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Thursday, July 11, 2019

जन्मदिन मुबारक हो प्रिय

सुनो....

ज्यादा कुछ नहीं चाहिए मुझे आपसे

बस इतना सा दे देना..

कभी रो दूं तो रुमाल तुम्हारा,

कभी परेशान हो जाऊं तो ख्याल तुम्हारा,

मुझे कहना हो बहुत कुछ तो जरा सा वक्त तुम्हारा,

थक जाऊं कभी तो बाहों का सहारा तुम्हारा,

अभी जाना पड़े दूर तो मैं साथ हूं ना ईतना सा आंखों का इशारा तुम्हारा।।।।।

जन्मदिन मुबारक हो प्रिय🌹🍫😍👫

जिंदगी

1)
वक्त के हाथ नहीं होते..

लेकिन कभी कभी वो ऐसा थप्पड़ मारती हैं
जो पूरी उम्र याद रहता है ।।।।

2)

जिन्दगी जब भी रुलाने लगे,

आप इतने मुस्कुराओ की दर्द भी शरमाने लगे,

निकले ना आंसू कभी आपकी आँखों से,

और किस्मत भी मजबूर होकर आपको हंसाने लगे !!

3)

जीवन जीना हो तो दर्पण की तरह जियो,

जिसमे स्वागत सभी का हो

लेकिन संग्रह किसीका नहीं !!

4)
अच्छे लोगो का हमारी जिन्दगी में

आना हमारी किस्मत होती है,

और उन्हें संभालकर रखना हमारा हुनर !!

5)

जीवन में जोखिम उठाना आवश्यक है,

जीतने पर आप नेतृत्व करते है और,

हारने पर आप दूसरों को दिशा दिखा सकते है !!

Tuesday, July 9, 2019

जैसे कर्म वैसे फल

दोस्तों यह कहानी एक ऐसे परिवार की है जिसमें एक बूढ़ी मां अपने बेटे के साथ रहती थी।।

मां अपने बेटे से बहुत प्यार करती थी बस बेटा अपनी मस्ती में मस्त रहता था और अपनी मां का कुछ भी ख्याल नहीं रखता था उसकी हर एक बात को टाल देता था

थोड़े ही दिनों बाद उसकी शादी हो गई
तब शादी की सुहागसेज पर बैठी एक स्त्री का पति जब भोजन की थाल लेकर अंदर आया....

तो पूरा कमरा उस स्वादिष्ट भोजन की खुशबू से भर गया।

तब उस स्त्री ने अपने पति से निवेदन किया कि
मांजी को भी यही बुला लेते तो हम तीनों साथ बैठ कर भोजन करते।

पति ने कहा छोड़ो उन्हें वो कहा कर सो गई होगी आओ।।।

हम साथ मे भोजन करते है ।।।
प्यार से... उस स्त्री ने पुनः अपने पति से
कहा कि नही मैंने उन्हें खाते हुए
नही देखा है,

तो पति ने जवाब  दिया कि क्यो तुम जिद कर रही हो
शादी के कार्यो से थक गयी होगी  इस लिए सो गई होगी,

नींद टूटेगी तो खुद भोजन कर लेगी।
तुम आओ हम प्यार से  खाना खाते है।

उस स्त्री ने तुरंत तलाक लेने का फैसला कर लिया औऱ तलाक लेकर उसने दूसरी शादी कर ली

औऱ
इधर उसके पहले पति ने भी
दूसरी शादी कर ली।

दोनों अलग अलग सुखी घर-गृहस्ती
बसा कर खुशी-खुशी रहने लगे।

इधर उस स्त्री को दो बच्चे हुए
जो बहुत ही सुशील औऱ आज्ञाकारी
थे।

जब वह स्त्री 60 वर्ष की हुई
तो वह बेटो को बोली,में चारो धाम
की यात्रा करना चाहती हूँ ताकि तुम्हारे
सुख मय जीवन की प्रार्थना कर सकूं।

बेटे तुरंत अपनी माँ को लेकर
चारो धाम की यात्रा पर निकल गये।

एक जगह तीनो माँ बेटे भोजन के
लिए रुके औऱ बेटे भोजन परोस कर
माँ से खाने की विनती करने लगे।

उसी समय उस स्त्री की नजर सामने एक फटेहाल, भूखे औऱ गंदे से वृद्ध पुरुष पर पड़ी जो इस
स्त्री के भोजन और बेटों की तरफ बहुत ही कातर नजर से देख रहा था।

उस स्त्री को उस पर दया आ गई.औऱ बेटो को बोली जाओ पहले उस वृद्ध को नहलाओ औऱ उसे वस्त्र दो फिर हम सब मिल कर भोजन करेंगे।

बेटे जब उस वृद्ध को नहला कर कपड़े पहना कर उस स्त्री के सामने लाये तो वह स्त्री आश्चर्य चकित रह गयी,

वह वृद्ध वही था जिससे उसने शादी की सुहाग रात को ही तलाक ले लिया था।

उसने उससे पूछा कि  क्या हो गया जो तुम्हारी हालत इतनी दयनीय हो गई,

उस वृद्ध ने नजर झुका कर कहा कि सब कुछ होते भी मेरे बच्चे मुझे भोजन नही देते थे

मेरा तिरस्कार करते थे मुझे घर से बाहर निकल दिया।

उस स्त्री ने उस वृद्ध से कहा कि इस बात का अंदाजा तो मुझे तुम्हारे साथ सुहाग रात को ही लग
गया था ।।।

जब तुमने पहले अपनी बूढ़ी माँ को भोजन कराने की बजाय उस स्वादिष्ट भोजन का थाल लेकर
मेरे कमरे में आ गए थे,

औऱ मेरे बार-बार कहने के बावजूद भी आप
ने अपनी माँ का तिरस्कार किया।
उसी का फल आज आप भोग रहे है।

*जैसा व्यहवार हम अपने*
*बुजुर्गो के साथ करेंगे उसी*
*को देख कर हमारे बच्चों में भी*
*यह अवगुण आता है कि शायद*
*यही परम्परा होती है।*
🌞

*सदैव माँ-बाप की सेवा ही*
*हमारा दायित्व बनता है।*
*जिस घर मे माँ-बाप हँसते है*
*वही प्रभु बसते है।*

जिंदगी

1)
मौत तो बेखबर साथी है हर इंसान का,

राह में चलते-चलते कब मुलाकात हो जाये कौन जाने !!

2)

ये नक़ाब तुम्हारे झुठ का उतरेगा जिस दिन,

खुद से नज़रें मिलाने को तरसोगे उस दिन !!

3)
हुनर तो सब में होता है, बस फर्क इतना है,

किसी का छिप जाता है, किसी का छप जाता है !!

4)
ये तो ख्वाहिशे है जो उम्र भर सुलगती है,

वरना जिस्म तो दो पल में राख़ हो जाता है !!

5)

सिर्फ आसमान छू लेना ही कामयाबी नहीं है,

असली कामयाबी तो वह की आसमान भी छू लो

और पांव भी जमीं पर हो !!

एक पिता कि सिख

दोस्तों आज एक ऐसी कहानी लेकर आया हूं जिसमें एक पिता अपने बच्ची को किस प्रकार सीख देता है और अपने बच्चे का मन में दूसरों को प्रति आदर भाव पैदा करता है ।।।

एक छोटे से कस्बे में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर रहते थे जिनकी एक लड़की थी,
जिसका नाम था अन्जली,

थोड़े ही दिनों बाद अन्जली का विवाह हुआ और वह अपने पति और सास ससुर के साथ अपने ससुराल में रहने लगी।

कुछ ही दिनों बाद अन्जली को आभास होने लगा कि उसकी सास के साथ बात नहीं बैठ रही है ।
सास पुराने ख़यालों की थी "हर बात में टोकना उसकी आदत थी"
और
बहू नए विचारों वाली "जिसको दूसरों की टोका टोकी बिल्कुल पसंद नहीं थी"
अन्जली और उसकी सास का आये दिन झगडा होने लगा।
दिन बीते, महीने बीते, साल भी बीत गया,
न तो सास टीका-टिप्पणी करना छोड़ती
और
न अन्जली जवाब देना।
हालात बद से बदतर होने लगे। 


अन्जली को अब अपनी सास से पूरी तरह नफरत हो चुकी थी.
अन्जली के लिए उस समय स्थिति और बुरी हो जाती जब उसे भारतीय परम्पराओं के अनुसार दूसरों के सामने अपनी सास को सम्मान देना पड़ता।
अब वह किसी भी तरह सास से छुटकारा पाने की सोचने लगी ।
एक दिन जब अन्जली का अपनी सास से झगडा हुआ और पति भी अपनी माँ का पक्ष लेने लगा तो वह नाराज़ होकर मायके चली आई।

अन्जली ने अपने पिता (जो आयुर्वेद के डॉक्टर थे) को रो-रो कर अपनी व्यथा पिता को सुनाई और
बोली –
“आप मुझे कोई जहरीली दवा दे दीजिये जो मैं जाकर उस बुढ़िया को पिला दूँ नहीं तो मैं अब ससुराल नहीं जाऊँगी…”
पिता ने शांत भाव से सारी बात सुनी और सारे मामले को समझते हुए अन्जली के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा –
“बेटी, अगर तुम अपनी सास को ज़हर खिला कर मार दोगी तो तुम्हें पुलिस पकड़ ले जाएगी और साथ ही मुझे भी क्योंकि वो ज़हर मैं तुम्हें दूंगा.
इसलिए ऐसा करना ठीक नहीं होगा.”
लेकिन अन्जली जिद पर अड़ गई – “आपको मुझे ज़हर देना ही होगा ….
अब मैं किसी भी कीमत पर उसका मुँह देखना नहीं चाहती !”
कुछ सोचकर पिता बोले – “ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी।
लेकिन मैं तुम्हें जेल जाते हुए भी नहीं देख सकता इसलिए जैसे मैं कहूँ वैसे तुम्हें करना होगा !
मंजूर हो तो बोलो ?”
अन्जली बोली - मंजूर है पर “क्या करना होगा ?”
पिता ने एक पुडिया में पाउडर बाँधकर अन्जली के हाथ में देते हुए कहा –
“तुम्हें इस पुडिया में जहर है  इसमे से सिर्फ एक चुटकी ज़हर रोज़ अपनी सास के भोजन में मिलाना है।
कम मात्रा होने से वह एकदम से नहीं मरेगी बल्कि धीरे-धीरे आंतरिक रूप से कमजोर होकर 5 से 6 महीनों में मर जाएगी.
लोग समझेंगे कि वह स्वाभाविक मौत से मर गई.”
पिता ने आगे कहा -“लेकिन तुम्हें बेहद सावधान रहना होगा ताकि तुम्हारे पति को बिलकुल भी शक न होने पाए वरना हम दोनों को जेल जाना पड़ेगा !
इसके लिए तुम आज के बाद अपनी सास से बिलकुल भी झगडा नहीं करोगी बल्कि उसकी सेवा करोगी।
यदि वह तुम पर कोई टीका टिप्पणी करती है तो तुम चुपचाप सुन लोगी, बिलकुल भी प्रत्युत्तर नहीं दोगी !
बोलो कर पाओगी ये सब ?”
अन्जली ने सोचा,
छ: महीनों की ही तो बात है, फिर तो छुटकारा मिल ही जाएगा.
उसने पिता की बात मान ली और ज़हर की पुडिया लेकर ससुराल चली आई.


ससुराल आते ही अगले ही दिन से अन्जली ने सास के भोजन में एक चुटकी ज़हर रोजाना मिलाना शुरू कर दिया।
साथ ही उसके प्रति अपना बर्ताव भी बदल लिया.
अब वह सास के किसी भी ताने का जवाब नहीं देती बल्कि क्रोध को पीकर मुस्कुराते हुए सुन लेती।
रोज़ उसके पैर दबाती और उसकी हर बात का ख़याल रखती।
सास से पूछ-पूछ कर उसकी पसंद का खाना बनाती, उसकी हर आज्ञा का पालन करती।
कुछ हफ्ते बीतते बीतते सास के स्वभाव में भी परिवर्तन आना शुरू हो गया.
बहू की ओर से अपने तानों का प्रत्युत्तर न पाकर उसके ताने अब कम हो चले थे बल्कि वह कभी कभी बहू की सेवा के बदले आशीष भी देने लगी थी।
धीरे-धीरे चार महीने बीत गए.
अन्जली नियमित रूप से सास को रोज़ एक चुटकी ज़हर देती आ रही थी।
किन्तु उस घर का माहौल अब एकदम से बदल चुका था।
सास बहू का झगडा पुरानी बात हो चुकी थी।
पहले जो सास अन्जली को गालियाँ देते नहीं थकती थी,
अब वही आस-पड़ोस वालों के आगे अन्जली की तारीफों के पुल बाँधने लगी थी।
बहू को साथ बिठाकर खाना खिलाती और सोने से पहले भी जब तक बहू से चार प्यार भरी बातें न कर ले, उसे नींद नही आती थी।
छठा महीना आते आते अन्जली को लगने लगा कि उसकी सास उसे बिलकुल अपनी बेटी की तरह मानने लगी हैं।
उसे भी अपनी सास में माँ की छवि नज़र आने लगी थी।
जब वह सोचती कि उसके दिए ज़हर से उसकी सास कुछ ही दिनों में मर जाएगी तो वह परेशान हो जाती थी।
झटपट एक दिन वह अपने पिता के घर दोबारा जा पहुंची और बोली – “पिताजी, मुझे उस ज़हर के असर को ख़त्म करने की दवा दीजिये क्योंकि अब मैं अपनी सास को मारना नहीं चाहती … !
वो बहुत अच्छी हैं और अब मैं उन्हें अपनी माँ की तरह चाहने लगी हूँ!”
पिता नाटक करते हुए आश्चर्यचकित होकर बोले – “ज़हर ? कैसा ज़हर ?
अन्जली बोली वही जो 5-6 महीने पहले मैं आपसे लेकर गई थी और अपनी सास को रोज एक चुटकी देती थी।।।
तो पिता बोले नहीं बेटी मैं उस जहर का असर खत्म करना नहीं चाहता हूं।।।
अंजली रोते हुए बोली नहीं पिताजी मेरे को मेरी गलती का एहसास हो गया मेरी सांस बहुत अच्छी है मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं आप मेरी सास को बचा लो।।।
तो पिता ठहाके मारकर हँस पड़े और बोले
मैंने तो तुम्हें को ज़हर के नाम पर हाजमे का चूर्ण दिया था … हा हा हा !!!”






इस पर अंजली रोते-रोते मुस्कुरा पड़ी और अपने पिता से लिपट कर बोली धन्यवाद पिताजी आपने अपने पिता होने का पूरा फर्ज अदा किया और अपनी बेटी को सही रास्ता दिखाया नहीं तो मैं अपनी मां जैसी सास को देती।।
तो सज्जनों आप भी अपने बच्चियों को सही रास्ता दिखाएं 

आपकी लड़की चाहे तो अपने ससुराल को स्वर्ग बना सकती है
और चाहे तो नर्क भी।।

"बेटी को सही रास्ता दिखाये,
माँ बाप का पूर्ण फर्ज अदा करे"