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Sunday, July 21, 2019

मुसाफिर

मुसाफिर कल भी था,

मुसाफिर आज भी हूँ;

कल अपनों की तलाश में था,

आज अपनी तलाश में हूँ।

न जाने कौन सी शोहरत

पर आदमी को नाज है,

जबकि आखरी सफर के लिए भी

आदमी औरों का मोहताज है

सुविचार

जब चलना है तुझको तेरे पैरों पर

तो क्यों करता है भरोसा गैरों पर

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सही इंसान को तभी पहचान पाएगा,

जब तू करके भरोसा झूठों पर ठोकर खाएगा,

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क्यों पड़ती ईतनी जरूरत संघर्ष करने की,

हकीकत होती "हम तुम्हारे साथ हैं" मे साथ निभाने की,

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अगर हो सामना मुसीबत से तो डरते क्यों हो,

तरकीब निकालो जीने की बेवजह मरते क्यों हो,

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रख हौसला हर हाल में ऊंचा उठने की

फैशन बन गई है नहीं है जमाने में आदत टांग खींचने की

वक्त

मैं मानता हूं कि

बुरा वक्त बताकर नहीं आता

पर जब वह जाता है

तो बहुत कुछ सिखाकर और समझाकर जाता है

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छाता लगाने का मतलब ये नहीं की बच गए पानी से,

याद रखो की डुबाने वाला पानी

सिर से नहीं

पैर कि आता है !!

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हर किसी में अच्छाई के साथ साथ बुराई भी होती हैं

जैसे,

पत्थर में एक ही कमी है की वो कभी पिघलता नहीं है,

लेकिन उसकी खूबी है की वो कभी बदलता भी नहीं है !!

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सत्य वचन

जीवन में खुश रहने की दो ही शक्तियां है

पहली सहनशक्ति

दूसरी समझ शक्ती

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सुविचार

1)

जहाँ भी आपको लगे की आपकी जरुरत नहीं है,

वहाँ ख़ामोशी से खुद को अलग कर लेना चाहिए !!

2)

पकाई जाती है रोटी जो मेहनत की कमाई से,

हो जाए गर बासी तो भी लिज्जत कम नहीं होती !!

3)
मेरे कुछ पुराने कपड़ो में,

मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत लगा

वो बच्चा ग़रीब का !!

4)

जो बेवजह दूसरों का दिल तोडा करते है,

उसे भी कभी सच्चा प्यार नसीब नहीं होता !!

5)
कुछ नहीं मिलता दुनिया में मेहनत के बगैर,

मेरा अपना साया भी धूप में आने से मिला !!

Saturday, July 20, 2019

माँ

1)
रेंगता लुढकता तेरी उंगली के सहारे न जाने कब मैं खड़ा हो गया,

यह वक्त इतना क्यों तेज चलता है मां जो मैं इतना जल्दी बड़ा हो गया।।

2)
समझ जाते हैं भगवान भी तेरी इशारे को
थोड़ा इस जिंदगी को भी समझा देना मां,

थक गया हूं मैं जिंदगी की इस भागदौड़ से
थोड़ा आराम चाहता गोद में सुला ले ना मां।।

3)
नहीं मिटा पाया मैं भूख खाकर खाना महंगे होटलों से,

कैसे मिटा देती थी आप मां अपने आटे भरे हाथों के 1-2 निवाले से।।

4)
महंगे खानों ने तो सिर्फ जुबान हवस मिटाई है,

भूख तो मां तेरे चुल्हे की रोटी ने मिठाई है ।।

5)
कैसे हो सकता कद तेरा ऊँचा किसी भी माँ से ए खुदा,

तू सिर्फ आदमी बनाता है, इन्सान तो वही बनाती है ना ।।