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Friday, June 28, 2019

नारी का सम्मान


ओ नारी ! कैसे कह दूं, तुम कुछ नहीं हो

ज्ञान जो चाहें सरस्वती तुम, 

मान जो चाहें लक्ष्मी हो तुम

अपराधों का साया छाये धरती पर, 

तो काली-दुर्गा का रूप हो तुम

ओ नारी ! कैसे कह दूं, तुम कुछ नहीं हो।

खुशियों का संसार तुम्हीं से, 

जीने के आधार तुम्हीं से
बंद होते और खुलते भी हैं, 

दुनिया के दरबार तुम्हीं से

ओ नारी ! कैसे कह दूं, तुम कुछ नहीं हो।

प्रेम की शुरुआत तुम्हीं से, 

जीवन का आगाज तुम्हीं से
ये जहां है जगमग सूरज से, 

सूरज की चमकार तुम्हीं से

ओ नारी ! कैसे कह दूं, तुम कुछ नहीं हो।

कभी कठोर-कभी नेक हो तुम, 

हर रिश्ते में हरि एक हो तुम
ममता-शक्ति और मुहब्बत, 

नारी तुम एक हो मगर अनेक हो तुम

ओ नारी ! कैसे कह दूं, तुम कुछ नहीं हो।

आन-बान और शान तुम्हीं से, 

संस्कारों की खान तुम्हीं से
दर्द-त्याग और ममता की है, 

संसार में पहचान तुम्हीं से

ओ नारी ! कैसे कह दूं, तुम कुछ नहीं हो।

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