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Wednesday, December 31, 2025

मुस्कुराते हुए चेहरे

संघर्षों से डरे हुए 
अकेलेपन की सीढ़ी है हम,

मुस्कुराते हुए चेहरे 
वाली उदास पीढ़ी है हम,,


फुर्सत

अब क्या बेचूं 
ऐ फुर्सत 
तुझे पाने को,

खुद तक को खर्च 
कर दिया जिम्मेदारियां 
निभाने में,,

इज्जत

इज्जत आदमी की 
नहीं होती है भाई, 

आमदनी की 
होती है,,


Tuesday, December 30, 2025

फुर्सत

अब क्या बेचूं 
ऐ फुर्सत 
तुझे पाने को,

खुद तक को खर्च 
कर दिया जिम्मेदारियां 
निभाने में,,

समझदार की थकान

जो समझता है 
वह भी, 

समझ समझ कर 
थक जाता है,,