नाराजगी नहीं थी
बस बात यह थी कि,
उसका रूठने का मूड था
और मेरा चुप रहने का,,
लोग खुले दरवाजों के बजाय,
दरारों से झांकना
पसंद करते हैं,,
और कितना संवारू तुझे यह ऐ जिंदगी,
जितना संवारता हूं
उतना ही बिखरती हो,,
माना पैसा सब कुछ नहीं होता है,
पर यकीन मानो
पैसा बहुत कुछ
होता है,,
संघर्षों से डरे हुए अकेलेपन की सीढ़ी है हम,
मुस्कुराते हुए चेहरे
वाली उदास पीढ़ी है हम,,