दगी उतनी निखर गयी।

~ डॉ विष्णु सक्सेना साहब

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