जिन्दगी को कभी आजमा तो सही,
एक सपना पलक पर सजा तो सही,
पाँव ऊँचाइयों के शिखर छू सके,
सोच को पंख अपने लगा तो सही !!
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कमाल का हौंसला दिया
रब ने हम इन्सानों को,
वाकिफ हम अगले पल से भी नहीं
और वाडे कर लेते है जन्मों के !!
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हे इश्वर मुझे इतना निचे न गिराना की
मैं पुकारू और तू सुन न पाये,
और इतना ऊपर भी न उठाना की
तू पुकारे और मैं सुन न पाऊ !!
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इन्सान ख्वाहिशो से बंधा
एक जिद्दी परिंदा है,
जो उम्मीदों से ही घायल है
और उम्मीदों से ही ज़िंदा है !!
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इन्सान की चाहत की उड़ने के लिए पर मिले,
और परिंदों की चाहत की रहने के लिए घर मिले !!
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