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Tuesday, July 9, 2019

एक पिता कि सिख

दोस्तों आज एक ऐसी कहानी लेकर आया हूं जिसमें एक पिता अपने बच्ची को किस प्रकार सीख देता है और अपने बच्चे का मन में दूसरों को प्रति आदर भाव पैदा करता है ।।।

एक छोटे से कस्बे में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर रहते थे जिनकी एक लड़की थी,
जिसका नाम था अन्जली,

थोड़े ही दिनों बाद अन्जली का विवाह हुआ और वह अपने पति और सास ससुर के साथ अपने ससुराल में रहने लगी।

कुछ ही दिनों बाद अन्जली को आभास होने लगा कि उसकी सास के साथ बात नहीं बैठ रही है ।
सास पुराने ख़यालों की थी "हर बात में टोकना उसकी आदत थी"
और
बहू नए विचारों वाली "जिसको दूसरों की टोका टोकी बिल्कुल पसंद नहीं थी"
अन्जली और उसकी सास का आये दिन झगडा होने लगा।
दिन बीते, महीने बीते, साल भी बीत गया,
न तो सास टीका-टिप्पणी करना छोड़ती
और
न अन्जली जवाब देना।
हालात बद से बदतर होने लगे। 


अन्जली को अब अपनी सास से पूरी तरह नफरत हो चुकी थी.
अन्जली के लिए उस समय स्थिति और बुरी हो जाती जब उसे भारतीय परम्पराओं के अनुसार दूसरों के सामने अपनी सास को सम्मान देना पड़ता।
अब वह किसी भी तरह सास से छुटकारा पाने की सोचने लगी ।
एक दिन जब अन्जली का अपनी सास से झगडा हुआ और पति भी अपनी माँ का पक्ष लेने लगा तो वह नाराज़ होकर मायके चली आई।

अन्जली ने अपने पिता (जो आयुर्वेद के डॉक्टर थे) को रो-रो कर अपनी व्यथा पिता को सुनाई और
बोली –
“आप मुझे कोई जहरीली दवा दे दीजिये जो मैं जाकर उस बुढ़िया को पिला दूँ नहीं तो मैं अब ससुराल नहीं जाऊँगी…”
पिता ने शांत भाव से सारी बात सुनी और सारे मामले को समझते हुए अन्जली के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा –
“बेटी, अगर तुम अपनी सास को ज़हर खिला कर मार दोगी तो तुम्हें पुलिस पकड़ ले जाएगी और साथ ही मुझे भी क्योंकि वो ज़हर मैं तुम्हें दूंगा.
इसलिए ऐसा करना ठीक नहीं होगा.”
लेकिन अन्जली जिद पर अड़ गई – “आपको मुझे ज़हर देना ही होगा ….
अब मैं किसी भी कीमत पर उसका मुँह देखना नहीं चाहती !”
कुछ सोचकर पिता बोले – “ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी।
लेकिन मैं तुम्हें जेल जाते हुए भी नहीं देख सकता इसलिए जैसे मैं कहूँ वैसे तुम्हें करना होगा !
मंजूर हो तो बोलो ?”
अन्जली बोली - मंजूर है पर “क्या करना होगा ?”
पिता ने एक पुडिया में पाउडर बाँधकर अन्जली के हाथ में देते हुए कहा –
“तुम्हें इस पुडिया में जहर है  इसमे से सिर्फ एक चुटकी ज़हर रोज़ अपनी सास के भोजन में मिलाना है।
कम मात्रा होने से वह एकदम से नहीं मरेगी बल्कि धीरे-धीरे आंतरिक रूप से कमजोर होकर 5 से 6 महीनों में मर जाएगी.
लोग समझेंगे कि वह स्वाभाविक मौत से मर गई.”
पिता ने आगे कहा -“लेकिन तुम्हें बेहद सावधान रहना होगा ताकि तुम्हारे पति को बिलकुल भी शक न होने पाए वरना हम दोनों को जेल जाना पड़ेगा !
इसके लिए तुम आज के बाद अपनी सास से बिलकुल भी झगडा नहीं करोगी बल्कि उसकी सेवा करोगी।
यदि वह तुम पर कोई टीका टिप्पणी करती है तो तुम चुपचाप सुन लोगी, बिलकुल भी प्रत्युत्तर नहीं दोगी !
बोलो कर पाओगी ये सब ?”
अन्जली ने सोचा,
छ: महीनों की ही तो बात है, फिर तो छुटकारा मिल ही जाएगा.
उसने पिता की बात मान ली और ज़हर की पुडिया लेकर ससुराल चली आई.


ससुराल आते ही अगले ही दिन से अन्जली ने सास के भोजन में एक चुटकी ज़हर रोजाना मिलाना शुरू कर दिया।
साथ ही उसके प्रति अपना बर्ताव भी बदल लिया.
अब वह सास के किसी भी ताने का जवाब नहीं देती बल्कि क्रोध को पीकर मुस्कुराते हुए सुन लेती।
रोज़ उसके पैर दबाती और उसकी हर बात का ख़याल रखती।
सास से पूछ-पूछ कर उसकी पसंद का खाना बनाती, उसकी हर आज्ञा का पालन करती।
कुछ हफ्ते बीतते बीतते सास के स्वभाव में भी परिवर्तन आना शुरू हो गया.
बहू की ओर से अपने तानों का प्रत्युत्तर न पाकर उसके ताने अब कम हो चले थे बल्कि वह कभी कभी बहू की सेवा के बदले आशीष भी देने लगी थी।
धीरे-धीरे चार महीने बीत गए.
अन्जली नियमित रूप से सास को रोज़ एक चुटकी ज़हर देती आ रही थी।
किन्तु उस घर का माहौल अब एकदम से बदल चुका था।
सास बहू का झगडा पुरानी बात हो चुकी थी।
पहले जो सास अन्जली को गालियाँ देते नहीं थकती थी,
अब वही आस-पड़ोस वालों के आगे अन्जली की तारीफों के पुल बाँधने लगी थी।
बहू को साथ बिठाकर खाना खिलाती और सोने से पहले भी जब तक बहू से चार प्यार भरी बातें न कर ले, उसे नींद नही आती थी।
छठा महीना आते आते अन्जली को लगने लगा कि उसकी सास उसे बिलकुल अपनी बेटी की तरह मानने लगी हैं।
उसे भी अपनी सास में माँ की छवि नज़र आने लगी थी।
जब वह सोचती कि उसके दिए ज़हर से उसकी सास कुछ ही दिनों में मर जाएगी तो वह परेशान हो जाती थी।
झटपट एक दिन वह अपने पिता के घर दोबारा जा पहुंची और बोली – “पिताजी, मुझे उस ज़हर के असर को ख़त्म करने की दवा दीजिये क्योंकि अब मैं अपनी सास को मारना नहीं चाहती … !
वो बहुत अच्छी हैं और अब मैं उन्हें अपनी माँ की तरह चाहने लगी हूँ!”
पिता नाटक करते हुए आश्चर्यचकित होकर बोले – “ज़हर ? कैसा ज़हर ?
अन्जली बोली वही जो 5-6 महीने पहले मैं आपसे लेकर गई थी और अपनी सास को रोज एक चुटकी देती थी।।।
तो पिता बोले नहीं बेटी मैं उस जहर का असर खत्म करना नहीं चाहता हूं।।।
अंजली रोते हुए बोली नहीं पिताजी मेरे को मेरी गलती का एहसास हो गया मेरी सांस बहुत अच्छी है मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं आप मेरी सास को बचा लो।।।
तो पिता ठहाके मारकर हँस पड़े और बोले
मैंने तो तुम्हें को ज़हर के नाम पर हाजमे का चूर्ण दिया था … हा हा हा !!!”






इस पर अंजली रोते-रोते मुस्कुरा पड़ी और अपने पिता से लिपट कर बोली धन्यवाद पिताजी आपने अपने पिता होने का पूरा फर्ज अदा किया और अपनी बेटी को सही रास्ता दिखाया नहीं तो मैं अपनी मां जैसी सास को देती।।
तो सज्जनों आप भी अपने बच्चियों को सही रास्ता दिखाएं 

आपकी लड़की चाहे तो अपने ससुराल को स्वर्ग बना सकती है
और चाहे तो नर्क भी।।

"बेटी को सही रास्ता दिखाये,
माँ बाप का पूर्ण फर्ज अदा करे"

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