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Wednesday, July 31, 2019

सत्य

जिनके पास सिर्फ सिक्के थे
वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ....

जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रहे .

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कामयाब लोग " अपने फेसले " से
दुनिया बदल देते हे !!

और

नाकामयाब लोग दुनिया के डर से
"अपने फेसले " बदल लेते हे !!"

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क्या किस्मत पाई है रोटीयो ने भी निवाला बनकर,

रहिसो ने आधी फेंक दी,
गरीब ने आधी में जिंदगी गुज़ार दी!!

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बुराई इसलिये नही बढती की
बुरे लोग बढ गये है ,

बुराई इसलिये बढती है कि
बुराई को सहन करने वाले
लोग बढ गये हैं !

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कर्मो से ही पहचान होती है इंसानों की..

अच्छे कपड़े तो बेजान
पुतलो को भी पहनाये जाते है..।।

Friday, July 26, 2019

जीवन का संघर्ष

एक बार एक आदमी को अपने बगीचे में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा ।।।

अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा, 

और एक दिन उसने notice किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. 

उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा.

उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है ,

पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी ,

और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो ।।।

इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा।।।

उसने एक कैंची उठायी और कोकून के द्वार को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके,,

और यही हुआ
तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई,

पर उसका शरीर सूजा हुआ था,
और पंख सूखे हुए थे.

वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी,

पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.

वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है

ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और  वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके,,

वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती

जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है.

यदि हम बिना किसी संघर्ष के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे.

बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है.

इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये

वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को सम्भव बना पायेंगे ।।।

                  🙏💐💐सुप्रभात💐💐🙏

Thursday, July 25, 2019

जिन्दगी

अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी तो शाम होने दो,

मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो,,

मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना,

मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।

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उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो,

जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो,,

इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है,
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो,,

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ज़िंदगी में जो हम चाहते हैं
वो आसानी से नहीं मिलता,

लेकिन ज़िंदगी का एक सच यह भी है
कि जो हम चाहते वो आसान नहीं होता।

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ख़बर नहीं थी किसी को कहाँ कहाँ कोई है,

हर इक तरफ़ से सदा आ रही थी याँ कोई है,,

यहीं कहीं पे कोई शहर बस रहा था अभी,

तलाश कीजिये उसका अगर निशाँ कोई है,,

Wednesday, July 24, 2019

दुनियादारी

अंधेरा भी बुरा मानने लगा है अब तो चिराग जलाने से,

क्यूँ अपने पथ पर ही चलना बंद कर दूं डर के जमाने से,,

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सच्चाई भी गले तक आकर रुकने लगी है अब तो,

शायद हमें भी दुनियादारी की समझ होने लगी है ,,

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घमंड को जिसको अपनी ताकत है,

उससे जरा इतना सा पूछो कि

खुद की अर्थी उठा सकता है क्या ?

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भरोसा
लफ्ज़ छोटा सा है लेकिन,

साबित करने मे पुरी जिन्दगी कम पङ जाती है...

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हकिकत


किसीकी सलाह से रास्ते जरूर मिलते है,

पर मंजिल तो खुद की मेहनत से ही मिलती है !!

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जीवन का सबसे बड़ा गुरु वक्त होता है,

क्योंकि जो वक्त सिखाता है
वो कोई नहीं सिखा पाता !!

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इंसान के पास जब बहुत
रूपया हो जाता है,

तब इंसान बहुरूपिया हो जाता है !!

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कुछ लोगों की वास्तविकता का अंदाजा
लगाना बहोत कठिन है,

ये तो समय है जो एसे लोगों के नकाब
समय पर उतार देता है !!

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इस दुनिया में सच्चे इंसान को,

झूठे इंसान से ज्यादा
सफाई पेश करनी पड़ती है !!

Sunday, July 21, 2019

मुसाफिर

मुसाफिर कल भी था,

मुसाफिर आज भी हूँ;

कल अपनों की तलाश में था,

आज अपनी तलाश में हूँ।

न जाने कौन सी शोहरत

पर आदमी को नाज है,

जबकि आखरी सफर के लिए भी

आदमी औरों का मोहताज है

सुविचार

जब चलना है तुझको तेरे पैरों पर

तो क्यों करता है भरोसा गैरों पर

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सही इंसान को तभी पहचान पाएगा,

जब तू करके भरोसा झूठों पर ठोकर खाएगा,

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क्यों पड़ती ईतनी जरूरत संघर्ष करने की,

हकीकत होती "हम तुम्हारे साथ हैं" मे साथ निभाने की,

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अगर हो सामना मुसीबत से तो डरते क्यों हो,

तरकीब निकालो जीने की बेवजह मरते क्यों हो,

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रख हौसला हर हाल में ऊंचा उठने की

फैशन बन गई है नहीं है जमाने में आदत टांग खींचने की

वक्त

मैं मानता हूं कि

बुरा वक्त बताकर नहीं आता

पर जब वह जाता है

तो बहुत कुछ सिखाकर और समझाकर जाता है

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छाता लगाने का मतलब ये नहीं की बच गए पानी से,

याद रखो की डुबाने वाला पानी

सिर से नहीं

पैर कि आता है !!

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हर किसी में अच्छाई के साथ साथ बुराई भी होती हैं

जैसे,

पत्थर में एक ही कमी है की वो कभी पिघलता नहीं है,

लेकिन उसकी खूबी है की वो कभी बदलता भी नहीं है !!

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सत्य वचन

जीवन में खुश रहने की दो ही शक्तियां है

पहली सहनशक्ति

दूसरी समझ शक्ती

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सुविचार

1)

जहाँ भी आपको लगे की आपकी जरुरत नहीं है,

वहाँ ख़ामोशी से खुद को अलग कर लेना चाहिए !!

2)

पकाई जाती है रोटी जो मेहनत की कमाई से,

हो जाए गर बासी तो भी लिज्जत कम नहीं होती !!

3)
मेरे कुछ पुराने कपड़ो में,

मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत लगा

वो बच्चा ग़रीब का !!

4)

जो बेवजह दूसरों का दिल तोडा करते है,

उसे भी कभी सच्चा प्यार नसीब नहीं होता !!

5)
कुछ नहीं मिलता दुनिया में मेहनत के बगैर,

मेरा अपना साया भी धूप में आने से मिला !!

Saturday, July 20, 2019

माँ

1)
रेंगता लुढकता तेरी उंगली के सहारे न जाने कब मैं खड़ा हो गया,

यह वक्त इतना क्यों तेज चलता है मां जो मैं इतना जल्दी बड़ा हो गया।।

2)
समझ जाते हैं भगवान भी तेरी इशारे को
थोड़ा इस जिंदगी को भी समझा देना मां,

थक गया हूं मैं जिंदगी की इस भागदौड़ से
थोड़ा आराम चाहता गोद में सुला ले ना मां।।

3)
नहीं मिटा पाया मैं भूख खाकर खाना महंगे होटलों से,

कैसे मिटा देती थी आप मां अपने आटे भरे हाथों के 1-2 निवाले से।।

4)
महंगे खानों ने तो सिर्फ जुबान हवस मिटाई है,

भूख तो मां तेरे चुल्हे की रोटी ने मिठाई है ।।

5)
कैसे हो सकता कद तेरा ऊँचा किसी भी माँ से ए खुदा,

तू सिर्फ आदमी बनाता है, इन्सान तो वही बनाती है ना ।।

Thursday, July 18, 2019

रिश्ते निभाओ....,

1)

दूरियों का गम नहीं अगर फांसले दिल में न हो,

नजदीकियां बेकार है अगर दिल में जगह न हो !!

2)

टूट जाते है बिखर जाते है,
कांच के घर में मुकद्दर अपने,

अजनबी तो सदा प्यार से मिलते है,
भूल जाते है तो अक्सर अपने !!

3)
अगर दो लोगो में कभी
लड़ाई ना हो तो समझ लेना,

रिश्ता दिल से नहीं
दिमाग से निभाया जा रहा है !!

4)
जब इन्सान कामयाबी के शिखर पर होता है,

तो वो अक्सर अपनों को भूल जाता है,

और जब वह बरबादी की कगार पर होता है,

तो अक्सर अपने उसे भुला देते है !!

5)

मैं दुनिया से लड़ सकता हूँ लेकिन अपनों से नहीं,

क्यूंकि अपनों के साथ मुझे
जितना नहीं बल्कि जीना है !!

सुविचार

1)
जुगनुओं (युवाओ) अब तो तुम्हें ही नये चांद उगाने पङेंगे ।

इससे पहले के अंधेरों की हुकुमत आ जाये !!

2)

क्यों बदनाम करते हो सरहदों को बटवारे लिए के लिए,

गौर से देखो यहां तो लोग एक घर में भी अलग-अलग रहते हैं

3)

पसंद है मुझे लापरवाही

क्योंकि अगर मैंने की परवाह किसी की

तो लूट लेंगे वहु लोग मुझे...

4)

नहीं आएगा उठाने कोई जो तुम गिर गए,

जमाना बैठा है गिराने को जरा उड़ के तो देख !!

5)

ये सच है की किस्मत के फैंसले बदलते नहीं,

लेकिन सही फैंसले किस्मत जरुर बदल देते है !!

कवियों के बोल

हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|

न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो|

~ डॉ.राहत इन्दौरी साहब

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जब जब लगा हमें कि खुशी अब सँवर गयी,
हमसे  छुड़ा  के  हाथ  न  जाने  किधर गयी।

तुम  मिल  गए  हो  तब  से हमें लग रहा है यूँ,
बिखरी थी जितनी ज़िन्दगी उतनी निखर गयी।

~ डॉ विष्णु सक्सेना साहब

Wednesday, July 17, 2019

एक पिता


फिर पुराने नीम के नीचे खडा हूँ
फिर पिता की याद आई है मुझे

नीम सी यादें ह्रदय में चुप समेटे
चारपाई डाल आँगन बीच लेटे

सोचते हैं हित सदा उनके घरों का
दूर है जो एक बेटी चार बेटे

फिर कोई हाथ रख कांधे पर

कहीं यह पूछता है-

"क्यों अकेला हूं भरी इस भीड़ में"

मैं रो पड़ा हूं,

फिर पिता की याद आई है मुझे
फिर पुराने नीम के नीचे खडा हूँ

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तारीख दर तारीख वो खर्च होता रहा।
इंच दर इंच वो घर को संजोता रहा।।

गवांकर अपने जीने का हर मकसद।
हर पल वो हम में भविष्य बोता रहा।।

मैं देख रहा हुं पिता को बूढ़ा होते हुए।
सिफर ताऊम्र खुद में उन्हें ढ़ोता रहा।।

मां कि सिख

दोस्तों आज मैं एक ऐसी कहानी लेकर आया हूं जिसमें लड़की के मायके वालों का क्या योगदान होता है जो लड़की की जिंदगी ओर उसके ससुराल को खुशहाल बनाने में मदद कर सकता है।।।

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एक लड़की थी जो खुले विचारों की और आजाद रहने की आदी थी,







उसकी शादी एक ऐसे परिवार में हो गई थी जहां संस्कार मान मर्यादा को ज्यादा महत्व दिया जाता था !

इसलिए उस लड़की की अपने सास के साथ और बाकी परिवार वालों के साथ ज्यादा नहीं बनती थी !
उसका पति मां का साथ देता था उसके लिए कई बार अपने पति से भी नाराज रहती थी !


दूसरी ओर उस लड़की के भाई की पत्नी कि बातें सुनकर वह परेशानी होती थी कि उसके मायके वालों ने तो उनकी बहु को इतनी इजाजत क्यूं दे  रखी है तो मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है!


1 दिन बाद बात कुछ ज्यादा बढ़ने से वह ससुराल छोड़कर अपने मायके आ गई!


घर आने पर मां ने कारण पूछा तो उसने बताया कि वह वह मेरे को उनकी मर्जी के हिसाब से रखना चाहते हैं


तुम तो भाभी को उनकी मर्जी से जिंदगी जीने देती हो पर मेरे को ऐसा कुछ करने से रोका जा रहा है,


मां ने पूरी बात सुनी और अपनी बच्ची को समझाते हुए कहा कि
तुम्हारी भाभी मैं और तुम्हारे में बहुत अंतर है!

तो बेटी तुनक कर बोली मां आप भी भाभी की ही साइड ले रहे हो मेरा तो कोई नहीं है इस दुनिया में!
मैं भी वही सारे काम करती हूं जो भाभी करती है तो फिर अंतर किस बात का!


मां बोली मानती हूं
जो काम तेरी भाभी करती है तू भी वही सारे काम करती है,

पर फर्क सिर्फ इस बात का है कि तू दुखी होकर काम करती है और वह खुश होकर!
तो अपने काम को बोझ समझकर करती है और वह है उसको जिम्मेदारी समझकर करती है!

तो बेटी बोली,
ऐसा कुछ नहीं है मां मैं भी खुश होकर ही काम करती हूं
वैसे है कहां भाभी !

अभी मिलकर सारी बात पता कर लेते हैं

तो मां प्यार से बोली अभी तो वह है बाहर गई हुई है अपनी सहेलियों से मिलने,

बेटी बोली मां आपने अपनी बहू को सर पर चढ़ा के रखा है
क्या रोज रोज इधर-उधर मिलने जाना घर पर नहीं रह सकती क्या जैसी मे रहती हूं

मां मुस्कुराते हुए बोली
तू एक काम कर आज यहीं रुक और सिर्फ देख वह कैसे काम करती है उससे कुछ भी मत बोलना.


थोड़ी देर बाद में उसकी भाभी आई और हंसते हुए उसका स्वागत करते हुए हालचाल पूछे थोड़ी बहुत बात की वह बोली मैं आपके लिए चाय नाश्ता बना कर लाती हूं


भाभी के जाने के बाद

मां ने बेटी से पूछा

कभी तुमने अपने ननद से इतने प्यार से बात की क्या?

तो बेटी बोली -
मैं तो बहुत अच्छी हूं इसके लिए भाभी ने प्यार से बात की,

पर मेरी ननद तो बहुत बुरी है मैं उसे कभी प्यार से बात नहीं करूंगी!

मां बोली 
हां बेटा तू बहुत प्यारी है तभी कुछ देर पहले मेरे पास अपनी भाभी की तारीफ कर रही थी!

इस बात पर बेटी को गुस्सा आया बोली -
मां आप फिर से भाभी की साइड ले रहे हो!


थोड़ी देर में भाभी उनके लिए चाय नाश्ता लेकर आ गई और सभी ने प्यार से बातें करते करते चाय नाश्ता किया,
थोड़े समय बाद भाभी ने अपने सास से बोली

मां जी आज आपकी पसंद का कुछ नहीं बनेगा आज  दीदी जो कहेगी वही बनायेंगे

तो बेटी बीच में बोली हमेशा क्या तू मम्मा से पूछकर बनाती है क्या?

तभी मां बोली हां बेटी यह हमेशा कुछ भी करने से पहले यह मुझसे एक बार सलाह जरूर लेती है,

तब बेटी खुशी खुशी भाभी को ऑर्डर लिखवाने लगी
यह भी बनाओ यह भी बनाओ और यह भी।

भाभी रसोई में चली जाती है 

तो
 मां बेटी को पूछती है 
कभी तुम्हें अपनी सास को चाय तक के लिए पूछा है क्या


बेटी की खुशी अचानक गायब हो जाती हैं वह नजर झुका कर बोलती है
नहीं मां

तो मां बोली बेटी जब तुम को उनकी खुशी से लेना देना नहीं है तो उनको तेरी खुशी से क्या लेना देना।


तभी घर की डोरवेल बजती है
भाभी दरवाजा खोलने जाती है
और सामने अपने पति को देखें बोलती हे आज आपके लिए एक सरप्राइज है आंखें बंद करो
पति भी मुस्कुराते हुए बोला - कैसा सा सरप्राइज ?
भाभी बोलती हे आप आंखें तो बंद करो और अंदर आओ,






भाभी अपने पति को उनकी बहन के सामने खड़ा करके बोलती अभी आंखें खोलो,

पति आंखें खुलते ही अपनी बहन को सामने देखता है और खुशी से झूम उठता है

भाई बहन खुशी से गले मिलते है

तभी भाभी बोलती हे आप जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जाईये ।

मैं खाना लगा देती हूं

सभी साथ में बैठ के खाना खाएंगे,

भाई कमरे में जाता है भाभी रसोई में जाती है

तभी मां अपनी बेटी से उसी है क्या तूने कभी अपने पति का इस तरह खुश होकर स्वागत किया ?

बेटी मायूस होकर बोलती हे
सॉरी मां मैंने कभी ऐसा नहीं किया।
सभी साथ मिलकर खाना खाते है
और साथ में बैठकर हंसी खुशी बातें करते है ।

बेटा बोलता है चलो बहुत देर हो गई
अभी मैं सोने जाता हूं

आप लोग भी सो जाओ
सुबह मिलते हैं

भाभी बोली माजी मैं आपकी दवाई ला कर देती हूं आप दवाई लेकर की सोना।

दोनो के जाने के बाद

मा बेटी से बोली बता बेटी कभी तुमने अपने ससुराल वालों के साथ इतने प्यार से समय बिताया है
और कभी तूने अपनी सास का ख्याल रखा है

तब बेटी की आंखों से आंसू आ जाते है
नहीं मां मे ही गलत थी

तब भाभी अपनी सास को दवाई देती है दवाई लेने के बाद शुभ रात्रि बोल कर सोने चली जाती है
तब मां बेटी आपस बातें करती हैं

मां बोली
देख बेटी अगर तुमको अपनी बात मनवानी है तो पहले की बात माननी पड़ेगी

बेटी बोली

सही कह रहे हो मां आप


मां बोलती है
अब तू ही बता मैं तेरी भाभी को किसी भी चीज के लिए कैसे मना कर सकती हूं जब वह मेरे और मेरे परिवार के लिए इतना कुछ करती है।

अब पता चला ना तेरे को तेरे मैं और तेरी भाभी में कितना अंतर है

बेटी अपनी मां के गले मिलते हुए बोली


मां आज आपने मेरी आंखें खोल दी अगर आप मेरा साथ दो मेरी जिंदगी कभी नहीं बदलती।


तब मा बोली
आज मुझसे इक वादा कर कभी भी अपने ससुराल की शिकायत अपने मायके लेकर नहीं आएगी।।।

बेटी बोलीमैं आपसे वादा करती हूं आज के बाद मैं अपने ससुराल की कोई भी शिकायत लेकर कहां नहीं आऊंगी।

और अपने ससुराल को ससुराल नहीं अपना परिवार मानुंगी।







इस कहानी से इतना ही कहना चाहता हूं दोस्तों की अपनी बेटी को कभी उसके ससुराल वालों के खिलाफ भड़काओ मत। ।

हो सके तो उसको प्यार से समझाओ जो उसकी जिंदगी के लिए जो अच्छे वही उसको बताओ।।।



वो कहते हैं ना कि एक मां चाहे तो अपने बेटी के ससुराल को स्वर्ग बना सकती है और चाहे तो नरक भी बना सकती है।।।

Tuesday, July 16, 2019

जिंदगी

1)
नाम बड़ा किस काम का जो
काम किसी के ना आए,

सागर से नदियां भली जो
सबकी प्यास बुझाएं !!

2)

जिंदगी की किताब में
धैर्य का कवर होना बहुत ज़रुरी है,

क्योंकि वही हर पन्ने को
बांधकर रखता है !!

3)
खुशी सिर्फ दूसरों को दिखाने के लिए नहीं,

बल्कि अपनी तसल्ली के लिए भी होनी चाहिए !!

4)
जितना मजाक दुनिया उड़ाती है,
उतनी ही तकदीर जगमगाती है,

जब कर्म कनैया का होता है,
तो जिंदगी पल भर में बदल जाती है !!

5)

कैसे कह दूँ कौन गलत था
कैसे कह दूँ कौन सही है,

सोचा समझा सब घूम कर जाना
की "मौन" सही है !!

Monday, July 15, 2019

जिंदगी

1)

मुसाफ़िर ने कहा की रास्ते अब मंज़िल तक पहुँचाते नहीं,

रास्ता बोल पड़ा की मुसाफ़िर भी अब पहले जैसे मिलते कहाँ है !!

2)

घर के चूल्हे को भरम है की वो पालता है हमें,

प्यार तो माँ की हथेली से चुराती है रोटियाँ !!

3)

धोखा खाने वाले को तो एक दिन सुकून मिल ही जाता है,

लेकिन धोखा देने वाले को कभी सुकून नहीं मिलता !!

4)
किसीको तुम दिल से चाहे और

वो तुम्हारी ‪कदर‬ ना करे,

तो ये उसकी ‪बदनसीबी‬ है तुम्हारी‬ नहीं !!

5)

मेरे अच्छे वक्त ने दुनिया को बताया की मैं कैसा हूँ,

और मेरे बुरे वक्त ने मुझे बताया की दुनिया कैसी है !!

Saturday, July 13, 2019

क्रोध पर काबू रखो

एक युवक ने विवाह के दो साल बाद
परदेस जाकर व्यापार करने की
इच्छा पिता से कही ।

पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती
पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार
करने चला गया ।

परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और
वह धनी सेठ बन गया ।

सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई
और वापस घर लौटने की इच्छा हुई ।

पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी
और जहाज में बैठ गया ।

उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी
मन से बैठा था ।

सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो
उसने बताया कि

इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है ।

मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर
कोई लेने को तैयार नहीं है ।

सेठ ने सोचा 'इस देश में मैने बहुत धन कमाया है,
और यह मेरी कर्मभूमि है,
इसका मान रखना चाहिए !'

उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई ।

उस व्यक्ति ने कहा-
मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है ।
सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था..

लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए
500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी ।

व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया-
कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट
रूककर सोच लेना ।

सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख लिया ।
कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय
सेठ अपने नगर को पहुँचा ।

उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ तो
क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे
पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दूँ ।

घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा
करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया
तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पांवों के
नीचे की जमीन खिसक गई ।

पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक
युवक सोया हुआ था ।

अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि
मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और
ये यहां अन्य पुरुष के साथ है ।

दोनों को जिन्दा नही छोड़ूगाँ ।

क्रोध में तलवार निकाल ली ।

वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही
उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त ज्ञान सूत्र
याद आया-

कि कोई भी कार्य करने से
पहले दो मिनट सोच लेना ।

सोचने के लिए रूका ।

तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई ।

बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई ।

जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी
वह ख़ुश हो गई और बोली-
आपके बिना जीवन सूना सूना था ।

इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले
यह मैं ही जानती हूँ ।

सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को
देखकर कुपित था ।

पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- बेटा जाग ।
तेरे पिता आए हैं ।

युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम
करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई ।
उसके लम्बे बाल बिखर गए ।

सेठ की पत्नी ने कहा- स्वामी ये आपकी बेटी है ।

पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए
इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही
पालन पोषण और संस्कार दिए हैं ।

यह सुनकर सेठ की आँखों से
अश्रुधारा बह निकली ।

पत्नी और बेटी को गले लगाकर
सोचने लगा कि यदि आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता ।

मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता ।

ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा
लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो
500 स्वर्ण मुद्राएं बहुत कम हैं ।

'ज्ञान तो अनमोल है '

इस कहानी का सार यह है कि
जीवन के दो मिनट जो दुःखों से बचाकर
सुख की बरसात कर सकते हैं ।

वे हैं - 'क्रोध के दो मिनट'

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क्योंकि आपका एक शेयर किसी व्यक्ति को
उसके क्रोध पर अंकुश रखने के लिए
प्रेरित कर सकता है ।

अच्छाई

1)
किसी की अच्छाई का इतना भी फायदा मत उठाओ की,

वो बुरा बनने के लिए मजबूर बन जाए !!

2)

गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है,

उन्होने देख लिया की इंसान हमसे अच्छा नोंचता है !!

3)

अजीब दास्ताँ है ज़िन्दगी की,

जीत जाओ तो कई अपने छूट जाते है,

और हार जाओ तो अपने ही छोड़ जाते है !!

4)
जिन्दगी का ये हुनर भी आजमाना चाहिए,

जंग अगर अपनों से हो तो हार जाना चाहिए !!

5)

ना फिक्र कर की जमाना सोचेगा क्या,

ज़माने को अपनी ही फिक्र से फुरसत कहाँ है !!

Friday, July 12, 2019

रिश्ते निभाओ....

1)
कोहरे से लगने लगे हैं सारे रिश्ते अब तो,

अपने कोई दिखते ही नहीं और
जो दिखते हैं वह अपने होते ही नहीं ।।।



2)
कैसे कोई खत्म कर सकता है कोई उस रिश्ते को

जो खुद कहता था दुनिया छोड़ जाऊंगा अगर तुमने तोड़ा इस रिश्ते को



3)

महसूस हो रही है एक खामोशी बड़े शोर के बाद,

टूटा होगा फिर से कोई रिश्ता बड़े अरसे बाद।।



4)

रिश्ते भी आजकल इतने अजीब हो गए है,

तब तक नहीं बोलेंगे ,
जब तक आप आवाज ना दो...



5)

ताने मारने वाले अपने ही तो होते हैं,

वरना औरों को क्या पता की इसका
दिल किस बात से दुखता है !!

Thursday, July 11, 2019

स्कूल की यादें ( मुर्गा रूपी पनिशमेंट)

एक टीचर अपने स्टूडेंट को मुर्गा बनने की सजा दी,
तब उस टीचर और बच्चे के बीच जो वार्तालाप वह पढें और स्कूल के याद करें,,,,


टीचर बोला,
बनजा वहां मुर्गा तेरी गलती की सजा तो यही पाएगा,
तुझको जो बक्स दिया तो कोई होमवर्क करके नहीं लाएगा।



बच्चा मासूमियत से बोला,
बन तो जाऊंगा मुर्गा मैं गुरुदेव पर इस से आप कुछ ना पाओगे,
ना तो मैं अंडा दे पाऊंगा ना आप मुझको खा पाओगे।





तब टीचर बोला
रे नादान,
इस सजा से तेरी स्कूल के बच्चे यही सीख पायेंगे,
जो भी गलती करेंगे वो मुर्गा रूपी दंड पाएंगे।




बच्चा बोला,
इस बार गलती माफ करो गुरुदेव स्कूल में इज्जत नहीं बचा पाऊंगा,
वादा करता हूं गुरुदेव कल पक्का होमवर्क करके आऊंगा।






तब टीचर सीरियस होकर बोला,
इस इज्जत से क्या करेगा रे नादान प्यारे इन्हीं बातों के लिए एक दिन तू तरसेगा,
वादा है मेरा जब तू बड़ा हो जाएगा तो इन्हीं बातों को याद करके तेरी आंखों से नीर बरसेगा।





तब बच्चा अपनी सजा डालने के लिए टीचर की गंभीरता को देखते हुए बोला
मैं नादान परिंदा समझ नहीं पाया,
गुरुदेव जरा विस्तार से बताओ ना


तब टीचर बोला
अभी तक तुम इतना होशियार नहीं बन पाया, नादान परिंदे मेरे  जरा मुर्गा बन के तो दिखाओ ना।।।