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Wednesday, January 7, 2026

रूठना मनाना

केवल इतना ही 
रूठना अपनों से,

आपकी बात और 
सामने वाले की इज्जत 
दोनों ही बरकरार रहे,,



इस लेख से हमें यह सीख मिलती है कि

रूठना गलत नहीं है,
लेकिन तमीज़ से रूठना
एक कला है।

हर बात पर ताना देना
बार-बार अपमान करना
या बात को तमाशा बनाना
ये सब रिश्तों को नहीं,
इज्जत को नुकसान पहुँचाते हैं।

समझदारी इसमें है
कि अपनी बात भी कही जाए
और सामने वाले का मान भी बना रहे।


✍️ निष्कर्ष (Conclusion) :

रिश्ते आवाज़ से नहीं,
सम्मान से चलते हैं।

अगर रूठना पड़े,
तो इतना ही रूठिए

कि सुलह की गुंजाइश
हमेशा ज़िंदा रहे।


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