एक दिन देवरानी और जेठानी में किसी बात पर जोरदार बहस हुई और दोनों में बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक दूसरे का मुह तक ना देखने की कसम भी खा ली और अपने-अपने कमरे में जा कर दरवाजा बंद कर लिया।
थोड़ी देर बाद जेठानी के कमरे के दरवाजे पर खट-खट हुई,
जेठानी गुस्से में ऊंची आवाज में बोली कौन है,
बाहर से आवाज़ आई,
दीदी मैं।
जेठानी ने जोर से दरवाजा खोला और बोली
अभी तो बड़ी कसमें खा कर गई थी,
अब यहाँ क्यों आई हो ?
देवरानी ने कहा,
दीदी सोच कर तो गई थी,
पर माँ की कही एक बात याद आ गई,
कि जब किसी से कुछ कहा-सुनी हो जाए तो उसकी अच्छाईयों को याद करो और मैंने भी यही किया,
मुझें आपका दिया हुआ प्यार ही प्यार याद आया
और मैं आपके लिए चाय ले कर आ गई,
बस फिर क्या था दोनों रोते-रोते एक दूसरे के गले लग गई और
साथ बैठ कर चाय पीने लगी।
जीवन में क्रोध को क्रोध से नहीं जीता सकता है,
बोध से जीता जा सकता है।
अग्नि,अग्नि से नहीं बुझती जल से बुझती है,
समझदार व्यक्ति बड़ी से बड़ी बिगड़ती स्थितियों को दो शब्द प्रेम से बोलकर संभाल लेते है,
हर परिस्थिति में संयम और बड़ा दिल रखना ही श्रेष्ट होता है।
🇮🇳🇮🇳🙏🙏🇮🇳🇮🇳