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Monday, January 12, 2026

सब कुछ बदल जाता है

लोग अपनी औकात पर उतर आए   
यार भी घात पर उतर आए,
 
पहले मेरा हुनर खंगला   
फिर मेरी जात पर उतर आए,,



यह सिर्फ़ चार पंक्तियाँ नहीं,

बल्कि हमारे समाज का आईना हैं।


यहाँ इंसान की क़ीमत उसके हुनर से कम
और उसकी पहचान से ज़्यादा आँकी जाती है।

जब तक आप कामयाब नहीं होते,
लोग आपकी काबिलियत को परखते हैं।

और जैसे ही आप उनसे आगे निकलते हैं,
वे आपके नाम, आपकी जात,
और आपकी जड़ों पर सवाल उठाने लगते हैं।

सबसे अफ़सोस की बात तब होती है
जब अपने ही,
जो कभी कंधे से कंधा मिलाकर चले थे,
वही पीठ पीछे घात लगाने लगते हैं।


शायद यही ज़िंदगी का उसूल है—

हुनर रास्ता बनाता है,
और सोच बताती है
कि उस रास्ते पर
कौन साथ चलेगा
और कौन पत्थर फेंकेगा।

Sunday, January 11, 2026

संवाद

हो सके तो 
संवाद करना,

विवाद में किसी को 
क्या ही मिला है,,





इसलिए अब वह चुप है,

क्योंकि उसका हर जवाब 
एक नया विवाद बन जाता था।

फिर उसने बोलना नहीं, 
समझना चुना।

थोड़े शब्द,
थोड़ी खामोशी,

और बहुत-सी बात हो गई।

Saturday, January 10, 2026

किरदार इतना खूबसूरत बनाना मेरे दोस्त…

किरदार इतना खूबसूरत 
बनाना मेरे दोस्त,

कि लोग छोड़ तो पाए…
पर भुला नहीं पाए।





मैंने रिश्तों में कभी शोर नहीं किया,

बस जैसा था
वैसा ही निभाया।

शायद यही मेरी गलती थी,
या शायद यही मेरी पहचान।


कुछ लोग साथ इसलिए नहीं चले
क्योंकि उनके रास्ते बदल गए थे,
मेरे कदम नहीं।

मैं वहीं खड़ा रहा
अपने उसूलों के साथ,
और वो आगे बढ़ गए
अपनी सहूलियतों के साथ।

वक़्त बीतता गया,
नाम यादों में धुंधला नहीं पड़ा,
क्योंकि किरदार
हालात से नहीं
नीयत से बनता है।

आज जब कभी मेरा ज़िक्र आता है,
तो लोग खामोश हो जाते हैं।

शायद इसलिए नहीं
कि मैं परफेक्ट था,
बल्कि इसलिए
कि मैं नकली नहीं था।

और यही सच्चाई है—

किरदार अगर साफ़ हो,
तो लोग छोड़ सकते हैं,
मगर भुला नहीं पाते।

Friday, January 9, 2026

तमाशा मत बना

जब सहना खुद 
को ही है तो, 

तमाशा करके 
भागीदार क्यों बनाना,,


इस लेख की सबसे बड़ी सीख यह है कि

हर दर्द को सबके सामने रखना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ लड़ाइयाँ ऐसी होती हैं

जो अकेले लड़ी जाएँ
तो इंसान को कमज़ोर नहीं,
बल्कि मजबूत बना देती हैं।

जब हम हर बात का तमाशा बना देते हैं,
तो दर्द कम नहीं होता,
बस दर्शक बढ़ जाते हैं।
खामोशी कमजोरी नहीं है,

यह आत्म-सम्मान का चुनाव भी हो सकती है।

Thursday, January 8, 2026

ठोकरें हैं जहर थोड़ी ही है

ए मंजिल 
एक ना एक दिन 
तुझे जरूर पाऊंगा, 

ठोकरें है जहर
थोड़े ही है जो 
मर जाऊंगा,,




✍️ वास्तविक जीवन से जुड़ाव :

हर सफल व्यक्ति के जीवन में
ऐसा दौर ज़रूर आया है
जब हालात ज़हर जैसे लगे हों।

लेकिन उन्हीं हालातों ने
उन्हें मज़बूत बनाया,

और मंज़िल तक पहुँचाया।


🔚 निष्कर्ष (Conclusion):

मंज़िल उन लोगों को मिलती है
जो ठोकरों को वजह नहीं,
सीढ़ी बना लेते हैं।

अगर इरादा मज़बूत हो,
तो ज़हर भी
हौसले के सामने
बेअसर हो जाता है।