ए मंजिल
एक ना एक दिन
तुझे जरूर पाऊंगा,
ठोकरें है जहर
थोड़े ही है जो
मर जाऊंगा,,
✍️ वास्तविक जीवन से जुड़ाव :
हर सफल व्यक्ति के जीवन में
ऐसा दौर ज़रूर आया है
जब हालात ज़हर जैसे लगे हों।
लेकिन उन्हीं हालातों ने
उन्हें मज़बूत बनाया,
और मंज़िल तक पहुँचाया।
🔚 निष्कर्ष (Conclusion):
मंज़िल उन लोगों को मिलती है
जो ठोकरों को वजह नहीं,
सीढ़ी बना लेते हैं।
अगर इरादा मज़बूत हो,
तो ज़हर भी
हौसले के सामने
बेअसर हो जाता है।
No comments:
Post a Comment