कट रही है ज़िन्दगी,
जैसे जी रहे वनवास में
हम तो नर्सिंगकर्मी है,
ड्यूटी करना हर हाल में।
हम तडपते हैं ड्यूटी पर,
परिवार चितिंत है गांव में,
जिंदगी मानो ठहर सी गई है,
बेडी जकडी पाँव में।
सब विभागो में छुट्टी हो गई,
हॉस्पिटल ने पकडी रफ्तार,
ताना मारकर लोग कहे,
बैठा कर पैसा देती है सरकार।
कमरो में राशन नही,
फिर भी ड्यूटी जाते है,
सारी दुकाने बन्द हो जाती,
जब हम वापस आते हैं।
माँ बाप सिसककर पूछ रहे,
बेटा तुम कैसे खाते हो,
जब पूरा देश बन्द है तो,
तुम ड्यूटी क्यो जाते हो।
यहाँ सब कुछ मिल रहा,
झूठ बोलकर माँ को समझाते है,
देश के लिये समर्पित जीवन,
इसलिए ड्यूटी जाते हैं।
हम तो नर्सिंगकर्मी हैं साहब,
केवल अपनी ड्यूटी निभाते हैं
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