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Thursday, September 10, 2026

पुराने दौर की गजलें

इस नए दौर के 
हसीन लड़के,

पुराने दौर की 
गजलें सुन रहे हैं,,



Monday, August 17, 2026

मौन या अहंकार



हर व्यक्ति अपनी स्थिति मे 
संघर्ष कर रहा है,

इसलिए हर मौन 
अंहकार नहीं होता है,,



किसी की मुस्कान के पीछे भी दर्द हो सकता है,
और किसी की खामोशी के पीछे एक लंबी कहानी।

लोगों को समझने की कोशिश करें,
क्योंकि हर कोई अपनी एक अलग लड़ाई लड़ रहा है।

Friday, August 14, 2026

परेशान सब हैं




परेशान सब हैं…

कुछ सच में,
कुछ सच से।


कभी-कभी लगता है कि 
परेशानियाँ हर किसी की ज़िंदगी में हैं।

बस फर्क इतना है कि 
कोई अपनी परेशानी बता देता है,
और 
कोई मुस्कुराकर छुपा लेता है।



Tuesday, August 11, 2026

जिंदगी के सुविचार 💭




बड़े मजबूत हो जाते हैं
वो लोग जिनके पास, 

खोने के लिए
कुछ नहीं होता।,,



जिंदगी में कुछ लोग ऐसे होते हैं, 
जिन्हें परिस्थितियां तोड़ने की बहुत कोशिश करती हैं, लेकिन समय के साथ वही लोग पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बन जाते हैं।


जब इंसान अपने डर, उम्मीदों और दूसरों की परवाह से ऊपर उठ जाता है, तब उसके अंदर एक अलग तरह की ताकत पैदा होती है।






Saturday, August 8, 2026

पैसा”, “पैसा और जीवन”, “हिंदी सुविचार"






माना पैसा 
सब कुछ नहीं होता है,

पर यकीन मानो,
पैसा बहुत कुछ 
होता है।




पैसा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, 
लेकिन आज की दुनिया में इसकी अहमियत को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। 

पैसा हमें सिर्फ जरूरत की चीजें ही नहीं देता, 
बल्कि कई बार सुरक्षा, 
आत्मनिर्भरता और 
बेहतर अवसर भी देता है।





Thursday, August 6, 2026

सच्चे लोग और झूठ



सच्चे लोगों को शायद 
झूठ का पता ना हो,

लेकिन 
झूठे लोगों को सच का
हमेशा पता होता है ।।



जीवन में ईमानदारी सबसे बड़ी ताकत है। 
सच्चा इंसान अक्सर दूसरों पर भरोसा करता है, इसलिए उसे हर झूठ की पहचान नहीं होती। 
लेकिन जो व्यक्ति झूठ बोलता है, वह सच को अच्छी तरह जानता है, 
क्योंकि उसे हमेशा यह डर रहता है कि कहीं उसका झूठ सामने न आ जाए।

सीख:
"सत्य को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन झूठ को हर पल नए बहानों की जरूरत पड़ती है।"


Sunday, June 7, 2026

अब मैं वो नहीं रहा...

अब मैं वो नहीं रहा...

जो हर किसी को अपनी 
अहमियत समझाता फिरे।

अब जो साथ हैं, उनकी कद्र है,
और जो छोड़ गए, उनका शुक्रिया है।

क्योंकि उन्होंने ही सिखाया कि
खुद की कीमत खुद तय करनी पड़ती है। ✨


Thursday, January 29, 2026

तुम मुस्कुरा देना,,,

माना कि गम बहुत है
पर खुलासा मत होने देना,

मुस्कुरा देना पर
तमाशा मत होने देना,,





हर दर्द को
हर चौखट पर मत टाँक देना,

कुछ ज़ख़्म
सिर्फ़ दिल की अलमारी में अच्छे लगते हैं।

लोग पूछें तो कह देना—
सब ठीक है,
क्योंकि हर सच
हर किसी के काबिल नहीं होता।

मुस्कान अगर हथियार है,
तो उसे सलीके से चलाना सीखो,
कभी ढाल बनाओ,

कभी दीवार पर अपनी गरिमा 
गिरवी मत रखना।

याद रखना,
खामोशी भी एक जवाब है,
और खुद की हिफ़ाज़त
सबसे बड़ी बहादुरी।


Friday, January 23, 2026

सबको बराबर समझने की गलती…

हम तो नंगे पैर दौड़ रहे थे
जिनके लिए,

हम जरूरत पड़ी तो
उनकी तबीयत खराब हो गई…





हमेशा सबको बराबर मत समझो,
कुछ लोग साथ सिर्फ
अपनी सुविधा तक चलते हैं।
जब वक्त बदलता है,
तो रिश्तों की असलियत भी बदल जाती है।

खुद के लिए दौड़ना सीखो,
वरना थक जाओगे… 🖤

Wednesday, January 21, 2026

चेहरे की मुस्कान

हर बार इश्क ही 
नहीं होता है उदासी
की वजह,

कुछ घर के मसले भी
चेहरे की मुस्कान 
छीन लेते हैं,,

Monday, January 19, 2026

रात • सन्नाटा • अंदर का सच

रात के सन्नाटे में वही
सच सबसे तेज चिल्लाता है,

जिसको मन तो जानता है
पर शब्द नहीं जानते हैं,,


दिनभर की भीड़ में जो दबा रहता है,
वही खामोशी में सवाल बनकर उभरता है।

कभी-कभी जवाब बाहर नहीं,
बस भीतर स्वीकार होने का इंतज़ार करते हैं,,



Sunday, January 18, 2026

वफादारी

वफादारी 😀 

जब विकल्प हो तो 
कपड़े पसंद करना 
तक मुश्किल हो जाता है.


आज की ज़िंदगी विकल्पों से भरी हुई है।

हर कदम पर नए ऑप्शन,
हर रिश्ते में तुलना,
हर फैसले में कन्फ्यूजन।


इतने विकल्प हो गए हैं कि
अब इंसान सही और 
आसान के फर्क में उलझ जाता है।

कभी गौर किया है—
जब कपड़े खरीदते वक्त भी 
हम सोच में पड़ जाते हैं,

तो फिर रिश्ते निभाना इतना 
आसान कैसे हो सकता है?


पहले वफादारी एक आदत थी,
आज वो सिर्फ एक 
ऑप्शन बन चुकी है।

और ऑप्शन का स्वभाव है—
बदल जाना।


लोग कहते हैं
“ऑप्शन होना आज़ादी है”

पर सच्चाई ये है कि
ज़्यादा विकल्प इंसान को 
अस्थिर बना देते हैं।

आज हम किसी के साथ हैं,
कल किसी और की 
संभावना देखते हैं।


वफादारी का मतलब
सबसे बेहतर ढूंढना नहीं,
बल्कि
एक को चुनकर 
ईमानदारी से निभाना है।


जो हर बार बेहतर की 
तलाश में रहता है,
वो अक्सर
सबसे सच्चा खो देता है।


इसलिए मेरे दोस्त,
जब ज़िंदगी तुम्हें 
बहुत सारे विकल्प दे—
तो थोड़ा रुकना,
दिल से सोचना,
और फिर एक को चुनकर 
उस पर टिक जाना।


क्योंकि
कपड़े बदले जा सकते हैं,
सोच बदली जा सकती है,
पर
किरदार बार-बार नहीं 
बदलना चाहिए।



Saturday, January 17, 2026

अपनी कहानी का हीरो

कहानियां सच कैसे 
होगी मेरे दोस्त,

क्योंकि अपनी 
कहानी में हर कोई 
हीरो होता है,,





कोई अपनी गलतियों को हालात बता देता है,
तो कोई अपनी हार को किस्मत।

सच बस वहीं दब जाता है,
जहाँ ज़िम्मेदारी उठाने का साहस चाहिए।

असल कहानी तब शुरू होती है
जब इंसान खुद से सवाल करता है,

और अपने ही किरदार को
कटघरे में खड़ा करने की हिम्मत रखता है।

वरना किरदार तो सबके शानदार हैं,
बस सच्चाई अक्सर
एडिटिंग टेबल पर ही कट जाती है।

फूलों पर इत्र

तारीफ के मोहताज 
नहीं होते हैं अच्छे लोग,

क्योंकि फूलों पर 
इत्र नहीं लगाया जाता।


उनकी खुशबू
खुद-ब-खुद हवाओं में घुल जाती है,

बिना शोर किए
अपनी मौजूदगी दर्ज करा जाती है।


जो सच्चे होते हैं,
उन्हें चमकने के लिए
किसी बाहरी रोशनी की ज़रूरत नहीं होती,

वे तो अंधेरों में भी
रास्ता दिखा देते हैं।

असल खूबसूरती
दिखावे से नहीं,
किरदार से पहचानी जाती है।

और अच्छे लोग…
बस मिलते हैं,
और दिल में उतर जाते हैं।

Friday, January 16, 2026

मुझे धोखेबाज मत कहना...

दूरियाँ बढ़ा रही हैं
तुम्हारी हरकतें,

अब अगर साथ छूट जाए,
तो धोखेबाज़ मत कहना,





हर बार समझौता
मैं ही करूँ—
ये भी तो ज़रूरी नहीं।

कुछ रिश्ते
अचानक नहीं टूटते,
उन्हें तो
लापरवाही
धीरे-धीरे
खत्म करती है।

Thursday, January 15, 2026

एक आख़िरी कोशिश

बाद में पछताने 
से पहले, 

क्यों ना एक लास्ट 
जी जान वाली 
कोशिश हो जाए,,


वह जानता था कि हालात उसके पक्ष में नहीं हैं।

डर था, 
असफलता का भी और 
लोगों की बातों का भी।

पर उससे बड़ा डर था—
बाद में पछताने का।

उसने सोचा,

“अगर हार ही जानी है,

तो पूरी ताक़त से क्यों न लड़ा जाए?”


क्योंकि अधूरी कोशिश
हार से ज़्यादा चुभती है।

इसलिए उसने तय किया—
डर के साथ ही सही,
पर एक आख़िरी जी-जान वाली 
कोशिश ज़रूर करेगा।

हार गया तो कहानी यहीं खत्म,
और जीत गया…
तो यही कहानी उसकी पहचान बन जाएगी।

Tuesday, January 13, 2026

मर्द का मोल

पैसों में मापा जाने 
लगा है मर्द का माल,

अब वह ज़रूरतों के लिए नहीं,
अपनी कीमत बचाने 
के लिए दौड़ रहा है,,




कभी मर्द की पहचान उसके संस्कार, मेहनत और ज़िम्मेदारी से होती थी।

आज उसकी पहचान उसकी सैलरी, स्टेटस और लाइफस्टाइल से जुड़ गई है।

समाज ने मर्द के लिए 
एक पैमाना तय कर दिया है।
कमाई और पैसा 

समाज और मर्द की बदलती पहचान :-

आज के समाज में 
मर्द से उम्मीद की जाती है 
कि वह हर हाल में मज़बूत रहे।

थकान, डर और असफलता 
उसके हिस्से नहीं माने जाते।

अगर वह रुक जाए, 
तो उसे नाकाम समझ लिया जाता है।

शायद यही कारण है कि 
मर्द अपनी ज़रूरत से ज़्यादा
अपनी इज़्ज़त के लिए कमाने लगा है।


Monday, January 12, 2026

सब कुछ बदल जाता है

लोग अपनी औकात पर उतर आए   
यार भी घात पर उतर आए,
 
पहले मेरा हुनर खंगला   
फिर मेरी जात पर उतर आए,,



यह सिर्फ़ चार पंक्तियाँ नहीं,

बल्कि हमारे समाज का आईना हैं।


यहाँ इंसान की क़ीमत उसके हुनर से कम
और उसकी पहचान से ज़्यादा आँकी जाती है।

जब तक आप कामयाब नहीं होते,
लोग आपकी काबिलियत को परखते हैं।

और जैसे ही आप उनसे आगे निकलते हैं,
वे आपके नाम, आपकी जात,
और आपकी जड़ों पर सवाल उठाने लगते हैं।

सबसे अफ़सोस की बात तब होती है
जब अपने ही,
जो कभी कंधे से कंधा मिलाकर चले थे,
वही पीठ पीछे घात लगाने लगते हैं।


शायद यही ज़िंदगी का उसूल है—

हुनर रास्ता बनाता है,
और सोच बताती है
कि उस रास्ते पर
कौन साथ चलेगा
और कौन पत्थर फेंकेगा।

Sunday, January 11, 2026

संवाद

हो सके तो 
संवाद करना,

विवाद में किसी को 
क्या ही मिला है,,





इसलिए अब वह चुप है,

क्योंकि उसका हर जवाब 
एक नया विवाद बन जाता था।

फिर उसने बोलना नहीं, 
समझना चुना।

थोड़े शब्द,
थोड़ी खामोशी,

और बहुत-सी बात हो गई।

Saturday, January 10, 2026

किरदार इतना खूबसूरत बनाना मेरे दोस्त…

किरदार इतना खूबसूरत 
बनाना मेरे दोस्त,

कि लोग छोड़ तो पाए…
पर भुला नहीं पाए।





मैंने रिश्तों में कभी शोर नहीं किया,

बस जैसा था
वैसा ही निभाया।

शायद यही मेरी गलती थी,
या शायद यही मेरी पहचान।


कुछ लोग साथ इसलिए नहीं चले
क्योंकि उनके रास्ते बदल गए थे,
मेरे कदम नहीं।

मैं वहीं खड़ा रहा
अपने उसूलों के साथ,
और वो आगे बढ़ गए
अपनी सहूलियतों के साथ।

वक़्त बीतता गया,
नाम यादों में धुंधला नहीं पड़ा,
क्योंकि किरदार
हालात से नहीं
नीयत से बनता है।

आज जब कभी मेरा ज़िक्र आता है,
तो लोग खामोश हो जाते हैं।

शायद इसलिए नहीं
कि मैं परफेक्ट था,
बल्कि इसलिए
कि मैं नकली नहीं था।

और यही सच्चाई है—

किरदार अगर साफ़ हो,
तो लोग छोड़ सकते हैं,
मगर भुला नहीं पाते।