अब क्या बेचूं ऐ फुर्सत
तुझे पाने को,
खुद तक को खर्च
कर दिया जिम्मेदारियां
निभाने में,,
जो समझता है
वह भी,
समझ समझ कर
थक जाता है,,
दर पर पड़ी बाप की चप्पल,
यह भी एक अलग ही
गुरुर है,,
स्वार्थ आज लोग मौत पर
भी इसलिए जाते हैं,
कि लोग कल उनकी
मौत पर भी आयें,,
जब मेरी बारी आयेगी
तब मैं उन सब को
बताऊंगा कि,
कब, कहां और
कितना बुरा लगा था,,