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Tuesday, December 24, 2019

कवियों के बोल

"दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है 
केवल उतना ही याद रखती है, 

जितने से उसका स्वार्थ सधता है।"

~आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी


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ये धरती ये जीवन-सागर ये संसार हमारा है 
अमृत बादल बन के उठे हैं पर्बत से टकराएँगे 

खेतों की हरियाली बन कर छब अपनी दिखलाएँगे 
दुनिया का दुख-सुख अपना कर दुनिया पर छा जाएँगे 

~मसूद अख़्तर जमाल

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