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Saturday, January 17, 2026

अपनी कहानी का हीरो

कहानियां सच कैसे 
होगी मेरे दोस्त,

क्योंकि अपनी 
कहानी में हर कोई 
हीरो होता है,,





कोई अपनी गलतियों को हालात बता देता है,
तो कोई अपनी हार को किस्मत।

सच बस वहीं दब जाता है,
जहाँ ज़िम्मेदारी उठाने का साहस चाहिए।

असल कहानी तब शुरू होती है
जब इंसान खुद से सवाल करता है,

और अपने ही किरदार को
कटघरे में खड़ा करने की हिम्मत रखता है।

वरना किरदार तो सबके शानदार हैं,
बस सच्चाई अक्सर
एडिटिंग टेबल पर ही कट जाती है।

फूलों पर इत्र

तारीफ के मोहताज 
नहीं होते हैं अच्छे लोग,

क्योंकि फूलों पर 
इत्र नहीं लगाया जाता।


उनकी खुशबू
खुद-ब-खुद हवाओं में घुल जाती है,

बिना शोर किए
अपनी मौजूदगी दर्ज करा जाती है।


जो सच्चे होते हैं,
उन्हें चमकने के लिए
किसी बाहरी रोशनी की ज़रूरत नहीं होती,

वे तो अंधेरों में भी
रास्ता दिखा देते हैं।

असल खूबसूरती
दिखावे से नहीं,
किरदार से पहचानी जाती है।

और अच्छे लोग…
बस मिलते हैं,
और दिल में उतर जाते हैं।

Friday, January 16, 2026

मुझे धोखेबाज मत कहना...

दूरियाँ बढ़ा रही हैं
तुम्हारी हरकतें,

अब अगर साथ छूट जाए,
तो धोखेबाज़ मत कहना,





हर बार समझौता
मैं ही करूँ—
ये भी तो ज़रूरी नहीं।

कुछ रिश्ते
अचानक नहीं टूटते,
उन्हें तो
लापरवाही
धीरे-धीरे
खत्म करती है।

Thursday, January 15, 2026

एक आख़िरी कोशिश

बाद में पछताने 
से पहले, 

क्यों ना एक लास्ट 
जी जान वाली 
कोशिश हो जाए,,


वह जानता था कि हालात उसके पक्ष में नहीं हैं।

डर था, 
असफलता का भी और 
लोगों की बातों का भी।

पर उससे बड़ा डर था—
बाद में पछताने का।

उसने सोचा,

“अगर हार ही जानी है,

तो पूरी ताक़त से क्यों न लड़ा जाए?”


क्योंकि अधूरी कोशिश
हार से ज़्यादा चुभती है।

इसलिए उसने तय किया—
डर के साथ ही सही,
पर एक आख़िरी जी-जान वाली 
कोशिश ज़रूर करेगा।

हार गया तो कहानी यहीं खत्म,
और जीत गया…
तो यही कहानी उसकी पहचान बन जाएगी।

Tuesday, January 13, 2026

मर्द का मोल

पैसों में मापा जाने 
लगा है मर्द का माल,

अब वह ज़रूरतों के लिए नहीं,
अपनी कीमत बचाने 
के लिए दौड़ रहा है,,




कभी मर्द की पहचान उसके संस्कार, मेहनत और ज़िम्मेदारी से होती थी।

आज उसकी पहचान उसकी सैलरी, स्टेटस और लाइफस्टाइल से जुड़ गई है।

समाज ने मर्द के लिए 
एक पैमाना तय कर दिया है।
कमाई और पैसा 

समाज और मर्द की बदलती पहचान :-

आज के समाज में 
मर्द से उम्मीद की जाती है 
कि वह हर हाल में मज़बूत रहे।

थकान, डर और असफलता 
उसके हिस्से नहीं माने जाते।

अगर वह रुक जाए, 
तो उसे नाकाम समझ लिया जाता है।

शायद यही कारण है कि 
मर्द अपनी ज़रूरत से ज़्यादा
अपनी इज़्ज़त के लिए कमाने लगा है।