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Tuesday, January 31, 2023

आज का सुविचार 💭

उड़ने दो परिंदों को 
अभी शौक हवा में,

फिर लौट के बचपन के 
दिन नहीं आते हैं,,


Friday, August 28, 2020

बचपन

बचपन में खेल आते थे 
हर इमारत की छाँव के नीचे 

बड़े हुए तो पहचानने में आया कि 

मंदिर कौन सा और 
मस्जिद कौन सा... 

Monday, August 24, 2020

बचपन

शाम भी हुआ करती थी 
बचपन में तो यारों,

अब तो बस सुबह के बाद  
सीधे रात हो जाती है...Dj

Saturday, August 8, 2020

बचपन

बचपन की सबसे बड़ी 
गलतफहमी यही थी यारो की,  

बड़े होते ही ज़िंदगी बड़ी 
मजेदार हो जायेगी !!


Tuesday, July 21, 2020

बचपन

बचपन साथ रखियेगा
ज़िन्दगी की शाम में

उम्र महसूस ही न होगी,
सफ़र के मुक़ाम में...Dj 

Thursday, July 11, 2019

स्कूल की यादें ( मुर्गा रूपी पनिशमेंट)

एक टीचर अपने स्टूडेंट को मुर्गा बनने की सजा दी,
तब उस टीचर और बच्चे के बीच जो वार्तालाप वह पढें और स्कूल के याद करें,,,,


टीचर बोला,
बनजा वहां मुर्गा तेरी गलती की सजा तो यही पाएगा,
तुझको जो बक्स दिया तो कोई होमवर्क करके नहीं लाएगा।



बच्चा मासूमियत से बोला,
बन तो जाऊंगा मुर्गा मैं गुरुदेव पर इस से आप कुछ ना पाओगे,
ना तो मैं अंडा दे पाऊंगा ना आप मुझको खा पाओगे।





तब टीचर बोला
रे नादान,
इस सजा से तेरी स्कूल के बच्चे यही सीख पायेंगे,
जो भी गलती करेंगे वो मुर्गा रूपी दंड पाएंगे।




बच्चा बोला,
इस बार गलती माफ करो गुरुदेव स्कूल में इज्जत नहीं बचा पाऊंगा,
वादा करता हूं गुरुदेव कल पक्का होमवर्क करके आऊंगा।






तब टीचर सीरियस होकर बोला,
इस इज्जत से क्या करेगा रे नादान प्यारे इन्हीं बातों के लिए एक दिन तू तरसेगा,
वादा है मेरा जब तू बड़ा हो जाएगा तो इन्हीं बातों को याद करके तेरी आंखों से नीर बरसेगा।





तब बच्चा अपनी सजा डालने के लिए टीचर की गंभीरता को देखते हुए बोला
मैं नादान परिंदा समझ नहीं पाया,
गुरुदेव जरा विस्तार से बताओ ना


तब टीचर बोला
अभी तक तुम इतना होशियार नहीं बन पाया, नादान परिंदे मेरे  जरा मुर्गा बन के तो दिखाओ ना।।।


 

 









Thursday, June 27, 2019

यादें

1)
*चौराहे पर चाय वाले ने हाथ में गिलास थमाते हुए पूछा......*

*"चाय के साथ क्या लोगे साहब"?*

*ज़ुबाँ पे लब्ज आते आते रह गए*

*"पुराने यार मिलेंगे क्या"???*


2)

*जिम्मेदारियां मजबूर कर देती हैं अपना शहर छोड़ने को*

*"वरना कौन अपनी गली मे जीना नहीं चाहता....."*

*_हसरतें आज भी खत लिखती हैं मुझे, पर मैं अब पुराने पते पर नहीं रहता ..._*  ✍

Wednesday, June 26, 2019

यादें

1)
माना कि तुझे फुरसत नहीं
मुझसे बात करने की,

पर मुझे कोन रोक सकता है
तुझे याद करने से !!

2)
जब ताल्लुकात ज़रूरत के हो,

तो उसकी याद भी ज़रूरत के वक्त ही आती है !!

3)
सिलसिला आज भी वही जारी है,

तेरी याद मेरी नींद पर भारी है !!

4)
बस इतना सा असर होगा हमारी यादों का,

कि कभी कभी तुम बिना बात मुस्कुराओगे !!

5)
मुझे भी सीखा दो भूल जाने का हुनर,

मैं थक गया हूँ हर लम्हा तुम्हें याद करते करते !!



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