कि सुबह का खाना मिलता तो शाम को भूखा सोना पड़ता था
और
कभी शाम को मिलता तो सुबह भूखा रहना पड़ता था।।।
जो घर की छत से टपक रही पानी की बूंदों से पता चल रहा था
क्योंकि घर की छत जगह जगह से टूटी हुई थी और टिन और चदर से बनी हुई थी।।
इतना कहकर पिता बाहर निकला और पास ही की एक किराना की दुकान पर पहुंचा
वहां से उसने दो बिस्किट के पैकेट लिये और वहीं डस्टबिन में पड़ा एक बिस्किट का खाली पैकेट भी हाथ में में उठा लिया।।।
और थोड़ा सा बिस्किट अपने होठों पर रख लिया जिससे लगे कि इसने भी खा लिया हो
इसलिए घरेलू उपचार करने लगे
लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ और
तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी थी
और रिक्शा या गाड़ी करने के पैसे थे नहीं इसलिए उस पिता ने अपने बेटे का भार अपने कंधों पर लिया और और लड़के की मां ने एक पुराना फटा थेला लिया जिसमें एक पानी की बोतल और एक फटी पुरानी चादर के अलावा और कुछ नहीं था।।।
तो उन्होंने जैसे-तैसे करके ₹5 में रसीद कटवाई और डॉक्टर का इंतजार करने लगे!!!
उसके कुछ ही समय बाद उनका भी नंबर आया
या कहीं बाहर बारिश में भीग गया ???
और इसने बाहर तो क्या अंदर भी एक-दो दिन से ज्यादा कुछ नहीं खाया ।।।
उन्होंने डॉक्टर साहब को बीच में ही रोकते हुए बोला डॉक्टर साहब यही तो बस एक जीने की आशा है हम यहां रुकेंगे ।।।
अगर आप बुरा नहीं मानो तो मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूं मैं यह थोड़ा बहुत कुछ खाना लेकर कुछ थोड़ा बहुत कुछ खाना लेकर कुछ खाना लेकर आया हूं आप कृपा करके इसको इसको स्वीकार करें मेरे ऊपर भगवान के चढ़े हुए एहसानों उतारने मदद करे ।।।
और मैं चाहता हूं कि मैं किसी जरूरतमंद की सहायता करके अपना यह एहसान उतारना चाहता हूँ।
( क्योंकि लड़के का पिता एक खुद्दार इंसान था लेकिन वह अपने बच्चे को बचाने के लिए मजबूर भी था)
खुशी पाने का जरिया सिर्फ पैसा हो नहीं सकता।।


