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Monday, November 22, 2021

सुख दुख की बातें

एक दिन अचानक एक मोड पर सुख और दुख की मुलाकात हो गई 

😣 दुख ने सुख से कहा,
तुम बहुत भाग्यशाली हो, 
जो लोग तुम्हें पाने की कोशिश में लगे रहते हैं...

😇 सुख ने मुस्कुराते हुए कहा 
भाग्यवान मैं नहीं, तुम हो...!

😣 दुख ने हैरानी से पूछा
वो कैसे? 

😇 सुख ने बडी ईमानदारी से जवाब दिया 
वो ऐसे कि तुम्हे पाकर लोग - अपनों को याद करते हैं, 
लेकिन मुझे पाकर सब अपनो को भूल जाते हैं...!!

Monday, June 15, 2020

मै एक फोजी हूँ,,,,

मै एक फोजी हूँ,,,,


वर्दी लगाकर मैं एक फौजी बना हूं, 
अलग अंदाज का मन मौजी बना हूं।

हिफाजत करता हूं वतन की सरहद पर, 
छोड़ आया हूं नन्ही सी कली को घर पर। 

जननी से ज्यादा प्यार माँ भारती से करता हूं, 
रक्षा मेरा धर्म हैं मैं मरने से नहीं डरता हूं। 

तेरी मांग में सिंदूर भर, मैं तुझे छोड़ आया हूं, 
हर पल साथ रहने का वो वादा तोड़ आया हूं। 

खुशी से मनाते दिवाली पर इस बार खामोशी है, 
दिवाली पर दीप जला रहे भाई की आँखे नमोशी है। 

बहिन, रक्षाबंधन पर कलाई मेरी सुनी होगी, 
तूने इस बार मेरे लिए मोतियों से राखी बुनी होगी। 

मेरी नन्ही दहलीज पर पापा का इन्तजार करती होगी, 
मेरे बिन निवाला नहीं लेती वो भर पेट कैसे सोती होगी। 

मेहनत करते पापा ने सहारे की आश लगाई थी, 
माफ करना पापा, मैंने मातृरक्षा की सौगंध खाई थी। 

कितनी मस्ती होती थी मेरी यारों संग ढाणी में, 
भूल गया वो कागज की किश्ती चलाना पानी में। 

मैं हिफाजत करने खड़ा हूं सरहद पर वतन की, 
वतन के लिए दबा रहा हूँ हर ख्वाहिश मन की।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳❤️❤️💛💛🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
जय हिंद


Saturday, April 11, 2020

हिन्दुस्तान और कोराना

क्या सोचा था तूने कि भूख से मर जायेगा हिन्दुस्तान, 
जरा नजर उठाकर देख 
सेना ताने खड़ा है खेत मे हल लिए किसान।

क्या सोचा था तूने कि चौराहे पर आयेंगे तो लपक लेगा,
वहां भी खङा मिलेगा तुझको वर्दी पहन एक जवान।
माना ए कोराना कुछ नादानो कि वजह तुने हमको कर भी दिया बीमार,
नजर निचे रख के देख अस्पताल मे खङे मिलेंगे तुझको साक्षात भगवान।
जहां टेक दिए थे घुटने सिकन्दर ने भी 
यूँ ही नहीं कहलाता है मेरा भारत महान।। 

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Thursday, March 5, 2020

"करोना" प्रकृति की शक्ति का अंश मात्र

एक करोना वायरस के आगे 150 करोड़ की आबादी वाला चीन अपने ही घर में बंदी बन गया है,

सारे रास्ते वीरान हो गए हैं,चीन के राष्ट्रपति तक भूमिगत हो गए हैं।

एक सूक्ष्म सा जंतु और दुनियाँ को आँखे दिखाने वाला चीन एकदम शांत,भयभीत।

केवल चीन ही क्यों?

सारे विश्व को एक पल में शांत करने की ताकत प्रकृति में है!

हम जातपात,धर्म भेद,वर्ण भेद,प्रांत वाद के अहंकार से भरे हुए हैं।

यह गर्व 
यह घमंड 
करोना ने मात्र एक झटके में उतार दिया,
बिना किसी भी प्रकार का भेद रखे सारे चीन को बंदिस्त करके रख दिया है,

नौबत यहां तक आ गई है कि
चीन का राष्ट्रपति भूमिगत रहते हुए ही अपने ही बीस हजार लोगों को मौत के घाट उतार देने की भाषा बोलने लगा।

इस संसार का कोई भी जीव इस प्रकृति के आगे बेबस है,
लाचार है

प्रकृति ने शायद
यही संदेश दिया है;
प्यार से रहो,जियो और जीने दो!

अन्यथा सुनामी है,
करोना है,
रीना है,
टीना है;

लेकिन इसके बावजूद अगर,
जीना है तो प्यार से

इंसान को कभी भी अपने वक़्त पर घमंड नहीं करना चाहिए,

क्योंकि वक़्त तो उन नोटों का भी नहीं हुआ,
जो कभी पूरा बाजार खरीदने की ताकत रखते थे!
   

ज़िन्दगी है साहब,
छोड़कर चली जाएगी;
मेज़ पर होगी तस्वीर,
कुर्सी खाली रह जाएगी।


फिर भी यह एक कङवा सच है कि 

कोरोना के 29 मरीज 
और 
पूरा भारत मास्क लगा के घूमेगा , 

प्रतिदिन 13 हजार मरते हैं 

सडक हादसे मे लेकिन हेल्मेट 
कोई नही लगायेगा

फैशन की बात है....


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Thursday, February 6, 2020

मै एक फोजी हूँ,,,,

मै एक फोजी हूँ,,,,


वर्दी लगाकर मैं एक फौजी बना हूं, 
अलग अंदाज का मन मौजी बना हूं।

हिफाजत करता हूं वतन की सरहद पर, 
छोड़ आया हूं नन्ही सी कली को घर पर। 

जननी से ज्यादा प्यार माँ भारती से करता हूं, 
रक्षा मेरा धर्म हैं मैं मरने से नहीं डरता हूं। 

तेरी मांग में सिंदूर भर, मैं तुझे छोड़ आया हूं, 
हर पल साथ रहने का वो वादा तोड़ आया हूं। 

खुशी से मनाते दिवाली पर इस बार खामोशी है, 
दिवाली पर दीप जला रहे भाई की आँखे नमोशी है। 

बहिन, रक्षाबंधन पर कलाई मेरी सुनी होगी, 
तूने इस बार मेरे लिए मोतियों से राखी बुनी होगी। 

मेरी नन्ही दहलीज पर पापा का इन्तजार करती होगी, 
मेरे बिन निवाला नहीं लेती वो भर पेट कैसे सोती होगी। 

मेहनत करते पापा ने सहारे की आश लगाई थी, 
माफ करना पापा, मैंने मातृरक्षा की सौगंध खाई थी। 

कितनी मस्ती होती थी मेरी यारों संग ढाणी में, 
भूल गया वो कागज की किश्ती चलाना पानी में। 

मैं हिफाजत करने खड़ा हूं सरहद पर वतन की, 
वतन के लिए दबा रहा हूँ हर ख्वाहिश मन की।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳❤️❤️💛💛🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
जय हिंद

💐🙏 राम राम सा गाँव वालौ नै  🙏💐

वर्दी लगाकर मैं एक फौजी बना हूं, 
अलग अंदाज का मन मौजी बना हूं।

हिफाजत करता हूं वतन की सरहद पर, 
छोड़ आया हूं नन्ही सी कली को घर पर। 

जननी से ज्यादा प्यार माँ भारती से करता हूं, 
रक्षा मेरा धर्म हैं मैं मरने से नहीं डरता हूं। 

तेरी मांग में सिंदूर भर, मैं तुझे छोड़ आया हूं, 
हर पल साथ रहने का वो वादा तोड़ आया हूं। 

खुशी से मनाते दिवाली पर इस बार खामोशी है, 
दिवाली पर दीप जला रहे भाई की आँखे नमोशी है। 

बहिन, रक्षाबंधन पर कलाई मेरी सुनी होगी, 
तूने इस बार मेरे लिए मोतियों से राखी बुनी होगी। 

मेरी नन्ही दहलीज पर पापा का इन्तजार करती होगी, 
मेरे बिन निवाला नहीं लेती वो भर पेट कैसे सोती होगी। 

मेहनत करते पापा ने सहारे की आश लगाई थी, 
माफ करना पापा, मैंने मातृरक्षा की सौगंध खाई थी। 

कितनी मस्ती होती थी मेरी यारों संग ढाणी में, 
भूल गया वो कागज की किश्ती चलाना पानी में। 

मैं हिफाजत करने खड़ा हूं सरहद पर वतन की, 
वतन के लिए दबा रहा हूँ हर ख्वाहिश मन की।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳❤️❤️💛💛🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
जय हिंद

Tuesday, July 2, 2019

गरीब के बच्चे का इलाज

एक शहर में एक बहुत ही गरीब परिवार रहता था,
उस परिवार में एक अधेङ आदमी, उसकी पत्नी और उसका एक लड़का था..।
गरीबी इस हद तक थी 
 
कि सुबह का खाना मिलता तो शाम को भूखा सोना पड़ता था
और
कभी शाम को मिलता तो सुबह भूखा रहना पड़ता था।।।

बारिश का मौसम था बारिश बहुत तेज हो रही थी
जो घर की छत से टपक रही पानी की बूंदों से पता चल रहा था
क्योंकि घर की छत जगह जगह से टूटी हुई थी और टिन और चदर से बनी हुई थी।।


घर में भीगने के लिए इतना कुछ तो था नहीं पर वह तीनों तो जरूर थोड़े-थोड़े भिग रहे थे।।।
बारिश में भीगने की वजह से उसके लड़के की तबीयत बिगड़ने लगी थी।।

पिता बोला कि मैं कुछ खाने के लिए लेकर आता हूँ शायद भूख से ज्यादा कमजोर हो गया है
इतना कहकर पिता बाहर निकला और पास ही की एक किराना की दुकान पर पहुंचा
वहां से उसने दो बिस्किट के पैकेट लिये और वहीं डस्टबिन में पड़ा एक बिस्किट का खाली पैकेट भी हाथ में में उठा लिया।।।

वापस घर पहुंचकर पत्नी से बोला यह लोग एक-एक तुम भी खा लो मैंने तो रास्ते में आते-आते खा लिया था वो भूख ज्यादा लगी और अपना मुंह ऐसे ही हिलाने लगा जैसे कुछ खा रहा हो और वह खाली बिस्किट का पैकेट कोने में फेंक दिया ।।।

मां ने एक बिस्किट का पैकेट खोला और पानी में भिगो भिगो कर अपने बच्चे को खिलाया।।।
और थोड़ा सा बिस्किट अपने होठों पर रख लिया जिससे लगे कि इसने भी खा लिया हो 

इलाज के लिए इतने पैसै तो थे नहीं
इसलिए घरेलू उपचार करने लगे 
 
लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ और
तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी थी 

तो दोनों पति पत्नी एक दूसरे की आंखों में बिना कुछ बोले देख रहे थे और अपने आप को कोस रहे थे
तो मां से रहा नहीं गया और अपने पति से बोली कि सुनिए ना बच्चे की तबीयत बहुत बिगड़ गई है किसी डॉक्टर को दिखाने क्यों नहीं लेकर जाते।

इतना सुनते ही उसका पति मायूस होकर बोला अरे पगली मैं भी बहुत चाहता हूं कि बच्चे को डॉक्टर को दिखाओ लेकिन इतने पैसे कहां हैं अपने पास।।।

तो पत्नी अपने पति से बोली कि सुना है सरकारी अस्पतालों में इलाज बिना पैसे की भी किया जाता है तो क्यों ना हम अपने बच्चे को किसी सरकारी अस्पताल में यह लेकर चले।
अस्पताल थोड़ा दूर था 
 
और रिक्शा या गाड़ी करने के पैसे थे नहीं इसलिए उस पिता ने अपने बेटे का भार अपने कंधों पर लिया और और लड़के की मां ने एक पुराना फटा थेला लिया जिसमें एक पानी की बोतल और एक फटी पुरानी चादर के अलावा और कुछ नहीं था।।।

वह दोनो अस्पताल की ओर चल पड़े







उन कमजोर कंधों में इतनी शक्ति कहां थी कि कि बिना रुके अस्पताल पहुंचे इसके लिए कभी पिता के कंधों पर कभी मां के कंधों पर बच्चे का भार ढोते हुए और यह सोचते हुए अस्पताल पहुंचे कि डॉक्टर कोई एक दो दवाई या फिर इंजेक्शन लगा कर ठीक कर देंगे।

वहां जाकर पता चला कि दिखाने से पहले ₹5 की रसीद कटवानी पड़ती है उसके बाद ही दिखा सकते हैं
तो उन्होंने जैसे-तैसे करके ₹5 में रसीद कटवाई और डॉक्टर का इंतजार करने लगे!!!

थोड़ी देर बाद में डॉक्टर आए और
उसके कुछ ही समय बाद उनका भी नंबर आया

डॉक्टर ने पूछा कि क्या हुआ बाहर का कुछ खाया क्या,
या कहीं बाहर बारिश में भीग गया ???


तो वह बूढ़े पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े और बोला डॉक्टर साहब बाहर कहीं नहीं भीगा साहब यह तो बस घर के अंदर ही भिगा था,
और इसने बाहर तो क्या अंदर भी एक-दो दिन से ज्यादा कुछ नहीं खाया ।।।
इतना कहते कहते हो बाप आंखों से आंसू छलक पड़े इसके साथ ही पास ही में खड़ी वह मां भी सिसकियां भरने लगी
डॉक्टर ने जांच करके बोला कि इसकी तकलीफ थोड़ी ज्यादा है इसके लिए आपको दो-तीन दिन यहीं पर भर्ती होना पड़ेगा
यह सब बातें उनके पास खड़ा।।


( यह सब बातें उनके पास खङा सज्जन पुरुष शांति से सुन रहा था और अपने आप को चिंतित महसूस कर रहा था)


डॉक्टर ने सांत्वना देते हुए बोला कि आप चिंता ना करें यहां पर आपके बच्चे का इलाज मुफ्त में किया जाएगा पर आपको इसकी खाने-पीने का इंतजाम करना पड़ेगा


तो पास में खड़ी मां बोली डॉक्टर साहब अगर खाने-पीने का इंतजाम कर पाते तो मेरा बच्चा आज बीमार थोड़ी ना पड़ता ( बोलते बोलते हो उसकी सिसकियां तेज होने लगी वह आंखों से बिना बादल बरसात होने लगी)




पिता हाथ जोड़कर आंखों में आंसू लिए बोला डॉक्टर साहब ऐसा कोई इलाज करो ना कि यहा रहना ना पड़े.
तब डॉक्टर बोला कि अगर आपने इसको एक-दो दिन यहा नहीं रखा तो भगवान ना करें इसकी तकलिफ ज्यादा बढ सकती है

इतना सुनते ही मां-बाप के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई हो
उन्होंने डॉक्टर साहब को बीच में ही रोकते हुए बोला डॉक्टर साहब यही तो बस एक जीने की आशा है हम यहां रुकेंगे ।।।

डॉक्टर ने इलाज चालू किया मां-बाप से बोला कि अब आप बच्चे के खाने के लिए कुछ दे सकते हैं।

तब लड़के के माता-पिता एक दूसरे को देखने लगे जैसे कोई मुसीबत आ गई हो ।।

मां बोली आप चिंता ना करें मेरे पास वह आपके लाये हुए बिस्किट के पैकेट अभी भी है है ।।।

तो लड़के का पिता बोलो लेकिन वह तो तुमने खा ली थी तभी अचानक अपने आप को समझाते हुए रुक गया और आंखों में आंसू छलक गये!!!


लड़के की मां ने उसको पानी में डुबोकर अपने बच्चे को खिलाने लगी।।।

तभी एक सज्जन पुरुष हाथ में एक थैला लिए उनके पास आकर बोला
 
अगर आप बुरा नहीं मानो तो मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूं मैं यह थोड़ा बहुत कुछ खाना लेकर कुछ थोड़ा बहुत कुछ खाना लेकर कुछ खाना लेकर आया हूं आप कृपा करके इसको इसको स्वीकार करें मेरे ऊपर भगवान के चढ़े हुए एहसानों उतारने मदद करे ।।।

तो लड़के का पिता बोला कैसे एहसान ।।।
तो सज्जन पुरुष हाथ जोड़ कर बोलो कि मेरे को जो भी धन दौलत भगवान ने दी है वह मेरे ऊपर एक एहसान ही है
 
और मैं चाहता हूं कि मैं किसी जरूरतमंद की सहायता करके अपना यह एहसान उतारना चाहता हूँ।
लड़के का पिता अपने दिल पर पत्थर रखकर भगवान को हाथ जोड़ते हुए आंखों में आंसू लिए उस सज्जन से वह भोजन स्वीकार किया 
 
( क्योंकि लड़के का पिता एक खुद्दार इंसान था लेकिन वह अपने बच्चे को बचाने के लिए मजबूर भी था)

इसी तरह जब तक उस बच्चे का इलाज चला तब तक वह सज्जन पुरुष उनको खाना पहुंचाता था ।।।
जब अंतिम दिन बच्चे की तबीयत में सुधार हो गया तो वह सज्जन लड़के के पिता के पास आया और बोला अगर आपको एतबार ना हो तो मैं एक बात बोलना चाहता हूं।।।

लड़के का पिता बोला आपका बहुत बड़ा एहसान है हमारे ऊपर आप जरूर बताएं हम आपके लिए क्या कर सकते हैं हमें खुशी होगी ।।।

तो सज्जन पुरुष लड़के के पिता से बोला मेरे को अपने बाग में एक माली की जरूरत है आप चाहो तो आप यह काम कर सकते हैं

लड़के के पिता से आंसुओं की नदी बहने लगी हो उसके सामने हाथ जोड़कर बोला कि यह मेरे परिवार पर आपका बहुत बड़ा एहसान होगा

इस तरह से लड़के के पिता ने उस सज्जन के वहां माली का काम शुरु कर दिया और उनकी जिंदगी में सुधार हुआ और उसके परिवार को समय पर खाना मिलने लगा ।।।



मित्रों आपसे भी विनती है कि आप भी जितनी हो सके बिना मांगे किसी गरीब की मदद कर दिया करो



  क्योंकि...।।


यह गरीबी अगर बाजार में मिलती तो सब उठा लाते,
खुशी पाने का जरिया सिर्फ पैसा हो नहीं सकता।।

कभी कर दिया करो मदद किसी गरीब जरूरतमंद की 
क्योंकि हर किसी खुद्दार के हाथ में काशा(भिक्षापात्र) हो नहीं सकता!!!

Monday, July 1, 2019

गरीब की ट्रेन में यात्रा


जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई,

एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़।

दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था।

जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है।

टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।

" ये जनरल टिकट है।
अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना।
वरना आठ सौ की रसीद बनेगी।"
कह टीसी आगे चला गया।

पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे।

सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे।

बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे।

लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे।

" साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी।"

टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा।

" सौ में कुछ नहीं होता।आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ।"

" आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।

गरीब लोग हैं, जाने दो न साब।" अबकि बार पत्नी ने कहा।

" तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो।एक की रसीद बना देता हूँ, दोनों बैठे रहो।"

" ये लो साब, रसीद रहने दो।दो सौ रुपये बढ़ाते हुए आदमी बोला।

" नहीं-नहीं रसीद दो बनानी ही पड़ेगी। ऊपर से आर्डर है।रसीद तो बनेगी ही।

चलो, जल्दी चार सौ निकालो।वरना स्टेशन आ रहा है, उतरकर जनरल बोगी में चले जाओ।"

इस बार कुछ डांटते हुए टीसी बोला।

आदमी ने चार सौ रुपए ऐसे दिए मानो अपना कलेजा निकालकर दे रहा हो।

दोनों पति-पत्नी उदास रुआंसे
ऐसे बैठे थे ,
मानो नाती के पैदा होने पर नहीं उसके शोक  में जा रहे हो।

कैसे एडजस्ट करेंगे ये चार सौ रुपए?

क्या वापसी की टिकट के लिए समधी से पैसे मांगना होगा?

नहीं-नहीं।

आखिर में पति बोला- " सौ- डेढ़ सौ तो मैं ज्यादा लाया ही था।

गुड्डो के घर पैदल ही चलेंगे।

शाम को खाना नहीं खायेंगे।
दो सौ तो एडजस्ट हो गए।
और हाँ, आते वक्त पैसिंजर से आयेंगे।
सौ रूपए बचेंगे।
एक दिन जरूर ज्यादा लगेगा।
सेठ भी चिल्लायेगा।
मगर मुन्ने के लिए सब सह लूंगा।
मगर फिर भी ये तो तीन सौ ही हुए।"

" ऐसा करते हैं,
नाना-नानी की तरफ से जो हम सौ-सौ देनेवाले थे न,
अब दोनों मिलकर सौ देंगे।
हम अलग थोड़े ही हैं।
हो गए न चार सौ एडजस्ट।"

पत्नी के कहा।
" मगर मुन्ने के कम करना....""

और पति की आँख छलक पड़ी।

" मन क्यूँ भारी करते हो जी। गुड्डो जब मुन्ना को लेकर घर आयेंगी; तब दो सौ ज्यादा दे देंगे। "

कहते हुए उसकी आँख भी छलक उठी।
फिर आँख पोंछते हुए बोली-

" अगर मुझे कहीं मोदीजी मिले तो कहूंगी-"

इतने पैसों की बुलेट ट्रेन चलाने के बजाय,

इतने पैसों से हर ट्रेन में चार-चार जनरल बोगी लगा दो,

जिससे न तो हम जैसों को टिकट होते हुए भी जलील होना पड़े और
ना ही हमारे मुन्ने के सौ रुपये कम हो।"

उसकी आँख फिर छलक पड़ी।

" अरी पगली, हम गरीब आदमी हैं,
हमें वोट देने का तो अधिकार है,
पर सलाह देने का नहीं। रो मत।

विनम्र प्रार्थना है
जो भी इस कहानी को पढ़ चूका है उसे इस घटना से शायद ही इत्तिफ़ाक़ हो पर अगर ये कहानी शेयर करे ,
कॉपी पेस्ट करे ,
पर रुकने न दे

शायद रेल मंत्रालय जनरल बोगी की भी परिस्थितियों को समझ सके।

उसमे सफर करने वाला एक गरीब तबका है
जिसका शोषण चिर कालीन से होता आया है।

   एक कोशिश परिवर्तन की ओर
                   ....... 😭😭😢😢