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Tuesday, July 2, 2019

गरीब के बच्चे का इलाज

एक शहर में एक बहुत ही गरीब परिवार रहता था,
उस परिवार में एक अधेङ आदमी, उसकी पत्नी और उसका एक लड़का था..।
गरीबी इस हद तक थी 
 
कि सुबह का खाना मिलता तो शाम को भूखा सोना पड़ता था
और
कभी शाम को मिलता तो सुबह भूखा रहना पड़ता था।।।

बारिश का मौसम था बारिश बहुत तेज हो रही थी
जो घर की छत से टपक रही पानी की बूंदों से पता चल रहा था
क्योंकि घर की छत जगह जगह से टूटी हुई थी और टिन और चदर से बनी हुई थी।।


घर में भीगने के लिए इतना कुछ तो था नहीं पर वह तीनों तो जरूर थोड़े-थोड़े भिग रहे थे।।।
बारिश में भीगने की वजह से उसके लड़के की तबीयत बिगड़ने लगी थी।।

पिता बोला कि मैं कुछ खाने के लिए लेकर आता हूँ शायद भूख से ज्यादा कमजोर हो गया है
इतना कहकर पिता बाहर निकला और पास ही की एक किराना की दुकान पर पहुंचा
वहां से उसने दो बिस्किट के पैकेट लिये और वहीं डस्टबिन में पड़ा एक बिस्किट का खाली पैकेट भी हाथ में में उठा लिया।।।

वापस घर पहुंचकर पत्नी से बोला यह लोग एक-एक तुम भी खा लो मैंने तो रास्ते में आते-आते खा लिया था वो भूख ज्यादा लगी और अपना मुंह ऐसे ही हिलाने लगा जैसे कुछ खा रहा हो और वह खाली बिस्किट का पैकेट कोने में फेंक दिया ।।।

मां ने एक बिस्किट का पैकेट खोला और पानी में भिगो भिगो कर अपने बच्चे को खिलाया।।।
और थोड़ा सा बिस्किट अपने होठों पर रख लिया जिससे लगे कि इसने भी खा लिया हो 

इलाज के लिए इतने पैसै तो थे नहीं
इसलिए घरेलू उपचार करने लगे 
 
लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ और
तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी थी 

तो दोनों पति पत्नी एक दूसरे की आंखों में बिना कुछ बोले देख रहे थे और अपने आप को कोस रहे थे
तो मां से रहा नहीं गया और अपने पति से बोली कि सुनिए ना बच्चे की तबीयत बहुत बिगड़ गई है किसी डॉक्टर को दिखाने क्यों नहीं लेकर जाते।

इतना सुनते ही उसका पति मायूस होकर बोला अरे पगली मैं भी बहुत चाहता हूं कि बच्चे को डॉक्टर को दिखाओ लेकिन इतने पैसे कहां हैं अपने पास।।।

तो पत्नी अपने पति से बोली कि सुना है सरकारी अस्पतालों में इलाज बिना पैसे की भी किया जाता है तो क्यों ना हम अपने बच्चे को किसी सरकारी अस्पताल में यह लेकर चले।
अस्पताल थोड़ा दूर था 
 
और रिक्शा या गाड़ी करने के पैसे थे नहीं इसलिए उस पिता ने अपने बेटे का भार अपने कंधों पर लिया और और लड़के की मां ने एक पुराना फटा थेला लिया जिसमें एक पानी की बोतल और एक फटी पुरानी चादर के अलावा और कुछ नहीं था।।।

वह दोनो अस्पताल की ओर चल पड़े







उन कमजोर कंधों में इतनी शक्ति कहां थी कि कि बिना रुके अस्पताल पहुंचे इसके लिए कभी पिता के कंधों पर कभी मां के कंधों पर बच्चे का भार ढोते हुए और यह सोचते हुए अस्पताल पहुंचे कि डॉक्टर कोई एक दो दवाई या फिर इंजेक्शन लगा कर ठीक कर देंगे।

वहां जाकर पता चला कि दिखाने से पहले ₹5 की रसीद कटवानी पड़ती है उसके बाद ही दिखा सकते हैं
तो उन्होंने जैसे-तैसे करके ₹5 में रसीद कटवाई और डॉक्टर का इंतजार करने लगे!!!

थोड़ी देर बाद में डॉक्टर आए और
उसके कुछ ही समय बाद उनका भी नंबर आया

डॉक्टर ने पूछा कि क्या हुआ बाहर का कुछ खाया क्या,
या कहीं बाहर बारिश में भीग गया ???


तो वह बूढ़े पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े और बोला डॉक्टर साहब बाहर कहीं नहीं भीगा साहब यह तो बस घर के अंदर ही भिगा था,
और इसने बाहर तो क्या अंदर भी एक-दो दिन से ज्यादा कुछ नहीं खाया ।।।
इतना कहते कहते हो बाप आंखों से आंसू छलक पड़े इसके साथ ही पास ही में खड़ी वह मां भी सिसकियां भरने लगी
डॉक्टर ने जांच करके बोला कि इसकी तकलीफ थोड़ी ज्यादा है इसके लिए आपको दो-तीन दिन यहीं पर भर्ती होना पड़ेगा
यह सब बातें उनके पास खड़ा।।


( यह सब बातें उनके पास खङा सज्जन पुरुष शांति से सुन रहा था और अपने आप को चिंतित महसूस कर रहा था)


डॉक्टर ने सांत्वना देते हुए बोला कि आप चिंता ना करें यहां पर आपके बच्चे का इलाज मुफ्त में किया जाएगा पर आपको इसकी खाने-पीने का इंतजाम करना पड़ेगा


तो पास में खड़ी मां बोली डॉक्टर साहब अगर खाने-पीने का इंतजाम कर पाते तो मेरा बच्चा आज बीमार थोड़ी ना पड़ता ( बोलते बोलते हो उसकी सिसकियां तेज होने लगी वह आंखों से बिना बादल बरसात होने लगी)




पिता हाथ जोड़कर आंखों में आंसू लिए बोला डॉक्टर साहब ऐसा कोई इलाज करो ना कि यहा रहना ना पड़े.
तब डॉक्टर बोला कि अगर आपने इसको एक-दो दिन यहा नहीं रखा तो भगवान ना करें इसकी तकलिफ ज्यादा बढ सकती है

इतना सुनते ही मां-बाप के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई हो
उन्होंने डॉक्टर साहब को बीच में ही रोकते हुए बोला डॉक्टर साहब यही तो बस एक जीने की आशा है हम यहां रुकेंगे ।।।

डॉक्टर ने इलाज चालू किया मां-बाप से बोला कि अब आप बच्चे के खाने के लिए कुछ दे सकते हैं।

तब लड़के के माता-पिता एक दूसरे को देखने लगे जैसे कोई मुसीबत आ गई हो ।।

मां बोली आप चिंता ना करें मेरे पास वह आपके लाये हुए बिस्किट के पैकेट अभी भी है है ।।।

तो लड़के का पिता बोलो लेकिन वह तो तुमने खा ली थी तभी अचानक अपने आप को समझाते हुए रुक गया और आंखों में आंसू छलक गये!!!


लड़के की मां ने उसको पानी में डुबोकर अपने बच्चे को खिलाने लगी।।।

तभी एक सज्जन पुरुष हाथ में एक थैला लिए उनके पास आकर बोला
 
अगर आप बुरा नहीं मानो तो मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूं मैं यह थोड़ा बहुत कुछ खाना लेकर कुछ थोड़ा बहुत कुछ खाना लेकर कुछ खाना लेकर आया हूं आप कृपा करके इसको इसको स्वीकार करें मेरे ऊपर भगवान के चढ़े हुए एहसानों उतारने मदद करे ।।।

तो लड़के का पिता बोला कैसे एहसान ।।।
तो सज्जन पुरुष हाथ जोड़ कर बोलो कि मेरे को जो भी धन दौलत भगवान ने दी है वह मेरे ऊपर एक एहसान ही है
 
और मैं चाहता हूं कि मैं किसी जरूरतमंद की सहायता करके अपना यह एहसान उतारना चाहता हूँ।
लड़के का पिता अपने दिल पर पत्थर रखकर भगवान को हाथ जोड़ते हुए आंखों में आंसू लिए उस सज्जन से वह भोजन स्वीकार किया 
 
( क्योंकि लड़के का पिता एक खुद्दार इंसान था लेकिन वह अपने बच्चे को बचाने के लिए मजबूर भी था)

इसी तरह जब तक उस बच्चे का इलाज चला तब तक वह सज्जन पुरुष उनको खाना पहुंचाता था ।।।
जब अंतिम दिन बच्चे की तबीयत में सुधार हो गया तो वह सज्जन लड़के के पिता के पास आया और बोला अगर आपको एतबार ना हो तो मैं एक बात बोलना चाहता हूं।।।

लड़के का पिता बोला आपका बहुत बड़ा एहसान है हमारे ऊपर आप जरूर बताएं हम आपके लिए क्या कर सकते हैं हमें खुशी होगी ।।।

तो सज्जन पुरुष लड़के के पिता से बोला मेरे को अपने बाग में एक माली की जरूरत है आप चाहो तो आप यह काम कर सकते हैं

लड़के के पिता से आंसुओं की नदी बहने लगी हो उसके सामने हाथ जोड़कर बोला कि यह मेरे परिवार पर आपका बहुत बड़ा एहसान होगा

इस तरह से लड़के के पिता ने उस सज्जन के वहां माली का काम शुरु कर दिया और उनकी जिंदगी में सुधार हुआ और उसके परिवार को समय पर खाना मिलने लगा ।।।



मित्रों आपसे भी विनती है कि आप भी जितनी हो सके बिना मांगे किसी गरीब की मदद कर दिया करो



  क्योंकि...।।


यह गरीबी अगर बाजार में मिलती तो सब उठा लाते,
खुशी पाने का जरिया सिर्फ पैसा हो नहीं सकता।।

कभी कर दिया करो मदद किसी गरीब जरूरतमंद की 
क्योंकि हर किसी खुद्दार के हाथ में काशा(भिक्षापात्र) हो नहीं सकता!!!

जीवन की सच्चाई

एक बार एक बूढ़ा व्यापारी था

उसकी सेहत अच्छी नहीं रहती थी
इसके लिए उसने अपनी जायदाद अपने बेटे के नाम करने का फैसला किया ।

उसने अपने बेटे को अपने पास बुलाया,
और वसीयत के पेपर सौंपते हुए बोला,
कि मेरी आखिरी इच्छा जरूर पूरी करना ।।।

जब मैं मर जाऊं और मेरे को श्मशान के लिए ले जाया जाए,
तब तुम मेरे वह पुरानी फटी बनियान मुझे पहना कर लेकर चलना.

तो पुत्र बोला

कि पिताश्री मैं आपको फटी हुई क्यों नई बनियान लाके पहना दूंगा।।।

पर पिता बोला नहीं मेरे पुत्र मेरे को वहीं  मेरी फटी बनियान पहनाना

तो पुत्र बोला कि ठीक है पिता जी जैसी आपकी इच्छा।।

कुछ दिनों पश्चात उस बूढ़े व्यापारी का निधन हो गया
और जब उसको श्मशान ले जाने से पहले नहलाया गया,

तो उसके पुत्र ने बोला

कि हे सज्जनों,
मेरे पिताजी की आखिरी इच्छा है और
मैं मेरे पिताजी कि वह आखिरी इच्छा पूरी करना चाहता हूं ।।।

तो वहां उपस्थित लोगों ने पूछा कि तुम्हारे पिताजी की आखिरी इच्छा क्या है

तो वह बोला कि मेरे पिताजी चाहते थे कि उनकी फटी हुई बनियान उनको बनाया जाए।।।

तो वहां उपस्थित लोगों ने मना करते हुए बोले
कि मरे हुए इंसान को को कोई भी वस्त्र धारण करने की इजाजत नहीं है उसको सिर्फ एक सफेद वस्त्र में ही ले  जाएगा

लेकिन पुत्र को अपने पिता की इच्छा पूरी करनी थी इसके लिए बहस पर उतर आया।

थोड़ी ही देर में पूरे शहर में यह चर्चा होने लग गई और बड़े बड़े माननीय पंडित और धर्मगुरुओं की वहां उपस्थित हो गए ।।।

सब मिलकर उस पुत्र को समझाने लगे।।

तभी एक बुजुर्ग जो उसके पिता का मित्र था
एक कागज हाथ में लेकर आया और बोला

कि यह कागज तुम्हारे पिता ने मेरे को दिया था और बोला कि जब ऐसी स्थिति हो जाए तो मेरे पुत्र को यह जरूर दे देना ।।।

पुत्र ने कागज पढा तो उसमें लिखा था,

कि देखा ना पुत्र

यह दुनिया मेरे को मेरे साथ एक मेरी फटी बनियान भी नहीं ले जाने देते,,,

मैंने मेरी पूरी जिंदगी बिता कर जो इतना इतनी धन दौलत बंगला गाड़ी पैसा कमाया है वो सभी मेरे किसी काम का नहीं है ।।।

यही लोग मेरे साथ आएंगे जिनके साथ मैंने अच्छा आचरण किया है और यही मेरे अंत तक मेरा साथ निभाएंगे ।।

इसलिए

है मेरे पुत्र
कभी भी किसी भी इंसान के साथ बुरा आचरण मत करना
जितना हो सके उसकी मदद करना
जिंदगी में पैसा कुछ नहीं होता
इंसान ही इंसान के काम आता है
इसलिए जितना हो सके उतना इंसान कमाना

क्योंकि सभी धन दौलत यहीं रह जाती है और इंसान को केवल उसी एक सफेद वस्त्र में जाना पड़ता है

यही मेरी आखिरी सीख है और मेरी आखिरी इच्छा भी

मैं आशा करता हूं कि तुम मेरी आखिरी इच्छा जरूर पूरी करेगा

तो उत्तर की आंखों से आंसू बहने लगे और वह अपने पिता के चरणों में  बैठकर रोने लगा

तो वहां उपस्थित सभी लोगों ने पूछा कि क्या हुआ तो उसने उस सारी बात बताई तब सब लोगों ने कहा कि

यही इस जीवन की सच्चाई है

इसीलिए मेरे मित्रों जितना हो सके इंसान कमाओ पैसा साथ में नहीं चलता।।।

Monday, July 1, 2019

नसीब अपना अपना

1)

हाथों की लकीरों पर गुमान मत करना,

किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते !!

2)

इन्सान की फितरत भी बड़ी अजीब है,

डूबता है तो पानी को दोष देता है,

गिरता है तो पत्थर को दोष देता है,

कुछ कर नहीं पाता तो नसीब को दोष देता है !!

3)

मुश्किल राहे भी आसान हो जाती है,

हर राह पर पहेचान हो जाती है,

जो लोग मुस्कुरा के करते है सामना,

किस्मत उनकी गुलाम हो जाती है !!

4)

ए ईन्सान,

नसीब के लिखे पर शिकवा न कर,

तू अभी इतना समझदार नहीं हुआ है

की ऊपर वाले के इरादे समझ सके !!

5)

जिन्दगी तस्वीर भी है और तक़दीर भी,

फर्क तो सिर्फ रंगों का होता है,

मनचाहे रंगों से बने तो तस्वीर,

और अनजाने रंगों से बने तो तकदीर !!




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गरीब की ट्रेन में यात्रा


जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई,

एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़।

दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था।

जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है।

टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।

" ये जनरल टिकट है।
अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना।
वरना आठ सौ की रसीद बनेगी।"
कह टीसी आगे चला गया।

पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे।

सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे।

बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे।

लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे।

" साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी।"

टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा।

" सौ में कुछ नहीं होता।आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ।"

" आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।

गरीब लोग हैं, जाने दो न साब।" अबकि बार पत्नी ने कहा।

" तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो।एक की रसीद बना देता हूँ, दोनों बैठे रहो।"

" ये लो साब, रसीद रहने दो।दो सौ रुपये बढ़ाते हुए आदमी बोला।

" नहीं-नहीं रसीद दो बनानी ही पड़ेगी। ऊपर से आर्डर है।रसीद तो बनेगी ही।

चलो, जल्दी चार सौ निकालो।वरना स्टेशन आ रहा है, उतरकर जनरल बोगी में चले जाओ।"

इस बार कुछ डांटते हुए टीसी बोला।

आदमी ने चार सौ रुपए ऐसे दिए मानो अपना कलेजा निकालकर दे रहा हो।

दोनों पति-पत्नी उदास रुआंसे
ऐसे बैठे थे ,
मानो नाती के पैदा होने पर नहीं उसके शोक  में जा रहे हो।

कैसे एडजस्ट करेंगे ये चार सौ रुपए?

क्या वापसी की टिकट के लिए समधी से पैसे मांगना होगा?

नहीं-नहीं।

आखिर में पति बोला- " सौ- डेढ़ सौ तो मैं ज्यादा लाया ही था।

गुड्डो के घर पैदल ही चलेंगे।

शाम को खाना नहीं खायेंगे।
दो सौ तो एडजस्ट हो गए।
और हाँ, आते वक्त पैसिंजर से आयेंगे।
सौ रूपए बचेंगे।
एक दिन जरूर ज्यादा लगेगा।
सेठ भी चिल्लायेगा।
मगर मुन्ने के लिए सब सह लूंगा।
मगर फिर भी ये तो तीन सौ ही हुए।"

" ऐसा करते हैं,
नाना-नानी की तरफ से जो हम सौ-सौ देनेवाले थे न,
अब दोनों मिलकर सौ देंगे।
हम अलग थोड़े ही हैं।
हो गए न चार सौ एडजस्ट।"

पत्नी के कहा।
" मगर मुन्ने के कम करना....""

और पति की आँख छलक पड़ी।

" मन क्यूँ भारी करते हो जी। गुड्डो जब मुन्ना को लेकर घर आयेंगी; तब दो सौ ज्यादा दे देंगे। "

कहते हुए उसकी आँख भी छलक उठी।
फिर आँख पोंछते हुए बोली-

" अगर मुझे कहीं मोदीजी मिले तो कहूंगी-"

इतने पैसों की बुलेट ट्रेन चलाने के बजाय,

इतने पैसों से हर ट्रेन में चार-चार जनरल बोगी लगा दो,

जिससे न तो हम जैसों को टिकट होते हुए भी जलील होना पड़े और
ना ही हमारे मुन्ने के सौ रुपये कम हो।"

उसकी आँख फिर छलक पड़ी।

" अरी पगली, हम गरीब आदमी हैं,
हमें वोट देने का तो अधिकार है,
पर सलाह देने का नहीं। रो मत।

विनम्र प्रार्थना है
जो भी इस कहानी को पढ़ चूका है उसे इस घटना से शायद ही इत्तिफ़ाक़ हो पर अगर ये कहानी शेयर करे ,
कॉपी पेस्ट करे ,
पर रुकने न दे

शायद रेल मंत्रालय जनरल बोगी की भी परिस्थितियों को समझ सके।

उसमे सफर करने वाला एक गरीब तबका है
जिसका शोषण चिर कालीन से होता आया है।

   एक कोशिश परिवर्तन की ओर
                   ....... 😭😭😢😢

मेरा घर

1)
तलाशी लि मैने कई बार बङे इतमिनान से अपने ही घर कि...

फिर भी असफल रहा ढुंढने मे गम और सभी समस्याए अपने मा बाप कि....

2)
जब मैंने अपने आप को दुनिया की भीड़ में खोया,

तब बैठ के एक कोने में मेरी मां और
मेरे घर की याद में रोया...

3)
ए मेरे दोस्तों

जब इंसान दुनिया से थक हार जाता है,,,

तब उसे अपना घर बहुत याद आता है ।।ःः

4)

मां बाप के गुजरने पर ही समझ मै समझ पाया,

कि वीरान है मेरा घर और फिजूल है सब मोह माया ।।।

5)

दूसरों के घर में आग लगाने वालों से कह दो
चिंगारी का खेल बुरा होता है

औरों का घर उजाड़ने वाला सपना सदा अपने ही घर में खरा होता है



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