मै एक फोजी हूँ,,,,
वर्दी लगाकर मैं एक फौजी बना हूं,
अलग अंदाज का मन मौजी बना हूं।
हिफाजत करता हूं वतन की सरहद पर,
छोड़ आया हूं नन्ही सी कली को घर पर।
जननी से ज्यादा प्यार माँ भारती से करता हूं,
रक्षा मेरा धर्म हैं मैं मरने से नहीं डरता हूं।
तेरी मांग में सिंदूर भर, मैं तुझे छोड़ आया हूं,
हर पल साथ रहने का वो वादा तोड़ आया हूं।
खुशी से मनाते दिवाली पर इस बार खामोशी है,
दिवाली पर दीप जला रहे भाई की आँखे नमोशी है।
बहिन, रक्षाबंधन पर कलाई मेरी सुनी होगी,
तूने इस बार मेरे लिए मोतियों से राखी बुनी होगी।
मेरी नन्ही दहलीज पर पापा का इन्तजार करती होगी,
मेरे बिन निवाला नहीं लेती वो भर पेट कैसे सोती होगी।
मेहनत करते पापा ने सहारे की आश लगाई थी,
माफ करना पापा, मैंने मातृरक्षा की सौगंध खाई थी।
कितनी मस्ती होती थी मेरी यारों संग ढाणी में,
भूल गया वो कागज की किश्ती चलाना पानी में।
मैं हिफाजत करने खड़ा हूं सरहद पर वतन की,
वतन के लिए दबा रहा हूँ हर ख्वाहिश मन की।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳❤️❤️💛💛🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
जय हिंद
💐🙏 राम राम सा गाँव वालौ नै 🙏💐
वर्दी लगाकर मैं एक फौजी बना हूं,
अलग अंदाज का मन मौजी बना हूं।
हिफाजत करता हूं वतन की सरहद पर,
छोड़ आया हूं नन्ही सी कली को घर पर।
जननी से ज्यादा प्यार माँ भारती से करता हूं,
रक्षा मेरा धर्म हैं मैं मरने से नहीं डरता हूं।
तेरी मांग में सिंदूर भर, मैं तुझे छोड़ आया हूं,
हर पल साथ रहने का वो वादा तोड़ आया हूं।
खुशी से मनाते दिवाली पर इस बार खामोशी है,
दिवाली पर दीप जला रहे भाई की आँखे नमोशी है।
बहिन, रक्षाबंधन पर कलाई मेरी सुनी होगी,
तूने इस बार मेरे लिए मोतियों से राखी बुनी होगी।
मेरी नन्ही दहलीज पर पापा का इन्तजार करती होगी,
मेरे बिन निवाला नहीं लेती वो भर पेट कैसे सोती होगी।
मेहनत करते पापा ने सहारे की आश लगाई थी,
माफ करना पापा, मैंने मातृरक्षा की सौगंध खाई थी।
कितनी मस्ती होती थी मेरी यारों संग ढाणी में,
भूल गया वो कागज की किश्ती चलाना पानी में।
मैं हिफाजत करने खड़ा हूं सरहद पर वतन की,
वतन के लिए दबा रहा हूँ हर ख्वाहिश मन की।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳❤️❤️💛💛🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
जय हिंद