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Saturday, July 6, 2019

गांव की जिंदगी कि यादें

दोस्तों आज मैं आपके साथ एक ऐसी कहानी शेयर करने जा रहा हूं जो

दो सगी बहनों की हो और उनकी अलग-अलग सोच की है।

एक का नाम रितिका (रीतू)  जिसको दुनिया की चकाचौंध और मॉडर्न लाइफ बहुत पसंद है

दूसरी का नाम निकिता (निकू) जिसको अपने गांव की लाइफ बहुत पसंद है

दोनों एक दिन बैठे बैठे आपस में बातें करने लगी

तो रीतू बोली क्यों रे निक्कू तू इतनी पढ़ाई क्यों नहीं करती है फेल हो जाएगी !!!

निक्कू बोली ज्यादा पढ़ लिख कर क्या करना है फेल होने में ही अच्छा है !!!

तो फिर रीतू ने बोला -
अरे अच्छा पढ़ लिख लेगी तो अच्छी नोकरी वाले लड़के से शादी होगी बङे शहर में जाकर रहने को मिलेगा!!!

तो निक्कू बोली मेरे को नहीं पसंद किसी नौकर से शादी करना मेरे को तो यही के किसान लड़के से शादी करनी है जो किसी के यहां नौकरी नहीं करता हूं चाहे पैसे कम की ही मिले !!!

तो रितु बोली अरे नौकर कैसे वो भी तो अच्छे पैसे कमाता है ना और कितनी अच्छी लाइफ जीने को मिलेगी !!!
कम पैसों में आजकल कुछ नहीं होता!!

तो निक्कू बोली तेरी वाली लाइफ अच्छी लाइफ नहीं बोल सकते वो तो एक जेल जैसी होगी !!

रितु बोली नहीं रे जेल नहीं होगी !!!

इसी तरह से दोनों में बहस बढ़ने लगी रितु शहर की लाइफ अच्छा बताने लगी और निक्कू गांव की लाइफ को अच्छा साबित करने लगी !!!

देखें दोनों की बहस

रितु बोली मेरे पति को 25-30 हजार महीने की तनख्वाह मिलेगी,
गांव में कौन कमाता है इतना !!!

निक्कू बोली अरे वह दिखाने के लिए है इतना पैसा उसमें खर्चे कौन निकालेगा
तेरे वहां हर चीज मौलव बिकाऊ होगी और हां सबसे बड़ा घर का किराया कौन होगा देख लेना !!!

रितु बोली अरे घर तो हम अपना ले लेंगे ना !!!

निक्कू बोली घर अपना लेने के लिए इतना पैसा कहां से लाएगी !!!

रीतू बोली अरे पैसे की क्या चिंता लोन होता ना आजकल,

निकू बोली उस लोन को चुकाते चुकाते 15-20 साल निकल जाएंगे!

मानती हूं यहां पैसे कम मिलेंगे लेकिन खर्चे भी तो कम है ना तू तेरे सारे खर्चे गुणा भाग कर के देख ले वही कि वहीं आ जाएगी!

रितु कहने लगी
वह तो धीरे-धीरे निकल जाएंगे रे लेकिन सुन
जब सुबह उनका टिफिन बना कर दूंगी वह मेरे को मुस्कुराते हुए अलविदा कहकर अपनी जॉब पर जाएंगे और शाम को मैं उनका बेसब्री से इंतजार करूंगी!!!

निक्कू बोली -
मैं तो इंतजार भी नहीं कर पाऊंगी वह सुबह बिना टिफिन लिए मुस्कुरा कर भेज दूगीं और दोपहर मे मैं उनके लिए खाना लेकर जाऊंगी वह खाना खाएंगे और हम दोनों बैठ कर बातें करेंगे!!!

तू कहां दिन मैं मिल पाएगी

रितु बोली शहर में किसी बहुत ऊंची बिल्डिंग में हमारा भी घर होगा!!!

निक्कू बोली तेरा ऊंची बिल्डिंग वाला घर सिर्फ उतना ही होगा उससे बाहर तूने निकल पाएगी।

रितु बोली शहर में धूल मिट्टी नहीं होगी!

निक्कू बोली शहर में ताजी हवा भी नही होगी ना!!@

रितु बोली हमारे घर में AC होगा कुलर होगा टीवी होगी!!

निकु बोली तेरे घर में हरे भरे पेड़ पौधे नहीं होंगे दिल की बात करने वाले पड़ोसी नहीं होंगे!!!

रितु बोली शहर में दिन मे धूप भी नहीं लगेगी ना।

निक्कू बोली शहर में आसमान में टिमटिमाते चांद और तारे भी नहीं मिलेंगे ना।

रितु बोली शाम को जब वापस आएंगे हम साथ में बैठ के अच्छी फिल्म देखेंगे!!!

निकू बोली जब वह शाम को वापस आएंगे हम पूरे परिवार के साथ बैठकर बातें करेंगे

रितु बोले हम हर रविवार को बाहर कहीं घूमने जाएंगे और मौज-मस्ती करेंगे अपनी जिंदगी का आनंद लेंगे!!!

निक्कू बोली तू तो हर रविवार को जाएगी मैं तो हर रोज जाऊंगी मेरे हरे भरे खेतों में!!!

इतनी बहस बाजी में रितु थोड़ी उदास होने लगी फिर भी हार नहीं मान रही थी

रितु बोली शहर में हर त्योहार को कितने मजे से मनाते हैं ना कितनी चकाचौंध होती है ना !!!

निक्कू बोली वह चकाचौंध सिर्फ लाइट की होती है रे मानती हूं गांव में लाइट कम होगी लेकिन इंसान तो ज्यादा होंगे ना,
तेरे शहर में क्यों दूर बैठकर देख सकते हैं यहां पर साथ में मिलकर त्यौहार मनाएंगे!!!

रितु बोले वह हमारे बच्चे को किसी अच्छे स्कूल में भेजे गए जहां पर अच्छी पढ़ाई करेगा

निकू बोली पढ़ाई तो अच्छी कर लेगा लेकिन परिवार का प्यार कहां मिलेगा और संस्कार कहां से सीखेगा

रितु बोली हम दोनों मिलकर सिखाएंगे ना

निक्कू बोली कौन दोनों उनकी नौकरी में व्यस्त रहेंगे और तू अपने घर के कामकाज और टीवी के चक्कर में

रितु बोली वहां पर कुछ भी तकलीफ होगी तो अच्छे अच्छे डॉक्टर और अस्पताल है यहां तो अच्छा डॉक्टर भी नहीं आसपास!!!

निक्कू बोली
हम क्यों बीमार पड़े हम अच्छा हो उगाएंगे अच्छा खाएंगे तेरे जैसे मिलावटी चीजें नहीं मिलेगी हमको

और हां कुछ तकलीफ होगी तो हमारे पड़ोसी हैं ना वह हमारी मदद करेंगे तेरी वहा मदद करने वाला कौन होगा

फिर से निक्कू टोकते हुवे बोली सुन पगली अगर परिवार में कुछ तकलीफ हो जाती है तो जरूरी थोड़ी ना है कि वह अपने काम पर जाएं जब चाहे हमारे साथ रह सकते हैं

"सुना है नौकरी वालों को तो अपने परिवार के साथ रुकने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है"

रितु बोली हम बहुत दिनों बाद जब करके वापस आएंगे तो सभी हम को देखकर कितना खुश होंगे!!!

निक्कू बोली मानती हो सब बहुत खुश होंगे लेकिन चंद दिनों बाद तेरे को वापस जाना पड़ेगा!!

इस पर निकु थोड़ा उदास होते हो बोली तू इतने दिन अपने मां-बाप से दूर कैसे रह पाएगी तेरे को याद नहीं आएगी क्या!!!

इतना सुनते ही रितू भी उदास होते बोली हां यार याद तो बहुत आएगी!!
पर फोन है ना फोन कर लुंगी।

निकू बोली
फोन पर आमने सामने मिलने जैसा मजा कहा है

मेरे को तो जब याद आएगी मैं जाकर मिलूंगी फिर को याद आएगी तो तू बैठ कर रोने के अलावा कुछ नहीं कर पाएगी

इतने में रितु की आंखों से आंसू निकल आए और बोली मानती हूं कि शहर की लाइफ अच्छी है चकाचौंध अच्छी है लेकिन परिवार से दूर रहने वाली अच्छाई भी किस काम की!!

रितु थोड़ा मुस्कुराते हुए बोली तो इस बार में भी फेल हो जाऊं क्या!!

इतना सुनते ही गमगीन हुआ माहौल फिर से हसी से भर गया

निक्कू धीरे से बोली जल्दी से कोई अच्छा सा किसान  का बेटा ढूंढ ले नहीं तो सभी बुक हो जाएंगे।।।

दोस्तों में इस कहानी से इतना ही समझाना चाहता हूं कि केवल पैसे के पीछे मत भागो परिवार दोस्त भी अपने जीवन में कुछ मायने रखते हैं

थोड़ा सा मैं अपने गांव के लिए भी निकालो,

जहां आपके बचपन की यादें जुड़ी है

आपके बचपन में साथ में खेलने वाले साथी भी वही है

देखना खुशी-खुशी कहां जाओगे तो गाव भी मुस्कुराते हुए आपका स्वागत करें

गांव केवल एक जगह नहीं बल्कि पूरा परिवार होता है

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