कहानियां सच कैसे होगी मेरे दोस्त,
क्योंकि अपनी
कहानी में हर कोई
हीरो होता है,,
कोई अपनी गलतियों को हालात बता देता है,
तो कोई अपनी हार को किस्मत।
सच बस वहीं दब जाता है,
जहाँ ज़िम्मेदारी उठाने का साहस चाहिए।
असल कहानी तब शुरू होती है
जब इंसान खुद से सवाल करता है,
और अपने ही किरदार को
कटघरे में खड़ा करने की हिम्मत रखता है।
वरना किरदार तो सबके शानदार हैं,
बस सच्चाई अक्सर
एडिटिंग टेबल पर ही कट जाती है।