अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी तो शाम होने दो,
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो,,
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना,
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।
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उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो,,
इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है,
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो,,
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ज़िंदगी में जो हम चाहते हैं
वो आसानी से नहीं मिलता,
लेकिन ज़िंदगी का एक सच यह भी है
कि जो हम चाहते वो आसान नहीं होता।
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ख़बर नहीं थी किसी को कहाँ कहाँ कोई है,
हर इक तरफ़ से सदा आ रही थी याँ कोई है,,
यहीं कहीं पे कोई शहर बस रहा था अभी,
तलाश कीजिये उसका अगर निशाँ कोई है,,
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