दोस्तों आज मैं एक ऐसी कहानी लेकर आया हूं जिसमें लड़की के मायके वालों का क्या योगदान होता है जो लड़की की जिंदगी ओर उसके ससुराल को खुशहाल बनाने में मदद कर सकता है।।।
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एक लड़की थी जो खुले विचारों की और आजाद रहने की आदी थी,
उसकी शादी एक ऐसे परिवार में हो गई थी जहां संस्कार मान मर्यादा को ज्यादा महत्व दिया जाता था !
इसलिए उस लड़की की अपने सास के साथ और बाकी परिवार वालों के साथ ज्यादा नहीं बनती थी !
उसका पति मां का साथ देता था उसके लिए कई बार अपने पति से भी नाराज रहती थी !
दूसरी ओर उस लड़की के भाई की पत्नी कि बातें सुनकर वह परेशानी होती थी कि उसके मायके वालों ने तो उनकी बहु को इतनी इजाजत क्यूं दे रखी है तो मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है!
1 दिन बाद बात कुछ ज्यादा बढ़ने से वह ससुराल छोड़कर अपने मायके आ गई!
घर आने पर मां ने कारण पूछा तो उसने बताया कि वह वह मेरे को उनकी मर्जी के हिसाब से रखना चाहते हैं
तुम तो भाभी को उनकी मर्जी से जिंदगी जीने देती हो पर मेरे को ऐसा कुछ करने से रोका जा रहा है,
मां ने पूरी बात सुनी और अपनी बच्ची को समझाते हुए कहा कि
तुम्हारी भाभी मैं और तुम्हारे में बहुत अंतर है!
तो बेटी तुनक कर बोली मां आप भी भाभी की ही साइड ले रहे हो मेरा तो कोई नहीं है इस दुनिया में!
मैं भी वही सारे काम करती हूं जो भाभी करती है तो फिर अंतर किस बात का!
मां बोली मानती हूं
जो काम तेरी भाभी करती है तू भी वही सारे काम करती है,
पर फर्क सिर्फ इस बात का है कि तू दुखी होकर काम करती है और वह खुश होकर!
तो अपने काम को बोझ समझकर करती है और वह है उसको जिम्मेदारी समझकर करती है!
तो बेटी बोली,
ऐसा कुछ नहीं है मां मैं भी खुश होकर ही काम करती हूं
वैसे है कहां भाभी !
अभी मिलकर सारी बात पता कर लेते हैं
तो मां प्यार से बोली अभी तो वह है बाहर गई हुई है अपनी सहेलियों से मिलने,
बेटी बोली मां आपने अपनी बहू को सर पर चढ़ा के रखा है
क्या रोज रोज इधर-उधर मिलने जाना घर पर नहीं रह सकती क्या जैसी मे रहती हूं
मां मुस्कुराते हुए बोली
तू एक काम कर आज यहीं रुक और सिर्फ देख वह कैसे काम करती है उससे कुछ भी मत बोलना.
थोड़ी देर बाद में उसकी भाभी आई और हंसते हुए उसका स्वागत करते हुए हालचाल पूछे थोड़ी बहुत बात की वह बोली मैं आपके लिए चाय नाश्ता बना कर लाती हूं
भाभी के जाने के बाद
मां ने बेटी से पूछा
कभी तुमने अपने ननद से इतने प्यार से बात की क्या?
तो बेटी बोली -
मैं तो बहुत अच्छी हूं इसके लिए भाभी ने प्यार से बात की,
पर मेरी ननद तो बहुत बुरी है मैं उसे कभी प्यार से बात नहीं करूंगी!
मां बोली
हां बेटा तू बहुत प्यारी है तभी कुछ देर पहले मेरे पास अपनी भाभी की तारीफ कर रही थी!
इस बात पर बेटी को गुस्सा आया बोली -
मां आप फिर से भाभी की साइड ले रहे हो!
थोड़ी देर में भाभी उनके लिए चाय नाश्ता लेकर आ गई और सभी ने प्यार से बातें करते करते चाय नाश्ता किया,
थोड़े समय बाद भाभी ने अपने सास से बोली
मां जी आज आपकी पसंद का कुछ नहीं बनेगा आज दीदी जो कहेगी वही बनायेंगे
तो बेटी बीच में बोली हमेशा क्या तू मम्मा से पूछकर बनाती है क्या?
तभी मां बोली हां बेटी यह हमेशा कुछ भी करने से पहले यह मुझसे एक बार सलाह जरूर लेती है,
तब बेटी खुशी खुशी भाभी को ऑर्डर लिखवाने लगी
यह भी बनाओ यह भी बनाओ और यह भी।
भाभी रसोई में चली जाती है
तो
मां बेटी को पूछती है
कभी तुम्हें अपनी सास को चाय तक के लिए पूछा है क्या
बेटी की खुशी अचानक गायब हो जाती हैं वह नजर झुका कर बोलती है
नहीं मां
तो मां बोली बेटी जब तुम को उनकी खुशी से लेना देना नहीं है तो उनको तेरी खुशी से क्या लेना देना।
तभी घर की डोरवेल बजती है
भाभी दरवाजा खोलने जाती है
और सामने अपने पति को देखें बोलती हे आज आपके लिए एक सरप्राइज है आंखें बंद करो
पति भी मुस्कुराते हुए बोला - कैसा सा सरप्राइज ?
भाभी बोलती हे आप आंखें तो बंद करो और अंदर आओ,
भाभी अपने पति को उनकी बहन के सामने खड़ा करके बोलती अभी आंखें खोलो,
पति आंखें खुलते ही अपनी बहन को सामने देखता है और खुशी से झूम उठता है
भाई बहन खुशी से गले मिलते है
तभी भाभी बोलती हे आप जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जाईये ।
मैं खाना लगा देती हूं
सभी साथ में बैठ के खाना खाएंगे,
भाई कमरे में जाता है भाभी रसोई में जाती है
तभी मां अपनी बेटी से उसी है क्या तूने कभी अपने पति का इस तरह खुश होकर स्वागत किया ?
बेटी मायूस होकर बोलती हे
सॉरी मां मैंने कभी ऐसा नहीं किया।
सभी साथ मिलकर खाना खाते है
और साथ में बैठकर हंसी खुशी बातें करते है ।
बेटा बोलता है चलो बहुत देर हो गई
अभी मैं सोने जाता हूं
आप लोग भी सो जाओ
सुबह मिलते हैं
भाभी बोली माजी मैं आपकी दवाई ला कर देती हूं आप दवाई लेकर की सोना।
दोनो के जाने के बाद
मा बेटी से बोली बता बेटी कभी तुमने अपने ससुराल वालों के साथ इतने प्यार से समय बिताया है
और कभी तूने अपनी सास का ख्याल रखा है
तब बेटी की आंखों से आंसू आ जाते है
नहीं मां मे ही गलत थी
तब भाभी अपनी सास को दवाई देती है दवाई लेने के बाद शुभ रात्रि बोल कर सोने चली जाती है
तब मां बेटी आपस बातें करती हैं
मां बोली
देख बेटी अगर तुमको अपनी बात मनवानी है तो पहले की बात माननी पड़ेगी
बेटी बोली
सही कह रहे हो मां आप
मां बोलती है
अब तू ही बता मैं तेरी भाभी को किसी भी चीज के लिए कैसे मना कर सकती हूं जब वह मेरे और मेरे परिवार के लिए इतना कुछ करती है।
अब पता चला ना तेरे को तेरे मैं और तेरी भाभी में कितना अंतर है
बेटी अपनी मां के गले मिलते हुए बोली
मां आज आपने मेरी आंखें खोल दी अगर आप मेरा साथ दो मेरी जिंदगी कभी नहीं बदलती।
तब मा बोली
आज मुझसे इक वादा कर कभी भी अपने ससुराल की शिकायत अपने मायके लेकर नहीं आएगी।।।
बेटी बोलीमैं आपसे वादा करती हूं आज के बाद मैं अपने ससुराल की कोई भी शिकायत लेकर कहां नहीं आऊंगी।
और अपने ससुराल को ससुराल नहीं अपना परिवार मानुंगी।
इस कहानी से इतना ही कहना चाहता हूं दोस्तों की अपनी बेटी को कभी उसके ससुराल वालों के खिलाफ भड़काओ मत। ।
हो सके तो उसको प्यार से समझाओ जो उसकी जिंदगी के लिए जो अच्छे वही उसको बताओ।।।
वो कहते हैं ना कि एक मां चाहे तो अपने बेटी के ससुराल को स्वर्ग बना सकती है और चाहे तो नरक भी बना सकती है।।।