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Friday, January 16, 2026

मुझे धोखेबाज मत कहना...

दूरियाँ बढ़ा रही हैं
तुम्हारी हरकतें,

अब अगर साथ छूट जाए,
तो धोखेबाज़ मत कहना,





हर बार समझौता
मैं ही करूँ—
ये भी तो ज़रूरी नहीं।

कुछ रिश्ते
अचानक नहीं टूटते,
उन्हें तो
लापरवाही
धीरे-धीरे
खत्म करती है।

Thursday, January 15, 2026

एक आख़िरी कोशिश

बाद में पछताने 
से पहले, 

क्यों ना एक लास्ट 
जी जान वाली 
कोशिश हो जाए,,


वह जानता था कि हालात उसके पक्ष में नहीं हैं।

डर था, 
असफलता का भी और 
लोगों की बातों का भी।

पर उससे बड़ा डर था—
बाद में पछताने का।

उसने सोचा,

“अगर हार ही जानी है,

तो पूरी ताक़त से क्यों न लड़ा जाए?”


क्योंकि अधूरी कोशिश
हार से ज़्यादा चुभती है।

इसलिए उसने तय किया—
डर के साथ ही सही,
पर एक आख़िरी जी-जान वाली 
कोशिश ज़रूर करेगा।

हार गया तो कहानी यहीं खत्म,
और जीत गया…
तो यही कहानी उसकी पहचान बन जाएगी।

Tuesday, January 13, 2026

मर्द का मोल

पैसों में मापा जाने 
लगा है मर्द का माल,

अब वह ज़रूरतों के लिए नहीं,
अपनी कीमत बचाने 
के लिए दौड़ रहा है,,




कभी मर्द की पहचान उसके संस्कार, मेहनत और ज़िम्मेदारी से होती थी।

आज उसकी पहचान उसकी सैलरी, स्टेटस और लाइफस्टाइल से जुड़ गई है।

समाज ने मर्द के लिए 
एक पैमाना तय कर दिया है।
कमाई और पैसा 

समाज और मर्द की बदलती पहचान :-

आज के समाज में 
मर्द से उम्मीद की जाती है 
कि वह हर हाल में मज़बूत रहे।

थकान, डर और असफलता 
उसके हिस्से नहीं माने जाते।

अगर वह रुक जाए, 
तो उसे नाकाम समझ लिया जाता है।

शायद यही कारण है कि 
मर्द अपनी ज़रूरत से ज़्यादा
अपनी इज़्ज़त के लिए कमाने लगा है।


Monday, January 12, 2026

सब कुछ बदल जाता है

लोग अपनी औकात पर उतर आए   
यार भी घात पर उतर आए,
 
पहले मेरा हुनर खंगला   
फिर मेरी जात पर उतर आए,,



यह सिर्फ़ चार पंक्तियाँ नहीं,

बल्कि हमारे समाज का आईना हैं।


यहाँ इंसान की क़ीमत उसके हुनर से कम
और उसकी पहचान से ज़्यादा आँकी जाती है।

जब तक आप कामयाब नहीं होते,
लोग आपकी काबिलियत को परखते हैं।

और जैसे ही आप उनसे आगे निकलते हैं,
वे आपके नाम, आपकी जात,
और आपकी जड़ों पर सवाल उठाने लगते हैं।

सबसे अफ़सोस की बात तब होती है
जब अपने ही,
जो कभी कंधे से कंधा मिलाकर चले थे,
वही पीठ पीछे घात लगाने लगते हैं।


शायद यही ज़िंदगी का उसूल है—

हुनर रास्ता बनाता है,
और सोच बताती है
कि उस रास्ते पर
कौन साथ चलेगा
और कौन पत्थर फेंकेगा।

Sunday, January 11, 2026

संवाद

हो सके तो 
संवाद करना,

विवाद में किसी को 
क्या ही मिला है,,





इसलिए अब वह चुप है,

क्योंकि उसका हर जवाब 
एक नया विवाद बन जाता था।

फिर उसने बोलना नहीं, 
समझना चुना।

थोड़े शब्द,
थोड़ी खामोशी,

और बहुत-सी बात हो गई।