एक टीचर अपने स्टूडेंट को मुर्गा बनने की सजा दी,
तब उस टीचर और बच्चे के बीच जो वार्तालाप वह पढें और स्कूल के याद करें,,,,
टीचर बोला,
बनजा वहां मुर्गा तेरी गलती की सजा तो यही पाएगा,
तुझको जो बक्स दिया तो कोई होमवर्क करके नहीं लाएगा।
तुझको जो बक्स दिया तो कोई होमवर्क करके नहीं लाएगा।
बच्चा मासूमियत से बोला,
बन तो जाऊंगा मुर्गा मैं गुरुदेव पर इस से आप कुछ ना पाओगे,
ना तो मैं अंडा दे पाऊंगा ना आप मुझको खा पाओगे।
तब टीचर बोला
रे नादान,
इस सजा से तेरी स्कूल के बच्चे यही सीख पायेंगे,
जो भी गलती करेंगे वो मुर्गा रूपी दंड पाएंगे।
इस सजा से तेरी स्कूल के बच्चे यही सीख पायेंगे,
जो भी गलती करेंगे वो मुर्गा रूपी दंड पाएंगे।
बच्चा बोला,
इस बार गलती माफ करो गुरुदेव स्कूल में इज्जत नहीं बचा पाऊंगा,
वादा करता हूं गुरुदेव कल पक्का होमवर्क करके आऊंगा।
वादा करता हूं गुरुदेव कल पक्का होमवर्क करके आऊंगा।
तब टीचर सीरियस होकर बोला,
इस इज्जत से क्या करेगा रे नादान प्यारे इन्हीं बातों के लिए एक दिन तू तरसेगा,
वादा है मेरा जब तू बड़ा हो जाएगा तो इन्हीं बातों को याद करके तेरी आंखों से नीर बरसेगा।
वादा है मेरा जब तू बड़ा हो जाएगा तो इन्हीं बातों को याद करके तेरी आंखों से नीर बरसेगा।
तब बच्चा अपनी सजा डालने के लिए टीचर की गंभीरता को देखते हुए बोला
मैं नादान परिंदा समझ नहीं पाया,
गुरुदेव जरा विस्तार से बताओ ना।
गुरुदेव जरा विस्तार से बताओ ना।
तब टीचर बोला
अभी तक तुम इतना होशियार नहीं बन पाया, नादान परिंदे मेरे जरा मुर्गा बन के तो दिखाओ ना।।।







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