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Thursday, July 4, 2019

चौराहे पर भीख मांगते नन्हे बच्चे का जीवन

दोस्तों मैं आज एक ऐसी कहानी शेयर करने जा रहा हूं 
जो शायद आपकी भी आत्मा को झकझोर कर डाले



बारिश का मौसम था सुबह सुबह मैं भी अपना बैग लेकर ऑफिस के लिए अपनी बाइक पर निकला!!!


बीच रास्ते में सड़क पर एक चौराहा पड़ता है

न जाने क्यों आज चौराहे से पहले थोड़ा ट्रैफिक ज्यादा था वह सकता है आगे कोई गाड़ी खराब हुई हो या और कोई कारण..........


मैं भी उस ट्रैफिक में रेंगते रेंगते चल रहा था

तभी अचानक पीछे से कोई छोटा सा हाथ मेरे को अपनी तरफ खींच रहा था

तभी मैंने मुड़ कर देखा एक छोटा सा बच्चा लगभग 8 - 10 साल का होगा ।


जिसके शरीर पर दो-तीन घाव थे एक चेहरे पर था जिसमें से हल्का सा खून दिख रहा था उसका एक हाथ भी मुड़ा हुआ जिस पर एक कपड़े से पट्टी की हुई थी  ऐसे लग रहा था जैसे टूटा हुआ हो।




पहले तो मैंने उसको चिङते हुए बोला चल जा यहां से

लेकिन फिर भी वह अपनी जगह से हिला नहीं और बोला साहब कुछ पैसे दो ना...


ट्रेफिक तब तक पूरी तरह जाम हो चुका था आगे बढ़ने का बिल्कुल भी मौका नहीं था।


तभी मैंने उसको टोकते हुए बोला क्या करेगा तू पैसे से.............

बोला साहब बहुत भूख लगी है मेरे को कुछ खाना है ।

तो मैं बोला तेरे को खाना ही खाना तो चल मैं  तेरे को बिस्कुट दे देता ।

बोला साहब नहीं मेरे को पैसे ही दे दीजिए


मैंने बोला रे पगले पैसे से क्या करेगा तेरे को खाने को दे रहा ना, खा ले आराम से।


तभी उसके मुंह से अचानक एक बड़ी बात निकली बोला...........
 साहब आपके बिस्कुट से तो अभी की भूख मिट सकती है आप पैसे दोगे तो मेरी एक दो टाइम  का खाना मिल सकता है और मेरे को मार भी नहीं खानी पड़ेगी.....

मैंने भी अचंभित होकर पूछा- कैसे

पहले तो वह इधर-उधर देखने लगा शायद किसी को देख रहा था और बोला

साहब मैं यहां सभी से पैसे मांग लूंगा और जो भी देंगे वह ले जाकर अपने मालिक को ले जा कर दूंगा तो वह मेरे को एक दो टाइम खाना देगा......

मेरे ललाट पर लकीरे आ गई मैंने पूछा मालिक मतलब,
तेरे माता पिता कहां है



माता पिता का नाम लेते ही बच्चे की आंखों से आंसू निकल आए और रोते हुए बोला साहब माता-पिता होते तो शरीर की यह हालत थोड़ी ना होती........

मेरा कलेजा बैठ गया मेरी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं और अपने आंसुओं को रोकने के लिए मैं इधर उधर झांकने लगा और होंठ बन्द करके थोड़ा चुप रहा।

फिर मैंने हिम्मत जुटाकर प्यार से पूछा तो तू कहां रहता है

बच्चा मायूस होकर बोला मेरे मालिक के पास ।

तो मैंने पूछा क्यों तेरे मां-बाप के पास क्यों नहीं रहता तेरे को उनकी याद नहीं आती क्या
मैंने जैसे ही मां-बाप की को याद करने की बात कही



वह बच्चा रोते हुए बोला साहब याद तो बहुत आती है


बच्चा रोते हुए फिर से बोला साहब पैसे दो ना


तो मैंने बोला मैं तेरे को पैसे भी दूंगा पहले मेरे को बता तू यहां कैसे आया


बच्चा बोला पता नहीं साहब मैं तो अपने गांव में ही था पर एक दिन एक अंकल ने मुझको कुछ खाने के लिए दिया और मेरे को वह खाने के बाद नींद आ गई उसके बाद जब मेरी आंख खुली तो मैं कहीं और ही था.......


मैं बहुत रोया मैंने बोला मेरे को मेरे मां-बाप के पास जाने दो पर एक अंकल ने मुझको बहुत मारा और वह बोला चुप रह नहीं तो जान से मार दूंगा 
आज से मैं ही तेरा बाप हूँ......

उसकी मार की वजह से मेरे को यह चोट लगी है (वो अपने चेहरे की तरफ इशारा करते हुए बोला)

तो मैंने चिंतित होकर पूछा फिर तेरे हाथ को क्या हुआ

बच्चा रोते हुए बोला साहब जब मैंने रोना बंद नहीं किया तो अंकल ने मेरा हाथ बहुत जोर से  मोड़ दिया  जिससे  मेरा हाथ  टूट गया।।


दोस्तों उस समय मैं शक्ति हीन हो गया
ऐसा लग रहा था जैसे मेरे शरीर से जान ही निकल गई हो मेरे पैरों में इतनी भी ताकत नहीं बची कि मैं बाइक को संभाल सकूं.......

मैं सोचने लगा कि कैसे कोई आदमी इतना निर्दयी हो सकता है और वह भी एक मासूम सी जान पर........

मैं समझ गया कि इसके मालिक ने ऐसा क्यों किया बच्चा जितना ऐसा है और तकलीफ में दिखेगा लोगों को इतनी दया आएगी और उसको भिख देंगे.....


तभी ऐसा लग रहा था शायद ट्रैफिक खुल रहा था

मैंने झटपट बच्चे से पूछा कि तेरे को खाना  कब मिलता है

वह बोला साहब खाना तू रात को ही मिलता है कभी सुखी रोटी कभी फीके चावल सुबह तो सिर्फ आधी रोटी मिलती

बच्चा फिर से बोला साहब अब पैसे दो ना


दोस्तों ने उस समय बहुत ही चिंतित था यह सोच कर कि मैं उसको पैसे दूं या खाना

अगर मैंने उसको खाना दिया तो उसको बहुत मार पड़ेगी कि  उसने पैसे  क्यों नहीं मागें
और
मैंने उसको पैसा दिया तो इसके मालिक जैसे लोगों को और लालच आएगा और यह लोग और भी कई बच्चों को लाकर ऐसा काम करवाएंगे


मेरे पास वाली गाड़ियां धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी


बच्चा रोते रोते फिर से बोला साहब पैसे दो ना


तब मैंने बिना सोचे समझे मेरे बेग से वह बिस्किट का पैकेट निकाला और उसको दे दिया

( तो फिर से बोला साहब बिस्किट नहीं पैसे दो ना)

और उसको कुछ पैसे भी दिए बोला

बिस्कुट तू यहीं पर खा लेना और पैसे अपने मालिक को दे देना




दोस्तों उस समय ट्रैफिक तो पूरा खुल गया 
लेकिन मैं अंदर ही अंदर अपने आप में ही जकड़ कर रह गया........
सारा दिन ऑफिस में चिंतित होकर यही सोचता रहा कि ........


मेरे देश में ऐसे कितने ही बच्चे होंगे जो मजबूरी में अपने मां बाप से दूर रहकर इतना कष्टकारी जीवन बिता रहे हैं



मेरा सरकार और पुलिस से यही अनुरोध है कि ऐसे कई चौराहों पर खड़े यह नन्हे हाथ जहां भी आपको भीख मांगते दिखे............




तो आप या तो उनके मां-बाप मतलब मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई करे


और उन बच्चों को किसी अनाथ आश्रम में भेज दें


ताकि उनको समय पर खाना मिल सके 


और रोज रोज की मार से भी बच सकें


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