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Sunday, January 18, 2026

वफादारी

वफादारी 😀 

जब विकल्प हो तो 
कपड़े पसंद करना 
तक मुश्किल हो जाता है.


आज की ज़िंदगी विकल्पों से भरी हुई है।

हर कदम पर नए ऑप्शन,
हर रिश्ते में तुलना,
हर फैसले में कन्फ्यूजन।


इतने विकल्प हो गए हैं कि
अब इंसान सही और 
आसान के फर्क में उलझ जाता है।

कभी गौर किया है—
जब कपड़े खरीदते वक्त भी 
हम सोच में पड़ जाते हैं,

तो फिर रिश्ते निभाना इतना 
आसान कैसे हो सकता है?


पहले वफादारी एक आदत थी,
आज वो सिर्फ एक 
ऑप्शन बन चुकी है।

और ऑप्शन का स्वभाव है—
बदल जाना।


लोग कहते हैं
“ऑप्शन होना आज़ादी है”

पर सच्चाई ये है कि
ज़्यादा विकल्प इंसान को 
अस्थिर बना देते हैं।

आज हम किसी के साथ हैं,
कल किसी और की 
संभावना देखते हैं।


वफादारी का मतलब
सबसे बेहतर ढूंढना नहीं,
बल्कि
एक को चुनकर 
ईमानदारी से निभाना है।


जो हर बार बेहतर की 
तलाश में रहता है,
वो अक्सर
सबसे सच्चा खो देता है।


इसलिए मेरे दोस्त,
जब ज़िंदगी तुम्हें 
बहुत सारे विकल्प दे—
तो थोड़ा रुकना,
दिल से सोचना,
और फिर एक को चुनकर 
उस पर टिक जाना।


क्योंकि
कपड़े बदले जा सकते हैं,
सोच बदली जा सकती है,
पर
किरदार बार-बार नहीं 
बदलना चाहिए।



Saturday, January 17, 2026

अपनी कहानी का हीरो

कहानियां सच कैसे 
होगी मेरे दोस्त,

क्योंकि अपनी 
कहानी में हर कोई 
हीरो होता है,,





कोई अपनी गलतियों को हालात बता देता है,
तो कोई अपनी हार को किस्मत।

सच बस वहीं दब जाता है,
जहाँ ज़िम्मेदारी उठाने का साहस चाहिए।

असल कहानी तब शुरू होती है
जब इंसान खुद से सवाल करता है,

और अपने ही किरदार को
कटघरे में खड़ा करने की हिम्मत रखता है।

वरना किरदार तो सबके शानदार हैं,
बस सच्चाई अक्सर
एडिटिंग टेबल पर ही कट जाती है।

फूलों पर इत्र

तारीफ के मोहताज 
नहीं होते हैं अच्छे लोग,

क्योंकि फूलों पर 
इत्र नहीं लगाया जाता।


उनकी खुशबू
खुद-ब-खुद हवाओं में घुल जाती है,

बिना शोर किए
अपनी मौजूदगी दर्ज करा जाती है।


जो सच्चे होते हैं,
उन्हें चमकने के लिए
किसी बाहरी रोशनी की ज़रूरत नहीं होती,

वे तो अंधेरों में भी
रास्ता दिखा देते हैं।

असल खूबसूरती
दिखावे से नहीं,
किरदार से पहचानी जाती है।

और अच्छे लोग…
बस मिलते हैं,
और दिल में उतर जाते हैं।

Friday, January 16, 2026

मुझे धोखेबाज मत कहना...

दूरियाँ बढ़ा रही हैं
तुम्हारी हरकतें,

अब अगर साथ छूट जाए,
तो धोखेबाज़ मत कहना,





हर बार समझौता
मैं ही करूँ—
ये भी तो ज़रूरी नहीं।

कुछ रिश्ते
अचानक नहीं टूटते,
उन्हें तो
लापरवाही
धीरे-धीरे
खत्म करती है।

Thursday, January 15, 2026

एक आख़िरी कोशिश

बाद में पछताने 
से पहले, 

क्यों ना एक लास्ट 
जी जान वाली 
कोशिश हो जाए,,


वह जानता था कि हालात उसके पक्ष में नहीं हैं।

डर था, 
असफलता का भी और 
लोगों की बातों का भी।

पर उससे बड़ा डर था—
बाद में पछताने का।

उसने सोचा,

“अगर हार ही जानी है,

तो पूरी ताक़त से क्यों न लड़ा जाए?”


क्योंकि अधूरी कोशिश
हार से ज़्यादा चुभती है।

इसलिए उसने तय किया—
डर के साथ ही सही,
पर एक आख़िरी जी-जान वाली 
कोशिश ज़रूर करेगा।

हार गया तो कहानी यहीं खत्म,
और जीत गया…
तो यही कहानी उसकी पहचान बन जाएगी।