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Thursday, January 8, 2026

ठोकरें हैं जहर थोड़ी ही है

ए मंजिल 
एक ना एक दिन 
तुझे जरूर पाऊंगा, 

ठोकरें है जहर
थोड़े ही है जो 
मर जाऊंगा,,




✍️ वास्तविक जीवन से जुड़ाव :

हर सफल व्यक्ति के जीवन में
ऐसा दौर ज़रूर आया है
जब हालात ज़हर जैसे लगे हों।

लेकिन उन्हीं हालातों ने
उन्हें मज़बूत बनाया,

और मंज़िल तक पहुँचाया।


🔚 निष्कर्ष (Conclusion):

मंज़िल उन लोगों को मिलती है
जो ठोकरों को वजह नहीं,
सीढ़ी बना लेते हैं।

अगर इरादा मज़बूत हो,
तो ज़हर भी
हौसले के सामने
बेअसर हो जाता है।

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