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Sunday, August 25, 2019

कवियों के बोल

मत डर जो अंधेरी रात है
होने वाली अब प्रभात है
ये अंत नहीं है जीवन का
हर सुबह नयी शुरूआत है ।

है अंधकार अब लुप्त हुआ
हर ओर प्रकाश अब होना है
उठ कर बढ़ना है आगे हमें
देर तलक ना सोना है ।।

तेज चमकना है हमको
नयी सुबह है नया है मौका
आगे बढ़ने के अब जज्बात है ।।

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