बरसों बाद मिले
तो ऐसा हुआ,
वह स्कूल वाली घंटी
अब भी बजती है
दिल में ❣️
🖋️ छोटी कहानी – स्कूल वाली घंटी
बरसों बाद मिले तो ऐसा हुआ,
वह स्कूल वाली घंटी
अब भी बजती है
दिल में।
वक़्त ने हमें
अलग-अलग रास्तों पर पहुँचा दिया था।
कोई नौकरी में व्यस्त,
कोई परिवार में,
तो कोई ज़िंदगी से ही जूझता हुआ।
लेकिन जैसे ही नज़रें मिलीं,
सालों का फासला
एक पल में मिट गया।
वही हँसी,
वही नाम लेकर चिढ़ाना,
वही बिना वजह की बातें।
क्लासरूम तो कहीं पीछे छूट गया था,
लेकिन दिल के अंदर
आज भी वही बेंच,
वही दोस्त,
और वही घंटी मौजूद थी।
जो हर मुलाक़ात पर
फिर से बज उठती है।
🌱 इससे मिलने वाली सीख:
इस लेख से हमें यह एहसास होता है कि
कुछ रिश्ते समय के मोहताज नहीं होते।
स्कूल की दोस्ती
ना फायदे से जुड़ी होती है,
ना ज़िम्मेदारी से।
वह बस
दिल से जुड़ी होती है।
बरसों बाद मिलकर भी
अगर दिल वही महसूस करे,
तो समझ लीजिए
वह रिश्ता आज भी ज़िंदा है।
✍️ निष्कर्ष (Conclusion) :
वक़्त हमें कितना भी बदल दे,
कुछ आवाज़ें
हमेशा दिल में गूंजती रहती हैं।
स्कूल की घंटी
शायद अब कानों तक न पहुँचे,
लेकिन दिल में
आज भी उतनी ही साफ़ बजती है।
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