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Monday, July 15, 2019

जिंदगी

1)

मुसाफ़िर ने कहा की रास्ते अब मंज़िल तक पहुँचाते नहीं,

रास्ता बोल पड़ा की मुसाफ़िर भी अब पहले जैसे मिलते कहाँ है !!

2)

घर के चूल्हे को भरम है की वो पालता है हमें,

प्यार तो माँ की हथेली से चुराती है रोटियाँ !!

3)

धोखा खाने वाले को तो एक दिन सुकून मिल ही जाता है,

लेकिन धोखा देने वाले को कभी सुकून नहीं मिलता !!

4)
किसीको तुम दिल से चाहे और

वो तुम्हारी ‪कदर‬ ना करे,

तो ये उसकी ‪बदनसीबी‬ है तुम्हारी‬ नहीं !!

5)

मेरे अच्छे वक्त ने दुनिया को बताया की मैं कैसा हूँ,

और मेरे बुरे वक्त ने मुझे बताया की दुनिया कैसी है !!

Saturday, July 13, 2019

क्रोध पर काबू रखो

एक युवक ने विवाह के दो साल बाद
परदेस जाकर व्यापार करने की
इच्छा पिता से कही ।

पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती
पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार
करने चला गया ।

परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और
वह धनी सेठ बन गया ।

सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई
और वापस घर लौटने की इच्छा हुई ।

पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी
और जहाज में बैठ गया ।

उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी
मन से बैठा था ।

सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो
उसने बताया कि

इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है ।

मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर
कोई लेने को तैयार नहीं है ।

सेठ ने सोचा 'इस देश में मैने बहुत धन कमाया है,
और यह मेरी कर्मभूमि है,
इसका मान रखना चाहिए !'

उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई ।

उस व्यक्ति ने कहा-
मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है ।
सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था..

लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए
500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी ।

व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया-
कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट
रूककर सोच लेना ।

सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख लिया ।
कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय
सेठ अपने नगर को पहुँचा ।

उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ तो
क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे
पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दूँ ।

घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा
करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया
तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पांवों के
नीचे की जमीन खिसक गई ।

पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक
युवक सोया हुआ था ।

अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि
मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और
ये यहां अन्य पुरुष के साथ है ।

दोनों को जिन्दा नही छोड़ूगाँ ।

क्रोध में तलवार निकाल ली ।

वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही
उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त ज्ञान सूत्र
याद आया-

कि कोई भी कार्य करने से
पहले दो मिनट सोच लेना ।

सोचने के लिए रूका ।

तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई ।

बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई ।

जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी
वह ख़ुश हो गई और बोली-
आपके बिना जीवन सूना सूना था ।

इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले
यह मैं ही जानती हूँ ।

सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को
देखकर कुपित था ।

पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- बेटा जाग ।
तेरे पिता आए हैं ।

युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम
करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई ।
उसके लम्बे बाल बिखर गए ।

सेठ की पत्नी ने कहा- स्वामी ये आपकी बेटी है ।

पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए
इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही
पालन पोषण और संस्कार दिए हैं ।

यह सुनकर सेठ की आँखों से
अश्रुधारा बह निकली ।

पत्नी और बेटी को गले लगाकर
सोचने लगा कि यदि आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता ।

मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता ।

ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा
लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो
500 स्वर्ण मुद्राएं बहुत कम हैं ।

'ज्ञान तो अनमोल है '

इस कहानी का सार यह है कि
जीवन के दो मिनट जो दुःखों से बचाकर
सुख की बरसात कर सकते हैं ।

वे हैं - 'क्रोध के दो मिनट'

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क्योंकि आपका एक शेयर किसी व्यक्ति को
उसके क्रोध पर अंकुश रखने के लिए
प्रेरित कर सकता है ।

अच्छाई

1)
किसी की अच्छाई का इतना भी फायदा मत उठाओ की,

वो बुरा बनने के लिए मजबूर बन जाए !!

2)

गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है,

उन्होने देख लिया की इंसान हमसे अच्छा नोंचता है !!

3)

अजीब दास्ताँ है ज़िन्दगी की,

जीत जाओ तो कई अपने छूट जाते है,

और हार जाओ तो अपने ही छोड़ जाते है !!

4)
जिन्दगी का ये हुनर भी आजमाना चाहिए,

जंग अगर अपनों से हो तो हार जाना चाहिए !!

5)

ना फिक्र कर की जमाना सोचेगा क्या,

ज़माने को अपनी ही फिक्र से फुरसत कहाँ है !!

Friday, July 12, 2019

रिश्ते निभाओ....

1)
कोहरे से लगने लगे हैं सारे रिश्ते अब तो,

अपने कोई दिखते ही नहीं और
जो दिखते हैं वह अपने होते ही नहीं ।।।



2)
कैसे कोई खत्म कर सकता है कोई उस रिश्ते को

जो खुद कहता था दुनिया छोड़ जाऊंगा अगर तुमने तोड़ा इस रिश्ते को



3)

महसूस हो रही है एक खामोशी बड़े शोर के बाद,

टूटा होगा फिर से कोई रिश्ता बड़े अरसे बाद।।



4)

रिश्ते भी आजकल इतने अजीब हो गए है,

तब तक नहीं बोलेंगे ,
जब तक आप आवाज ना दो...



5)

ताने मारने वाले अपने ही तो होते हैं,

वरना औरों को क्या पता की इसका
दिल किस बात से दुखता है !!

Thursday, July 11, 2019

स्कूल की यादें ( मुर्गा रूपी पनिशमेंट)

एक टीचर अपने स्टूडेंट को मुर्गा बनने की सजा दी,
तब उस टीचर और बच्चे के बीच जो वार्तालाप वह पढें और स्कूल के याद करें,,,,


टीचर बोला,
बनजा वहां मुर्गा तेरी गलती की सजा तो यही पाएगा,
तुझको जो बक्स दिया तो कोई होमवर्क करके नहीं लाएगा।



बच्चा मासूमियत से बोला,
बन तो जाऊंगा मुर्गा मैं गुरुदेव पर इस से आप कुछ ना पाओगे,
ना तो मैं अंडा दे पाऊंगा ना आप मुझको खा पाओगे।





तब टीचर बोला
रे नादान,
इस सजा से तेरी स्कूल के बच्चे यही सीख पायेंगे,
जो भी गलती करेंगे वो मुर्गा रूपी दंड पाएंगे।




बच्चा बोला,
इस बार गलती माफ करो गुरुदेव स्कूल में इज्जत नहीं बचा पाऊंगा,
वादा करता हूं गुरुदेव कल पक्का होमवर्क करके आऊंगा।






तब टीचर सीरियस होकर बोला,
इस इज्जत से क्या करेगा रे नादान प्यारे इन्हीं बातों के लिए एक दिन तू तरसेगा,
वादा है मेरा जब तू बड़ा हो जाएगा तो इन्हीं बातों को याद करके तेरी आंखों से नीर बरसेगा।





तब बच्चा अपनी सजा डालने के लिए टीचर की गंभीरता को देखते हुए बोला
मैं नादान परिंदा समझ नहीं पाया,
गुरुदेव जरा विस्तार से बताओ ना


तब टीचर बोला
अभी तक तुम इतना होशियार नहीं बन पाया, नादान परिंदे मेरे  जरा मुर्गा बन के तो दिखाओ ना।।।