हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|
न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो|
~ डॉ.राहत इन्दौरी साहब
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जब जब लगा हमें कि खुशी अब सँवर गयी,
हमसे छुड़ा के हाथ न जाने किधर गयी।
तुम मिल गए हो तब से हमें लग रहा है यूँ,
बिखरी थी जितनी ज़िन्दगी उतनी निखर गयी।
~ डॉ विष्णु सक्सेना साहब
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