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Saturday, August 17, 2019

जिंदगी

ज़िंदगी देती नहीं सबको सुनहरे मौके,

तुझको अंगूठी मिली है तो नगीना बन जा !!

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ज्यादा शब्द नहीं मेरे पास जिंदगी को लुभाने के लिए,

हम तो जी रहे है बस जिंदगी को आजमाने के लिए !!

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मेहनत करते थकता नहीं मजदूर का बदन,

और वो अमीर नोट भी गिनते है तो मशीन लगाकर !!

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होने दो ‪मेरी‬ जिंदगी का भी ‪‎तमाशा‬,

‪मैंने भी ‪बहुत‬ ‪तालिया‬ बजायी थी ‪
सर्कस‬ में ‪शेर‬ के ‎नाचने‬ पर !!

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फैसले से पहेले कैसे मान लूं हार क्योंकी,

वक्त अभी जीता नहीं और मैं अभी हारा नहीं !!

Saturday, August 10, 2019

कवियो के बोल

ले गया दिल में दबा कर राज कोई,
पानियों पर लिख गया आवाज़ कोई ।

बांध कर मेरे परों में मुश्किलें,
हौसलों को दे गया परवाज़ कोई ।

नाम से जिसके मेरी पहचान है,
मुझमें उस जैसा भी हो अंदाज़ कोई ।

जिसका तारा था वहां के सो गई
अब नहीं करता मुझपे नाज कोई ।

रोज उसको खुद के अंदर खोजना
रोजाना दिल से आवाज कोई ।

~आलोक श्रीवास्तव

Sunday, August 4, 2019

यारी

हमने नसीब से ज्यादा अपने दोस्तों पर भरोसा रखा,

क्यूंकि नसीब तो कई बार बदला है

पर हमारे दोस्त नहीं बदले !!

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जो आपको सही रास्ता ना दिखाए,

वो दोस्ती दुश्मनी से भी ज्यादा
खतरनाक होती है !!

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कमजोर है वो शख्स जो दोस्त न बना सके,

उससे भी कमजोर है वो शख्स

जो बने हुए दोस्त को गँवा दे !!

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वक्त और हालात के साथ
शौक तो बदल जाते है,

लेकिन रिश्तें और दोस्त
बदलना मुश्किल होता है !!

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अगर तुम्हारे पास एक भी सच्चा दोस्त नहीं,

तो यकीन मानिये तुमसे
गरीब दुनिया में कोई नहीं !!

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Friday, August 2, 2019

किसान हूं मैं

मिट्टी का बेटा हूं इसमें ही पला बढ़ा
इज्जत जमीन की करना जानता हूँ,


चीर के सीना धरती का
पेट दुनिया का पालता हूं,,


सूनी पड़ी वीरान जमी को
कैसे करूं सुहागन जानता हूं,


कर दूंगा एक दाने से सैंकड़ों
बस यही आस में पलता हूँ,,


गर्मी सर्दी हो या बरसात
कैसे किस से जूझना जानता हूं,


खून पसीने से सिंचता मैं धरा धीरज
अंकुर को बेटे सा पालता हूं,,


मत सोचो आसान जिंदगी मेरी
कितनी मेहनत जरूरी में ही जानता हूं,

पूरे करेगा रब सपने सारे बच्चों के मेरे
बस यही विश्वास मन में पालता हूं,,


मत सताओ इतना वरना
संत से परशुराम बनना भी जानता हूं,

सोच रहे हो उतना नहीं हूं कमजोर
मैं हथियारों का शौक भी पालता हूँ,,



कह दो उनसे घमंड है गहरा रोग
बुरा होता है फल इसका जानता हूँ,

झुक कर झेल लूं आंधियां उन कोमल पौधों जैसे 
शौक मगरूर पेड़ों से नहीं मैं पालता हूं,,


नहीं हुआ यहां पर अमर कोई
सबको है मिल जाना इसी मिट्टी में जानता हूं,

किसान हूं समझता मैं कीमत भूख की
दुखों के तूफान बस दिल में पालता हूं,,



मिट्टी का बेटा हूं इज्जत जमीन की करना जानता हूँ,, 

Wednesday, July 31, 2019

सत्य

जिनके पास सिर्फ सिक्के थे
वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ....

जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रहे .

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कामयाब लोग " अपने फेसले " से
दुनिया बदल देते हे !!

और

नाकामयाब लोग दुनिया के डर से
"अपने फेसले " बदल लेते हे !!"

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क्या किस्मत पाई है रोटीयो ने भी निवाला बनकर,

रहिसो ने आधी फेंक दी,
गरीब ने आधी में जिंदगी गुज़ार दी!!

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बुराई इसलिये नही बढती की
बुरे लोग बढ गये है ,

बुराई इसलिये बढती है कि
बुराई को सहन करने वाले
लोग बढ गये हैं !

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कर्मो से ही पहचान होती है इंसानों की..

अच्छे कपड़े तो बेजान
पुतलो को भी पहनाये जाते है..।।