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Saturday, December 27, 2025

चाय की दुकान

कमाना शुरू किया 
तब पता चला,

लड़के देर तक
चाय की दुकानों 
पर क्यों बैठते हैं,,


Friday, December 26, 2025

सबकुछ

हमने तो आपको 
अपना सबकुछ माना,

पर अफसोस सबको 
सबकुछ कहां मिलता है,,




Thursday, December 25, 2025

मनचाहा बोलना

मनचाहा 
बोलना‌ है तो,

अनचाहा 
सुनने की ताकत पालो,,


दुनियादारी

धीरे-धीरे दुनियादारी 
सीखी है हमने भी,

वरना पहले तो हर 
कसम खाने वाला 
सच्चा लगता था,,

मुस्कुराना पड़ रहा है


मुस्कुरा रहे हो 
तो बढ़िया है,

मसाला तो तब है 
जब मुस्कुराना 
पङ रहा है,