Labels

Sunday, July 21, 2019

मुसाफिर

मुसाफिर कल भी था,

मुसाफिर आज भी हूँ;

कल अपनों की तलाश में था,

आज अपनी तलाश में हूँ।

न जाने कौन सी शोहरत

पर आदमी को नाज है,

जबकि आखरी सफर के लिए भी

आदमी औरों का मोहताज है

No comments:

Post a Comment