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Thursday, July 11, 2019

स्कूल की यादें ( मुर्गा रूपी पनिशमेंट)

एक टीचर अपने स्टूडेंट को मुर्गा बनने की सजा दी,
तब उस टीचर और बच्चे के बीच जो वार्तालाप वह पढें और स्कूल के याद करें,,,,


टीचर बोला,
बनजा वहां मुर्गा तेरी गलती की सजा तो यही पाएगा,
तुझको जो बक्स दिया तो कोई होमवर्क करके नहीं लाएगा।



बच्चा मासूमियत से बोला,
बन तो जाऊंगा मुर्गा मैं गुरुदेव पर इस से आप कुछ ना पाओगे,
ना तो मैं अंडा दे पाऊंगा ना आप मुझको खा पाओगे।





तब टीचर बोला
रे नादान,
इस सजा से तेरी स्कूल के बच्चे यही सीख पायेंगे,
जो भी गलती करेंगे वो मुर्गा रूपी दंड पाएंगे।




बच्चा बोला,
इस बार गलती माफ करो गुरुदेव स्कूल में इज्जत नहीं बचा पाऊंगा,
वादा करता हूं गुरुदेव कल पक्का होमवर्क करके आऊंगा।






तब टीचर सीरियस होकर बोला,
इस इज्जत से क्या करेगा रे नादान प्यारे इन्हीं बातों के लिए एक दिन तू तरसेगा,
वादा है मेरा जब तू बड़ा हो जाएगा तो इन्हीं बातों को याद करके तेरी आंखों से नीर बरसेगा।





तब बच्चा अपनी सजा डालने के लिए टीचर की गंभीरता को देखते हुए बोला
मैं नादान परिंदा समझ नहीं पाया,
गुरुदेव जरा विस्तार से बताओ ना


तब टीचर बोला
अभी तक तुम इतना होशियार नहीं बन पाया, नादान परिंदे मेरे  जरा मुर्गा बन के तो दिखाओ ना।।।


 

 









जन्मदिन मुबारक हो प्रिय

सुनो....

ज्यादा कुछ नहीं चाहिए मुझे आपसे

बस इतना सा दे देना..

कभी रो दूं तो रुमाल तुम्हारा,

कभी परेशान हो जाऊं तो ख्याल तुम्हारा,

मुझे कहना हो बहुत कुछ तो जरा सा वक्त तुम्हारा,

थक जाऊं कभी तो बाहों का सहारा तुम्हारा,

अभी जाना पड़े दूर तो मैं साथ हूं ना ईतना सा आंखों का इशारा तुम्हारा।।।।।

जन्मदिन मुबारक हो प्रिय🌹🍫😍👫

जिंदगी

1)
वक्त के हाथ नहीं होते..

लेकिन कभी कभी वो ऐसा थप्पड़ मारती हैं
जो पूरी उम्र याद रहता है ।।।।

2)

जिन्दगी जब भी रुलाने लगे,

आप इतने मुस्कुराओ की दर्द भी शरमाने लगे,

निकले ना आंसू कभी आपकी आँखों से,

और किस्मत भी मजबूर होकर आपको हंसाने लगे !!

3)

जीवन जीना हो तो दर्पण की तरह जियो,

जिसमे स्वागत सभी का हो

लेकिन संग्रह किसीका नहीं !!

4)
अच्छे लोगो का हमारी जिन्दगी में

आना हमारी किस्मत होती है,

और उन्हें संभालकर रखना हमारा हुनर !!

5)

जीवन में जोखिम उठाना आवश्यक है,

जीतने पर आप नेतृत्व करते है और,

हारने पर आप दूसरों को दिशा दिखा सकते है !!

Tuesday, July 9, 2019

जैसे कर्म वैसे फल

दोस्तों यह कहानी एक ऐसे परिवार की है जिसमें एक बूढ़ी मां अपने बेटे के साथ रहती थी।।

मां अपने बेटे से बहुत प्यार करती थी बस बेटा अपनी मस्ती में मस्त रहता था और अपनी मां का कुछ भी ख्याल नहीं रखता था उसकी हर एक बात को टाल देता था

थोड़े ही दिनों बाद उसकी शादी हो गई
तब शादी की सुहागसेज पर बैठी एक स्त्री का पति जब भोजन की थाल लेकर अंदर आया....

तो पूरा कमरा उस स्वादिष्ट भोजन की खुशबू से भर गया।

तब उस स्त्री ने अपने पति से निवेदन किया कि
मांजी को भी यही बुला लेते तो हम तीनों साथ बैठ कर भोजन करते।

पति ने कहा छोड़ो उन्हें वो कहा कर सो गई होगी आओ।।।

हम साथ मे भोजन करते है ।।।
प्यार से... उस स्त्री ने पुनः अपने पति से
कहा कि नही मैंने उन्हें खाते हुए
नही देखा है,

तो पति ने जवाब  दिया कि क्यो तुम जिद कर रही हो
शादी के कार्यो से थक गयी होगी  इस लिए सो गई होगी,

नींद टूटेगी तो खुद भोजन कर लेगी।
तुम आओ हम प्यार से  खाना खाते है।

उस स्त्री ने तुरंत तलाक लेने का फैसला कर लिया औऱ तलाक लेकर उसने दूसरी शादी कर ली

औऱ
इधर उसके पहले पति ने भी
दूसरी शादी कर ली।

दोनों अलग अलग सुखी घर-गृहस्ती
बसा कर खुशी-खुशी रहने लगे।

इधर उस स्त्री को दो बच्चे हुए
जो बहुत ही सुशील औऱ आज्ञाकारी
थे।

जब वह स्त्री 60 वर्ष की हुई
तो वह बेटो को बोली,में चारो धाम
की यात्रा करना चाहती हूँ ताकि तुम्हारे
सुख मय जीवन की प्रार्थना कर सकूं।

बेटे तुरंत अपनी माँ को लेकर
चारो धाम की यात्रा पर निकल गये।

एक जगह तीनो माँ बेटे भोजन के
लिए रुके औऱ बेटे भोजन परोस कर
माँ से खाने की विनती करने लगे।

उसी समय उस स्त्री की नजर सामने एक फटेहाल, भूखे औऱ गंदे से वृद्ध पुरुष पर पड़ी जो इस
स्त्री के भोजन और बेटों की तरफ बहुत ही कातर नजर से देख रहा था।

उस स्त्री को उस पर दया आ गई.औऱ बेटो को बोली जाओ पहले उस वृद्ध को नहलाओ औऱ उसे वस्त्र दो फिर हम सब मिल कर भोजन करेंगे।

बेटे जब उस वृद्ध को नहला कर कपड़े पहना कर उस स्त्री के सामने लाये तो वह स्त्री आश्चर्य चकित रह गयी,

वह वृद्ध वही था जिससे उसने शादी की सुहाग रात को ही तलाक ले लिया था।

उसने उससे पूछा कि  क्या हो गया जो तुम्हारी हालत इतनी दयनीय हो गई,

उस वृद्ध ने नजर झुका कर कहा कि सब कुछ होते भी मेरे बच्चे मुझे भोजन नही देते थे

मेरा तिरस्कार करते थे मुझे घर से बाहर निकल दिया।

उस स्त्री ने उस वृद्ध से कहा कि इस बात का अंदाजा तो मुझे तुम्हारे साथ सुहाग रात को ही लग
गया था ।।।

जब तुमने पहले अपनी बूढ़ी माँ को भोजन कराने की बजाय उस स्वादिष्ट भोजन का थाल लेकर
मेरे कमरे में आ गए थे,

औऱ मेरे बार-बार कहने के बावजूद भी आप
ने अपनी माँ का तिरस्कार किया।
उसी का फल आज आप भोग रहे है।

*जैसा व्यहवार हम अपने*
*बुजुर्गो के साथ करेंगे उसी*
*को देख कर हमारे बच्चों में भी*
*यह अवगुण आता है कि शायद*
*यही परम्परा होती है।*
🌞

*सदैव माँ-बाप की सेवा ही*
*हमारा दायित्व बनता है।*
*जिस घर मे माँ-बाप हँसते है*
*वही प्रभु बसते है।*

जिंदगी

1)
मौत तो बेखबर साथी है हर इंसान का,

राह में चलते-चलते कब मुलाकात हो जाये कौन जाने !!

2)

ये नक़ाब तुम्हारे झुठ का उतरेगा जिस दिन,

खुद से नज़रें मिलाने को तरसोगे उस दिन !!

3)
हुनर तो सब में होता है, बस फर्क इतना है,

किसी का छिप जाता है, किसी का छप जाता है !!

4)
ये तो ख्वाहिशे है जो उम्र भर सुलगती है,

वरना जिस्म तो दो पल में राख़ हो जाता है !!

5)

सिर्फ आसमान छू लेना ही कामयाबी नहीं है,

असली कामयाबी तो वह की आसमान भी छू लो

और पांव भी जमीं पर हो !!