Labels

Sunday, March 29, 2020

कोराना



बेवजह घर से निकलने की ज़रूरत क्या है |
मौत से आंख मिलाने की ज़रूरत क्या है |

सबको मालूम है बाहर की हवा है क़ातिल |
यूँ ही क़ातिल से उलझने की ज़रूरत क्या है ||

ज़िन्दगी एक नियामत है, इसे सम्हाल के रख |
श्मशानों को सजाने की ज़रूरत क्या है ||

दिल बहलने के लिए घर मे वजह हैँ काफ़ी |
यूँ ही गलियों मे भटकने की ज़रूरत क्या है ||

Friday, March 6, 2020

आप खुद

थोड़ा सा छुप छुप कर
अपने लिए भी जी लिया करो, 


कोई नही कहेगा कि
थक गए ही आराम कर लो,, 


*****************************************


अगर आप हार नही मानते है, 

तो आपकी यही जिद 

आपको एक दिन सफल बना के रहेगी,, 


*****************************************


खुद के ऊपर विश्वास रखो साहब, 

फिर देखना एक दिन ऐसा आएगा कि 

घड़ी दुसरो की होगी और समय आपका,, 


*****************************************


खुद के सपनो के पीछे इतना भागो कि 

एक दिन तुम्हे पाना लोगो के लिए
सपना बन जाये,, 


*****************************************


यह इस दुनिया का उसूल सा बन गया है कि

कुछ लोग आपसे सीखकर 

आप ही को सिखाने लगते है..


*****************************************


कृपया मेरे ब्लॉग को लाइक करें शेयर करें और सुझाव   कमेंट करें ।।।।
Please like comment and share my blog...

If you have any suggestions then plz suggest me...

🅱️ www.bestvichar.com


Thursday, March 5, 2020

"करोना" प्रकृति की शक्ति का अंश मात्र

एक करोना वायरस के आगे 150 करोड़ की आबादी वाला चीन अपने ही घर में बंदी बन गया है,

सारे रास्ते वीरान हो गए हैं,चीन के राष्ट्रपति तक भूमिगत हो गए हैं।

एक सूक्ष्म सा जंतु और दुनियाँ को आँखे दिखाने वाला चीन एकदम शांत,भयभीत।

केवल चीन ही क्यों?

सारे विश्व को एक पल में शांत करने की ताकत प्रकृति में है!

हम जातपात,धर्म भेद,वर्ण भेद,प्रांत वाद के अहंकार से भरे हुए हैं।

यह गर्व 
यह घमंड 
करोना ने मात्र एक झटके में उतार दिया,
बिना किसी भी प्रकार का भेद रखे सारे चीन को बंदिस्त करके रख दिया है,

नौबत यहां तक आ गई है कि
चीन का राष्ट्रपति भूमिगत रहते हुए ही अपने ही बीस हजार लोगों को मौत के घाट उतार देने की भाषा बोलने लगा।

इस संसार का कोई भी जीव इस प्रकृति के आगे बेबस है,
लाचार है

प्रकृति ने शायद
यही संदेश दिया है;
प्यार से रहो,जियो और जीने दो!

अन्यथा सुनामी है,
करोना है,
रीना है,
टीना है;

लेकिन इसके बावजूद अगर,
जीना है तो प्यार से

इंसान को कभी भी अपने वक़्त पर घमंड नहीं करना चाहिए,

क्योंकि वक़्त तो उन नोटों का भी नहीं हुआ,
जो कभी पूरा बाजार खरीदने की ताकत रखते थे!
   

ज़िन्दगी है साहब,
छोड़कर चली जाएगी;
मेज़ पर होगी तस्वीर,
कुर्सी खाली रह जाएगी।


फिर भी यह एक कङवा सच है कि 

कोरोना के 29 मरीज 
और 
पूरा भारत मास्क लगा के घूमेगा , 

प्रतिदिन 13 हजार मरते हैं 

सडक हादसे मे लेकिन हेल्मेट 
कोई नही लगायेगा

फैशन की बात है....


.......................................................................

कृपया मेरे ब्लॉग को लाइक करें शेयर करें और सुझाव   कमेंट करें ।।।।
Please like comment and share my blog...

If you have any suggestions then plz suggest me...

🅱️ www.bestvichar.com


Wednesday, March 4, 2020

पानी का स्वाद

"" आज का सुविचारित ""

कौन कहता है कि पानी का स्वाद नहीं होता है, 
बस प्यास को अपने चरम पर पहुंचा कर तो देखो,, 




वैसे ही जो कहते हैं कि सफलता नहीं मिलती, 
बस आप अपने प्रयासों को अपने चरम पर पहुंचा कर तो देखो,, 



.................................................................

कृपया मेरे ब्लॉग को लाइक करें शेयर करें और सुझाव   कमेंट करें ।।।।
Please like comment and share my blog...

If you have any suggestions then plz suggest me...

🅱️ www.bestvichar.com

Tuesday, March 3, 2020

शांति सुख की जननी है

शांति सुख की जननी है
.
.
.

एक बार एक किसान था, 
.

जिसने अपनी घड़ी चारे से भरे हुए बाड़े में खो दी थी। 

वह घड़ी बहुत कीमती थी, 
इसलिए किसान ने उसकी बहुत खोज बीन की पर वह घड़ी नहीं मिली।

बाहर कुछ बच्चे खेल रहे थे और किसान को दूसरा काम भी था, 
उसने सोचा क्यों न मैं इन बच्चो से घड़ी को खोजने के लिए कहूँ । 

उसने बच्चों से कहा 
की जो भी बच्चा उसे घड़ी खोजकर देगा 
उसे वह अच्छा इनाम देगा।

यह सुनकर बच्चे ईनाम के लालच में बाड़े के अन्दर दौड़कर गए और यहाँ वहाँ घड़ी ढूँढने लगे।

 लेकिन किसी भी बच्चे को घड़ी नहीं मिली। 

तब एक बच्चे ने किसान के पास जाकर कहा कि वह घड़ी खोजकर ला सकता है
पर सारे बच्चों को बाड़े से बाहर करना होगा। 
किसान ने उसकी बात मान ली । 

किसान और बाकी सभी बच्चे बाड़े के बाहर चले गए  । 

कुछ देर बाद बच्चा लौट आया और 
वह कीमती घड़ी उसके हाथ में थी।

किसान अपनी घड़ी देखकर बहुत खुश और आश्चर्यचकित हो गया ।

उसने बच्चे से पूछा 
“तुमने घड़ी किस तरह खोजी"

जबकि बाकी बच्चे और मैं खुद भी इस काम में नाकाम हो चुका था !

बच्चे ने जवाब दिया “मैंने कुछ नहीं किया, 

बस शान्त मन से ज़मीन पर बैठ गया 

और घड़ी के आवाज़ सुनने के कोशिश करने लगा, 

क्योंकि बाड़े में शान्ति थी., 

इसलिए मैने उसकी आवाज़ सुन ली और उसी दिशा में देखा !”


शिक्षा:-
एक शान्त दिमाग बेहतर सोच सकता है, 
एक थके हुए दिमाग की तुलना में!

दिन में कुछ समय के लिए, 
आँखे बंद करके, 
शांति से बैठिये, 
अपने मष्तिष्क को शांत होने दीजिये फिर देखिये, 
वह आपकी ज़िन्दगी को किस तरह से व्यवस्थित कर देता है।

आत्मा हमेशा अपने आपको ठीक करना जानती है 
बस मन को शान्त करना ही चुनौती है ।


.......................................................................

कृपया ब्लॉग को लाइक करें , शेयर करें और सुझाव कमेंट करें ।।।।


Please like comment and share my blog...

If you have any suggestions then plz suggest me...

🅱️ www.bestvichar.com