"दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है
केवल उतना ही याद रखती है,
जितने से उसका स्वार्थ सधता है।"
~आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
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ये धरती ये जीवन-सागर ये संसार हमारा है
अमृत बादल बन के उठे हैं पर्बत से टकराएँगे
खेतों की हरियाली बन कर छब अपनी दिखलाएँगे
दुनिया का दुख-सुख अपना कर दुनिया पर छा जाएँगे
~मसूद अख़्तर जमाल
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