छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था
एक नाई एक बढ़ई और एक लोहार था
1-
रात होते ही दादी की कहानियां सुनते
पहले कहां टेलीविजन और अखबार था
मुल्तानी मिट्टी से तालाब में नहा लेते थे
साबुन और स्विमिंग पूल सब बेकार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
2-
कभी खो-खो तो कभी कबड्डी खेल लेते
हमको कहां तब क्रिकेट का खुमार था
घड़े को कस के तबले की तरह बजाता
गोपी भैया अपना पूरा संगीतकार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
3-
दो मिनट की मैगी ना पांच मिनट का पास्ता
कच्चे चूल्हे पर गेहूं का दलिया तैयार था
पिता के नाम से सब जानते थे हमें
तब पहले कहां पेन और आधार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
4-
फेसबुक ना व्हाट्सएप ना ही मोबाइल था
कागजों की चिट्ठी में एक दूसरे का प्यार था
ना बर्गर ना पिज़्ज़ा ना चाऊमीन सॉस था
गेहूं की रोटी थी और आम का अचार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
5-
बस न कार और ना ही मोटरसाइकिल
बैल की गाड़ी पर हर आदमी सवार था
अकरम के मामू हो या गोलू के फूफा जी
पराया मेहमान भी अपना रिश्तेदार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
6-
गेरू और गोबर वाले मकानों की खुशबू
उसके आगे एशियन पेंट भी बेकार था
कोर्ट ना कचहरी ना ही थाना दफ्तर
गांव का हर एक सरपंच समझदार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
7-
ना मॉल थे और ना ही कोई शोरूम था
अनाज मंडी और सब्जी का बाजार था
ना कंक्रीट की छत थी ना टीन की चादरें
घास फूस का बंगला बहुत ही दमदार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
8-
गांव के बुजुर्ग बैठकर समझौता कर लेते
किसी की सरकार नही न कोई सरकार था
ना दिल्ली कंपनी और न सूरत की फैक्ट्री
खेती की मजदूरी ही सब का व्यापार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
9-
चौपाल की हंसी भी कभी कम ना हुई
बेशक गरीब ,मजदूर और बेरोजगार था
मक्के की रोटी थी और चने का साग था
हर रात दिवाली और हर दिन त्यौहार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..
10-
शहर ने नौकरी दी लेकिन नाम छीन लिया
दीवान जी कहते अब पहले फलाण जी था
सिटी में सुविधा है पर गांव में सुकून है
अब शहरी बाबू हूं पहले गांव का गवार था
छोटा सा गांव मेरा पूरा बिग बाजार था..