तुझे बूंद सा ना पाकर भी,
समंदर सा खोने का
डर क्यों लगा रहता है,,
खामोश रहना भी
वही सीखते हैं,
जिससे सबसे
ज्यादा बातें की है,,
पैसा बुरा नहीं
होता है जनाब,
पैसों की कमी ही
बहुत बुरी होती है,,
जब मरने वाला अपना होता है ना,
तो शमशान में भी
डर नहीं लगता है,,
यह वह दौर है जनाब
जहां लोग
बातों को पड़कर
इंसान को छोड़ देते हैं,,