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Tuesday, April 14, 2020

मजबूरी मे मजबूती (मां)

अख़बार बेचने वाला 10 वर्षीय बालक एक मकान का गेट बजा रहा है।


मालकिन - बाहर आकर पूछी क्या है ?

बालक - आंटी जी क्या मैं आपका गार्डेन साफ कर दूं ?

मालकिन - नहीं, हमें नहीं करवाना है, और आज अखबार नही लाया ।

बालक - हाथ जोड़ते हुए दयनीय स्वर में.. "प्लीज आंटी जी करा लीजिये न,

अच्छे से साफ करूंगा,आज अखबार नही छपा,कल छुट्टी थी दशहरे की ।"

मालकिन - द्रवित होते हुए "अच्छा ठीक है, कितने पैसा लेगा ?"

बालक - पैसा नहीं आंटी जी, खाना दे देना।"

बालक - एक घंटे बाद "आंटी जी देख लीजिए, सफाई अच्छे से हुई कि नहीं।

मालकिन -अरे वाह! तूने तो बहुत बढ़िया सफाई
की है, यहां बैठ, मैं खाना लाती हूँ।

जैसे ही मालकिन ने उसे खाना दिया, 
बालक जेब से पन्नी निकाल कर उसमें खाना रखने लगा।

मालकिन - भूखे काम किया है, अब खाना तो यहीं बैठकर खा ले। जरूरत होगी तो और दे दूंगी।

बालक - नहीं आंटी, 
मेरी बीमार माँ घर पर है,
सरकारी अस्पताल से दवा तो मिल गयी है,

पर 
डाॅ साहब ने कहा है 
दवा खाली पेट नहीं खाना है।


मालकिन की पलके गीली हो गई.
🙏🙏😥😥😥

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