1)
रेंगता लुढकता तेरी उंगली के सहारे न जाने कब मैं खड़ा हो गया,
यह वक्त इतना क्यों तेज चलता है मां जो मैं इतना जल्दी बड़ा हो गया।।
2)
समझ जाते हैं भगवान भी तेरी इशारे को
थोड़ा इस जिंदगी को भी समझा देना मां,
थक गया हूं मैं जिंदगी की इस भागदौड़ से
थोड़ा आराम चाहता गोद में सुला ले ना मां।।
3)
नहीं मिटा पाया मैं भूख खाकर खाना महंगे होटलों से,
कैसे मिटा देती थी आप मां अपने आटे भरे हाथों के 1-2 निवाले से।।
4)
महंगे खानों ने तो सिर्फ जुबान हवस मिटाई है,
भूख तो मां तेरे चुल्हे की रोटी ने मिठाई है ।।
5)
कैसे हो सकता कद तेरा ऊँचा किसी भी माँ से ए खुदा,
तू सिर्फ आदमी बनाता है, इन्सान तो वही बनाती है ना ।।
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