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Monday, February 10, 2020

वृद्धाश्रम मे एक मां कि मनोस्थिति

महिला वृद्धाश्रम की गली से 
द्रवित हुआ है हृदय दोबारा, 



इस छोटी सी दुनिया में कैसे कैसे लोग पड़े हैं, 
इस छोटी सी दुनिया में


गर्भ में जो महफूज हमेशा संतानों को रखती है
आज वही बेबस सी जननी, राह किसी की तकती है

अपनापन थोड़ा ही कोई, काश इन्हे भी दे जाए
बूढ़ी आंखे बात बात पर, यू ही ना ही बहती हैं

कैसे भारी जीवन काटे, लोग कंटीली दुनिया में 
द्रवित हुआ है हृदय दोबारा, इस छोटी सी दुनिया में

कोई पीड़ित संतानों से, कोई भाग्य की मारी है 
किसी को जग ने ठुकराया तो,कोई वक़्त से हारी है 

फिर भी हमने देखी करुणा, जो मां के दिल में होती है

पूत कपूत भले बनते है, फिर भी वो महतारी है
कितनी  निर्मम संताने है,  इस छोटी सी दुनिया में

द्रवित हुआ है हृदय दोबारा, 
इस छोटी सी दुनिया में

हे ईश्वर इस जग में कोई, बेबस होकर ना भटके
प्यार, दुलार मिले बच्चो का,कोई ऐसे ना तरसे

सबके दिल में भर दे करुणा, सद्बुद्धि का दान मिले
रहे ना कोई बेघर बूढ़ा, सबको घर में स्थान मिले

दया दृष्टि करदे हे दाता, इस छोटी सी दुनिया में 
द्रवित हुआ है हृदय हमारा, इस छोटी सी दुनिया में,,

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