वफादारी 😀
जब विकल्प हो तो
कपड़े पसंद करना
तक मुश्किल हो जाता है.
आज की ज़िंदगी विकल्पों से भरी हुई है।
हर कदम पर नए ऑप्शन,
हर रिश्ते में तुलना,
हर फैसले में कन्फ्यूजन।
इतने विकल्प हो गए हैं कि
अब इंसान सही और
आसान के फर्क में उलझ जाता है।
कभी गौर किया है—
जब कपड़े खरीदते वक्त भी
हम सोच में पड़ जाते हैं,
तो फिर रिश्ते निभाना इतना
आसान कैसे हो सकता है?
पहले वफादारी एक आदत थी,
आज वो सिर्फ एक
ऑप्शन बन चुकी है।
और ऑप्शन का स्वभाव है—
बदल जाना।
लोग कहते हैं
“ऑप्शन होना आज़ादी है”
पर सच्चाई ये है कि
ज़्यादा विकल्प इंसान को
अस्थिर बना देते हैं।
आज हम किसी के साथ हैं,
कल किसी और की
संभावना देखते हैं।
वफादारी का मतलब
सबसे बेहतर ढूंढना नहीं,
बल्कि
एक को चुनकर
ईमानदारी से निभाना है।
जो हर बार बेहतर की
तलाश में रहता है,
वो अक्सर
सबसे सच्चा खो देता है।
इसलिए मेरे दोस्त,
जब ज़िंदगी तुम्हें
बहुत सारे विकल्प दे—
तो थोड़ा रुकना,
दिल से सोचना,
और फिर एक को चुनकर
उस पर टिक जाना।
क्योंकि
कपड़े बदले जा सकते हैं,
सोच बदली जा सकती है,
पर
किरदार बार-बार नहीं
बदलना चाहिए।
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